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घर पर तिरंगा फहराने के पहले जान लें राष्ट्रीय ध्वज के ये नियम

ध्वज संहिता के प्रावधान

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भोपाल. आजादी के 75वें साल के अवसर पर हर घर तिरंगा अभियान चलाया जा रहा है. देशभर की तरह मध्यप्रदेश में भी हर घर तिरंगा अभियान चल रहा है. इसके अंतर्गत रविवार को भी कई जगहों पर कार्यक्रम आयोजित किए गए. राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान और महत्व को ध्यान में रखते हुए घर, कार्यालय आदि स्थानों पर तिरंगा फहराने के कुछ नियम हैं जिनका हमें अनिवार्य रूप से पालन करना चाहिए. नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज की गरिमा और सम्मान के अनुरूप ही घर पर तिरंगा फहराना चाहिए.

भारतीय ध्वज संहिता में है प्रावधान
ध्वज संहिता के अन्तर्गत राष्ट्रीय ध्वज को अपने व्यक्तिगत प्रतिष्ठानों या घरों में फहराने से संबंधित नियम- कानून और परंपराओं का जिक्र है. यह संहिता सन 2002 में बनाई गई थी और इसमें संशोधन भी किया जा चुका है. अब संहिता में सभी नियमों औपचारिकताओं और निर्देशों को एक साथ लाने का प्रयास किया गया है.

घर पर झंडा फहराने के नियम.
- जब भी राष्ट्रीय ध्वज प्रदर्शित किया जाता है तो वह सम्मान की स्थिति में होना चाहिए
- राष्ट्रीय ध्वज अगर क्षतिग्रस्त हो, जरा भी फटा हो तो उसे प्रदर्शित नहीं किया जाना चाहिए
- राष्ट्रीय ध्वज पर कुछ भी लिखा या छपा नहीं होना चाहिए
- किसी अन्य ध्वज या झंडे के साथ एक ही मास्टहेड, उनके बराबर ऊंचाई से झंडा ना फहरायें
- किसी भी प्राइवेट वाहन पर झंडा नहीं फहराया जाना चाहिए
- वाहन में झंडा लगाने के लिए ध्वज संहिता के भाग 3 की धारा में प्रावधान निहित किए गए हैं.
- राष्ट्रीय ध्वज में केसरिया रंग सबसे ऊपर होना चाहिए
- जब तिरंगा लंबवत या ऊर्ध्वाधर प्रदर्शित किया जाता है तो केसरिया रंग की पट्टी दाईं ओर होनी चाहिए
- जहां तक संभव हो ध्वज संहिता के भाग.1 में निर्धारित विनिर्देशों के अनुरूप ही तिरंगा प्रदर्शित होना चाहिए
- कोई अन्य झंडा राष्ट्रीय ध्वज से ऊपर या बराबर नहीं होना चाहिए
- फूलमाला या प्रतीक सहित कोई भी चीज राष्ट्रीय के ऊपर नहीं होनी चाहिए
- महत्वपूर्ण राष्ट्रीय या सांस्कृतिक कार्यक्रमों और खेलों के दौरान जनता को कागज से बने ध्वज को लहराने की अनुमति दी गई है
- समारोह समाप्त हो जाने के बाद कागज के झंडे को विकृत नहीं किया जा सकता
- ऐसे झंडों को फेंका भी नहीं जा सकता, इनका एकांत में पूरे सम्मान और मर्यादा के साथ निपटान किए जाने का प्रावधान है