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Raksha Bandhan shubh muhurat: ये है राखी बांधने का सबसे अच्छा शुभ मुहूर्त

-रक्षासूत्र पर भद्रा का बंधन, प्रदोष काल और रात्रि में राखी बांधना श्रेष्ठ-शहर के ज्योतिषियों की राय: भद्रा समाप्ति के बाद बांधें राखी, श्रावणी कर्म पर दोष नहीं

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Raksha Bandhan 2022 shubh muhurat

भोपाल। इस बार रक्षाबंधन पर्व के दिन भद्रा के कारण असमंजस की स्थिति बन गई है। रक्षाबंधन पर्व 11 अगस्त को मनाया जाएगा, लेकिन इस दिन पूर्णिमा शुरू होने के साथ ही भद्रा भी रहेगी। भद्रा सुबह 9:37 से रात्रि 8:47 तक रहेगी, जबकि पूर्णिमा तिथि अगले दिन यानि 12 अगस्त को सुबह 7 बजे के बाद तक रहेगी। भद्रा में राखी बांधना शुभ (Raksha Bandhan 2022 Muhurat) नहीं माना गया है। ऐसे में कई लोग भ्रमित है कि 11 को रक्षाबंधन मनाए या 12 को उदयाकालीन तिथि होने के कारण इस दिन रक्षाबंधन मनाए। इस संबंध में शहर के अधिकांश पंडितों का कहना है कि रक्षाबंधन का पर्व 11 को ही मनाए। 12 को उदयाकालीन तिथि तो हैं, लेकिन यह चार घटी से कम है, इसलिए 11 को मनाना श्रेष्ठ रहेगा। 11 अगस्त को प्रदोष काल व भद्रा के पूछ काल, आखिरी चरण में पर्व मनाया जा सकता है।

पं. विनोद गौतम, ज्योतिष मठ संस्थान का कहना है कि पौराणिक कथाओं में भद्रा को बिष्टि करण एवं भगवान सूर्य और छाया की पुत्री कहा गया है। इस प्रकार से भद्रा शनिदेव की बहन भी है। शास्त्रों के अनुसार जब भद्रा का जन्म हुआ था, उस समय पर पूजा-पाठ धर्म-कर्म मांगलिक कृत्य में बाधाएं उत्पन्न हुई थी। इसलिए भद्रा को अवरोधक कहा गया है और भद्रा काल शुभ नहीं होता ऐसा शास्त्रों में वर्णन मिलता है । इसलिए भद्रा समाप्ति के बाद राखी बांधना शुभ रहेगा।

पं. रामनारायण आचार्य, बांके बिहारी मार्कंडेय मंदिर का कहना है कि इस दिन पूरे दिन भद्रा रहेगी। ऐसे में प्रदोष काल, गोधुली बेला में राखी बांध सकते हैं। इस समय भद्रा का आखिरी चरण रहता है। जब भद्रा पूछ में होती है, तो इसका असर कम होता है। इसलिए शाम को और रात्रि में रक्षाबंधन पर्व मना सकते हैं।

पं. जगदीश शर्मा, ब्रह्मशक्ति ज्योतिष संस्थान का कहना है कि पूर्णिमा पर अक्सर भद्रा की स्थिति बनती है। इस बार भद्रा सुबह से शाम तक है। भद्रा का वास पाताल में है। निर्णय सिंधु के अनुसार जब पाताल में भद्रा होती है तो उसका ज्यादा दोष नहीं लगता। इसलिए 11 अगस्त को शुभ मुहूर्त में राखी बांधी जा सकती है।

पं. विष्णु राजौरिया, ज्योतिषाचार्य का कहना है कि पुष्पांजलि पंचांग, लोक विजय पंचांग के हिसाब से भद्रा की स्थिति सुबह से रात्रि 8:47 तक रहेगी। राखी भद्रा समाप्ति के बाद ही बांधना चाहिए। अगले दिन उदया तिथि तो है, लेकिन यह चार घटी से कम है। इसलिए 11 को ही पर्व मनाना शुभ रहेगा।