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विधानसभा चुनाव में लाल बसें बनेंगी बड़ा चुनावी मुद्दा, जानें वजह

बसें भोपाल से मंडीदीप होते हुए औबेदुल्लागंज थाने की सीमा जाखला पुल तक जाकर वापस लौट रही है।

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विधानसभा चुनाव में लाल बसें बनेंगी बड़ा चुनावी मुद्दा, जानें वजह

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में चलने वाली लो फ्लोर यानी लाल बसों के संचालन को औबेदुल्लागंज तक बढ़ाए जाने की मांग बीते कई सालों से जनता द्वारा की जा रही है। ऐसा नहीं है कि ये रायसेन जिले में प्रवेश नहीं कर रही। ये बसें भोपाल से मंडीदीप होते हुए औबेदुल्लागंज थाने की सीमा जाखला पुल तक जाकर वापस लौट रही है। उद्योगपतियों ने इसको अपनी कंपनी और स्कूल तक बढ़वा लिया है, लेकिन 10 साल में चुने हुए जनप्रतिनिधि इन बसों को औबेदुल्लागंज तक नहीं बढ़वा पाए। अब ये लाल बसें इस बार मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव 2023 में मुद्दा बनने जा रही है।


एक हजार छात्र परेशान

नगर और आसपास ग्रामीण क्षेत्र से करीब एक हजार छात्र रोजाना भोपाल अध्ययन के लिए अपडाउन करते हैं। ये छात्र एक दशक से लाल बसों को औबेदुल्लागंज तक लाने में मांग कर रहे हैं। छात्रों को वर्तमान में मिनी बसों में खड़े होते हुए भोपाल जाना पड़ता है, जिससे छात्र यात्री वाहनों की संख्या बढ़ाए ना जाने से खासे परेशान हैं।

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पर्यटन पर पड़ा असर

नगर के आसपास भीमबैठिका, भोजपुर, देलाबाड़ी, रातापानी जंगल सफारी जैसे दर्जनों पर्यटन स्थल मौजूद हैं। भोपाल से रोजाना सैकड़ों लोग अपने निजी वाहनों से यहां आते हैं, जिससे उनको काफी पैसा खर्च हो जाता है। अगर लाल बसें यहां तक आती तो लोगों को भी ट्रैक्सी और व्यापार में फायदा होता और क्षेत्र का पर्यटन को भी बढ़ाने में मदद मिलती।

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पिछले दो चुनाव में भी बन चुका है मुद्दा

साल 2013 और साल 2018 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी मंच से लाल बसों को औबेदुल्लागंज तक लाने की बात सामने आ चुकी है। प्रत्याशियों ने लाल बसों की लोगों की मांग को भाप कर इसको पहले भी मुद्दा बनाया है, लेकिन चुनाव के बाद सभी इस अहम मुद्दे को भूल गए। अब 10 साल बाद फिर ये क्षेत्र में बड़ा मुद्दा बन गया है।

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व्यापारी, मजदूर, कर्मचारी को भी दिक्कत

व्यापारी रोजाना भोपाल अपडाउन करते हैं। उन्हें अपने निजी वाहनों और बसों से जाना पड़ता है। बड़ी बसें हाईवे पर बायपास पर लोगों को उतार देती है, जिससे रात के समय में व्यापारियों को परेशानी होती है। नगर और आसपास से बड़ी संख्या में मजदूर मंडीदीप और भोपाल जाते हैं। वहीं, भोपाल और औबेदुल्लागंज के कर्मचारी भी यात्री वाहनों की संख्या कम होने से परेशान हैं।