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एमपी में आरएसएस गदगद, एक को छोड़कर सभी मंत्रियों का संघ से सीधा जुड़ाव

RSS MP Cabinet Minister PM Narendra Modi Cabinet Mohan Bhagwat मंत्री बन जाने से न केवल आरएसएस उत्साहित है बल्कि बीजेपी भी अपनी उस भूल का प्रायश्चित करती लगती है जो उसने चुनावों के बीच— 'अब हमें आरएसएस की जरूरत नहीं' जैसा बयान देकर की थी।

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RSS MP Cabinet Minister PM Narendra Modi Cabinet Mohan Bhagwat - देश में 9 जून को एनडीए सरकार के नए मंत्रिमंडल का गठन क्या हुआ, पीएम नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानि आरएसएस को मानो गदगद कर दिया। एमपी के राज्य सभा सांसद एल. मुरुगन को मिलाकर प्रदेश के जिन छह सांसदों को मंत्री बनाया गया है उनमें से एक को छोड़कर शेष सभी आरएसएस की पृष्ठभूमि के हैं। केंद्रीय मंत्री शिवराजसिंह चौहान, वीरेंद्र कुमार खटीक, सावित्री ठाकुर, दुर्गादास उइके और एल. मुरुगन का राजनैतिक कैरियर ही वस्तुत: आरएसएस की शाखाओं से ही शुरु हुआ। एक साथ पांच 'संघियों' के मंत्री बन जाने से न केवल आरएसएस उत्साहित है बल्कि बीजेपी भी अपनी उस भूल का प्रायश्चित करती लगती है जो उसने चुनावों के बीच— 'अब हमें आरएसएस की जरूरत नहीं' जैसा बयान देकर की थी।

मध्यप्रदेश में इस बार बीजेपी सभी 29 सीटों पर जीती। इनमें से 5 सांसदों को पीएम नरेंद्र मोदी ने अपनी केबिनेट में जगह दी। शिवराजसिंह चौहान, ज्योतिरादित्य सिंधिया, वीरेंद्र कुमार खटीक, सावित्री ठाकुर, दुर्गादास उइके को मंत्री बनाया। इन पांच लोकसभा सदस्यों के साथ ही एमपी से राज्यसभा सदस्य एल. मुरुगन भी मंत्री बने। इनमें से केवल ज्योतिरादित्य सिंधिया ही एकमात्र ऐसे मंत्री हैं जो कभी आरएसएस से सीधे तौर पर नहीं जुड़े रहे। एमपी के शेष पांचों मंत्री राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सदस्य रहे हैं।

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शिवराजसिंह चौहान तो आरएसएस के करीब 5 दशक पुराने स्वयंसेवक हैं। वे सन 1972 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य बन गए थे। 1978 में शिवराजसिंह चौहान, आरएसएस की छात्र इकाई अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के संगठन सचिव बन गए थे। इतना ही नहीं, 1982 में उन्हें ABVP की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का सदस्य बनाया गया था। सक्रिय राजनीति में आने के बाद भी संघ और एबीवीपी से उनका जुड़ाव बना रहा।

बैतूल हरदा लोकसभा सीट के सांसद केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके तो आरएसएस के प्रति ऐसे समर्पित हैं कि आजीवन संगठन के लिए कार्य करने का संकल्प ले चुके हैं। वे राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सन 2000 से सदस्य हैं। सन 2007 में उज्जैन में और सन 2008 में राजस्थान के कोटा में संघ प्रशिक्षण वर्ग में शामिल हो चुके हैं। वे आरएसएस संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को अपना आदर्श बताते हैं। 8 फरवरी 2018 को आयोजित विराट हिन्दू सम्मलेन में सर संघ चालक मोहन भागवत के कार्यक्रम में मंच संचालन दुर्गादास उइके ने ही किया था।

लोकसभा चुनाव Lok Sabha Chunav 2024 में टीकमगढ़ से 8 वीं बार के सांसद और एक बार फिर सामाजिक न्याय विभाग के मंत्री बनाए गए डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक खांटी स्वयंसेवक हैं। वे स्कूली जीवन से ही आरएसएस से जुड़ गए थे। डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक ने आरएसएस के शाखा प्रमुख का दायित्व भी संभाला।

केंद्र सरकार में राज्यमंत्री बनाई गईं धार की सांसद सावित्री ठाकुर राजनीति में आने से पहले एक एनजीओ चलाती थीं। इसी दौरान वे आरएसएस से जुड़ गईं। पिछड़े आदिवासी इलाके में पढ़ी लिखी, उदार सोच की महिला होने के कारण आरएसएस ने उन्हें बीजेपी में आगे बढ़ाकर राजनैतिक तौर पर सक्रिय किया। उनकी किस्मत तब बदल गई जब 16वीं लोकसभा चुनाव में उन्हें धार से बीजेपी का उम्मीदवार बनाया गया। धार से दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीतकर वे केंद्रीय मंत्री बन गई हैं। सावित्री ठाकुर कहती भी हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संपर्क में आने के बाद ही मेरे लिए राजनीति के द्वार खुलते चले गए।

मोदी सरकार में मध्यप्रदेश कोटे से एक और मंत्री एल. मुरुगन मूलत: तमिलनाडु के हैं। वे सन 1997 में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ आरएसएस से जुड़ गए थे। कॉलेज के समय से ही संघ से उनका यह जुड़ाव अभी भी बरकरार है। एल. मुरुगन भारतीय जनता पार्टी तमिलनाडु के प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुके हैं। बीजेपी के दक्षिण में विस्तार के लिए चुने गए चेहरों में एल. मुरुगन भी शामिल हैं। बीजेपी उनके माध्यम से दक्षिण में अपना वर्चस्व स्थापित करने की कोशिश कर रही है। आरएसएस के सक्रिय सदस्य रहे मुरुगन को इस बार लोकसभा चुनाव में हार के बाद भी केंद्र में मंत्री बनाया गया है।

केंद्र सरकार में एमपी के मंत्रियों में केवल ज्योतिरादित्य सिंधिया ही एकमात्र ऐसे मंत्री हैं जिन्होंने शायद नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमै (आरएसएस की शाखाओं में गाई जानेवाली प्रार्थना) नहीं गुनगुनाई होगी। हालांकि उनकी स्वर्गीय दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया का आरएसएस और जनसंघ से जुड़ाव सर्वविदित था।