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जानिए किन लोगों का होता है दोबारा जन्म, कहीं आप में तो नहीं हैं ये लक्षण

जानिए किन लोगों का होता है दोबारा जन्म, कहीं आप में तो नहीं हैं ये लक्षण

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भोपाल। जीवन में इंसान के कर्म को सबसे बड़ा माना जाता है। हिंदू धर्म हो यह कोई अन्य धर्म सभी जगह कर्म को प्रधानता दी गयी है। लगभग सभी धर्म में कहा जाता है कि इंसान को उसके कर्मों के अनुसार फल मिलता है। केवल यही नहीं इंसान को उसके कर्मों के हिसाब से ही स्वर्ग और नर्क की प्राप्ति होती है। इसके साथ ही कई धर्म ग्रंथों में पुनर्जन्म से जुड़ी मान्यताओं और कहानियों के बारे में भी बताया गया है। इसके अनुसार हर व्यक्ति की मृत्यु के बाद उसका पुनर्जन्म होता है। शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित जगदीश शर्मा पुनर्जन्म के सिद्धांत से ज्योतिष और विज्ञान दोनों ही सहमत हैं। एक ओर जहां ज्योतिष में माना जाता है कि आप कुंडली देखकर यह जान सकते हैं, कि आप पिछले जन्म में क्या थे वहीं विज्ञान यह मानता है कि आप एक प्रकार की सम्मोहन विद्या के द्वारा यह जान सकते हैं कि आप पूर्व जन्म में क्या थे। दूसरी ओर इसमें इस बात का भी पता लगाया जा सकता है कि किन लोगों का दोबारा अपने ही परिवार में जन्म होता है। आज आपको पंडित जी बताने जा रहे है कि कैसे ज्योतिषी से आप जान सकते है कि आपका दुबारा अपने परिवार में जन्म होगा कि नहीं......

ऐसे पता चलता है दुबारा जन्म होगा या नहीं

पंडित जी बताते है कि आपका दोबारा जन्म होगा या नहीं इस बात का पता सिर्फ दो चीजों से ही चलता है। पहला कि आपकी कुंडली में गुरु ग्रह की स्थिति को देखकर इस बात का पता लगाया जा सकता है और दूसरा कि किसी भी जातक की पत्रिका में बृहस्पति ग्रह किस भाव में है इस बात से पता लगाया जा सकता है। अगर किसी भी जातक की कुंडली में बृहस्पति ग्रह लग्न भाव में बैठा हो तो ऐसे लोगों का जन्म किसी के श्राप या फिर किसी के आशीर्वाद के कारण होता है। श्राप और आशीर्वाद के हिसाब से ही किसी भी जातक को सुख और दुख भोगना पड़ता है।

इन लोगों का होता है दुबारा जन्म

जिन लोगों की कुंडली में बृहस्पति ग्रह चतुर्थ भाव में स्थित होता है उन लोगों का पूर्वजन्म उनके ही परिवार में फिर से होने के संकेत देता है। ऐसा माना जाता है कि ये इसलिए भी होता है क्योंकि उस इंसान को कुछ उद्देश्यों की पूर्ति करना होता है। परिवार में दुबारा जन्म लेकर वह सारे उद्देश्यों की पूर्ति करता है फिर मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।

समाज सुधारक के लिए होता है इनका जन्म

जिन लोगों की कुंडली में गुरु ग्रह दशम भाव में स्थित होता है वह पूर्व में धार्मिक विचारों वाला होना बतलाता है। इस जन्म में वह समाज सुधारक का कार्य करता है। वह उपदेशक होता है, लेकिन ये लोग किसी भी प्रकार से पूजा-पाठ का दिखावा नहीं करते हैं।