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BHEL के खंडहर आवास बन रहे असामाजिक तत्वों की पनाहगार

राजधानी में भेल प्रशासन ने वर्षों पहले अपने कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए भेल टाउनशिप में आवासों का निर्माण करवाया था, लेकिन आज ये आवास पूरी तरह से

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भोपाल/भेल। राजधानी में भेल प्रशासन ने वर्षों पहले अपने कर्मचारियों और अधिकारियों के लिए भेल टाउनशिप में आवासों का निर्माण करवाया था, लेकिन आज ये आवास पूरी तरह से खंडहर हो गए हैं। अधिकतर आवासों को भेल कर्मचारियों ने खाली भी कर दिया है। अब इन खंडहरों में आसपास के इलाकों में रहने वाले असामाजिक तत्वों को जुआ, सट्टा, नशा आदि करते देखा जा सकता है। गोविंदपुरा और पिपलानी इलाके में वर्षों पहले भेलकर्मियों के लिए करीब ग्यारह हजार आवास बनाए गए थे।

जिनकी हालात काफी बदतर होने के चलते 2014 में भेल प्रशासन ने लगभग 1400 आवासों को ढहाया दिया था। जिसके बाद भी वर्तमान में करीब डेढ़ हजार भवन ऐसे हैं, जो पूरी तरह से खंडहर हो चुके हैं। वर्तमान में यह खाली आवास असामाजिक तत्वों के लिए पनागाह बनते जा रहे हं। इनसे कारण आसपास के क्षेत्र में रहने वाले लोग काफी परेशान हैं।

कई आवासों में तो आसपास के असमाजिक तत्वों ने कब्जा कर रखा है। उक्त आवासों की हालत इतनी बत्तर है कि किसी दिन भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। फिर भी भेल के अधिकारी उक्त भवनों को खाली करवाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। रात होते ही लग जाती है महफिल भेल के खंडहर भवनों में रोज रात होते ही असामाजिक तत्वों को इन खंडहर भवनों के आसपास देखा जाता है। जहां वह पुलिस से बचकर शराब, गांजा आदि नशा करते हैं।

हो सकता है बड़ा हादसा

वर्तमान में उक्तखंडहर भवनों की हालत जिस तरह से दिखाई पड़ती है। उसे देखकर लगता है कि वहां किसी दिन भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। कुछ वर्ष पहले ही प्लाईवुड व्यवसायी मनीष तख्तानी की कस्तूरबा अस्पताल के पास उसके दोस्त हर्षप्रीत ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। शव की पहचान छिपाने के लिए हर्षप्रीत नेे शव को डीजल डालकर खंडहर में जला दिया था।

करीब ६-७ वर्ष से गोविंदपुरा बी सेक्टर के आसपास खंडहर पड़े भवनों में असामाजिक तत्वों द्वारा कब्जा कर मवेशी आदि बांधे जा रहे हैं, जिसकी सूचना मिलने पर कई बार भेल के अधिकारियों ने उक्त भवनों को कब्जाधारियों से खाली करवाया गया। लेकिन दो -चार दिन बाद असामाजिक तत्वों द्वारा उक्त भवनों में कब्जा कर लिया जाता है।

- हसीनउद्दीन, रहवासी

पूर्व में चौदह सौ खंडहर भवन ढहाए जा चुके हैं। अब सर्वे करके खंडहर भवनों को चिह्नित किया जाएगा और डीएमआरसी से उक्त भवनों को ढहाने की अनुमति मिलने के बाद उन्हें ढहाया जाएगा।
विनोदानंद झा, पीआरओ भेल

पूरे समय इलाके में पुलिसकर्मियों द्वारा पेट्रोलिंग की जाती है। इस दौरान कोई भी व्यक्ति नशा करता मिलता है, तो उस पर उचित कार्रवाई की जाती है।
वीरेन्द्र मिश्रा, सीएसपी, गोविंदपुरा