
भोपाल। रायसेन जिले में प्राचीन संस्कृति और धरोहर का खजाना है। लेकिन, यहां कोई व्याख्यान केंद्र न होने की वजह से पर्यटकों को यहां की विरासत के बारे में समझाना मुश्किल होता है। भोपाल से 25 किमी और रायसेन से 20 किमी दूर स्थित रातापानी अभयारण्य में अलौकिक प्राकृतिक सौंदर्य बिखरा पड़ा है। यहां पांच दिन पहले जंगल सफारी की शुरुआत की गई थी। यहां धीरे-धीरे पर्यटकों की संख्या बढ़ रही है।
रातापानी अभयारण्य के बीच औबेदुल्लागंज स्थित है। औबेदुल्लागंज की चारों दिशाओं में तमाम पर्यटन स्थल मौजूद हैं। लेकिन, व्याख्यान केंद्र के अभाव में यहां के पर्यटन के बारे में एक स्थान से पर्यटकों को जानकारी देने में मुश्किल आती है। पर्यटक सड़क किनारे खड़े होकर ब्लॉक के पर्यटन प्वाइंट के बारे में अक्सर पूछते नजर आते हैं।
रानी कमलापति का महल
रातापानी अभयारण्य में औबेदुल्लागंज के पूर्व में रातापानी जलाशय स्थित है, पूर्व-दक्षिण में देलावाड़ी गिनौरगढ़ किला, सनसेट प्वाइंट, आमखो, चोर बावड़ी आदि पर्यटक स्थल हैं। यही नहीं यहां के जंगल में बाघ आसानी से देखे जा सकते हैं। वहीं पश्चिम में रणभैंसा, कैरी महादेव, दाहोद जलाशय व वन्यजीवों से भरा जंगल्र है। उत्तर में भोजपुर का पांच हजार साल पुराना शिवलिंग, आशापुरी का प्राचीन मंदिर स्थित है। दक्षिण में भीम बैठिका, बरुसोत रेस्ट हाउस के सामने रातापानी जलाशय है। भीम बैठिका के अंदर जंगल में भी पर्यटकों के लिए काफी अच्छे प्वाइंट मौजूद हैं, जिसे पर्यटकों के लिए अभी खोला नहीं गया है। इसके अलावा औबेदुल्लागंज के चारों तरफ फैले रातापानी अभयारण्य के अच्छे घनत्व वाले जंगल में करीब 40 बाघ, 60 तेंदुए व आदि वन्यजीव हैं, जो अलग ही रोमांच पैदा करते हैं।
यहां बन सकता है व्याख्यान केंद्र
वन मंडल कार्यालय के सामने मुख्य मार्ग पर राजस्व विभाग की पर्याप्त जगह मौजूद है। यहां काफी बड़ा और पर्यटकों के लिए सुविधायुक्त व्याख्यान केंद्र (इंटरप्रिटेशन सेंटर) बनाया जा सकता है। राजधानी से बस, ट्रेन से आने वाले पर्यटक व्याख्यान केंद्र में आकर रातापानी में फैली धरोहर को जान सकेंगे। वन विभाग यदि यहां से पर्यटन स्थलों के लिए जिप्सी की जंगल सफारी सुविधा शुरू करता है तो बेरोजगारों को भी रोजगार मिल सकेगा।
सुझाव अच्छा है। यकीनन, यहां व्याख्यान केंद्र बनता है तो पर्यटकों को इससे फायदा होगा। हम इसे बनाने का वादा तो नहीं करते, लेकिन प्रयास जरूर करेंगे।
-विजय शाह, वन मंत्री, मप्र शासन
Updated on:
13 Dec 2022 01:22 pm
Published on:
13 Dec 2022 01:21 pm
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