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सावधान! बच्चों में तेजी से फैल रहा ‘RSV वायरस’, 4 लक्षणों को न करें इग्नोर

MP News: बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष पंचरत्न ने बताया कि आरएसवी सक्रिय होने की वजह से छोटे बच्चे ज्यादा बीमार हो रहे हैं।

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फोटो सोर्स: पत्रिका

फोटो सोर्स: पत्रिका

MP News: मौसम में हो रहे परिवर्तन के बीच ब्रोंकियोलाइटिस वायरस (आरएसवी) सक्रिय हो गया है जो बच्चों को अधिक प्रभावित कर रहा है। जेपी अस्पताल के बच्चा वार्ड में 12 से 13 बच्चे उल्टी-दस्त, डायरिया और सर्दी- जुकाम से पीड़ित थे। अमूमन यही स्थिति एम्स और हमीदिया अस्पताल की है।

सामान्य दिनों में जेपी, हमीदिया और एम्स में रोजाना 12 से 13 हजार मरीज आते थे, लेकिन अब यह संख्या बढ़कर 16 से 17 हजार तक पहुंच गई है। अकेले जेपी अस्पताल में मरीजों की संख्या 1300 से बढ़कर 1700 से 1800 तक पहुंच गई है। इस समय जेपी अस्पताल का बच्चा वार्ड मरीजों से भरा हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि इस समय बच्चों में वायरल फीवर, सर्दी-खांसी और न्यूमोनिया तेजी से फैल रहा है। इसका एक अन्य कारण वायरल हेपेटाइटिस भी है।

आरएसवी वायरस का असर

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष पंचरत्न ने बताया कि आरएसवी सक्रिय होने की वजह से छोटे बच्चे ज्यादा बीमार हो रहे हैं। इस वायरस के लक्षण सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं। RSV (रेस्पिरेटरी सिंकाइटियल वायरस) के सामान्य लक्षणों में बहती नाक, खांसी, छींक आना, और बुखार शामिल हैं, जो अक्सर सामान्य सर्दी-जुकाम जैसे होते हैं।

छोटे शिशुओं और बुजुर्गों के लिए यह गंभीर हो सकता है, जिसके लक्षणों में सांस लेने में कठिनाई, चिड़चिड़ापन, और खाने में अरुचि शामिल हो सकते हैं। लेकिन 2 साल से कम उम्र के बच्चों में यह गंभीर न्यूमोनिया और ब्रोंकियोलाइटिस का कारण बन सकता है। लोग मेडिकल स्टोर से दवा देकर इलाज करने की कोशिश करते हैं, जिससे स्थिति बिगड़ जाती है।

कमजोर इम्यूनिटी वालों के लिए खतरा

यह वायरस ज्यादातर बच्चों को प्रभावित करता है, लेकिन कमजोर इम्यूनिटी वाले बुजुर्ग, दिल के मरीज और अस्थमा रोगी भी इसकी चपेट में आ सकते हैं।

तेजी से स्वस्थ हो रहे मरीज

आरएसवी से संक्रमित ज्यादातर मरीज 7 से 10 दिन में ठीक हो जाते हैं। करीब 25 प्रतिशत मरीजों में लक्षण दो हफ्ते तक रह सकते हैं। अभी ज्यादातर मरीजों को सामान्य दवाओं से ही राहत मिल रही है। - डॉ. राकेश श्रीवास्तव, सिविल सर्जन, जेपी अस्पताल

बचाव के उपाय

-हमेशा उबला हुआ और शुद्ध पानी पिएं।

-ठंडी चीजों और बासी भोजन से बचें।

-बच्चों को घर का ताजा खाना ही दें।

-बीमार बच्चों को स्कूल न भेजें और स्वस्थ बच्चों को उनसे दूर रखें।

-गले में खराश हो तो गुनगुने पानी से गरारे करें।