
saal 2018 ka moon rashifal
भोपाल।मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बीते दिनों पिंक ड्रायविंग लायसेंस के लिए आरटीओ में युवतियों की खूब भीड़ लगी। मिली जानकारी के मुताबिक, प्रदेश की बालिकाओं और महिलाओं के लिए नि:शुल्क ड्रायविंग लायसेंस बनाने का प्रावधान किया गया है। इस अभियान का मकसद बालिकाएं और महिलाएं अधिकारपूर्वक दोपहिया और चार पहिया वाहन चला सकें। राज्य सरकार के परिवहन, उच्च शिक्षा, स्कूल शिक्षा विभाग तथा महिला सशक्तिकरण संचालनालय द्वारा पिंक ड्रायविंग लायसेंस बनाने के लिए विशेष शिविरों का आयोजन किया जाएगा। लायसेंस बनवाने के लिए प्रेरित करने के उददेश्य से आओ भैया तुम्हें सैर कराऊं की टैग लाइन (नाम से) से पहले यह अभियान चलाया गया था। यह शिविर महाविद्यालयों, शालाओं, नगर निगम, नगर पालिका तथा विकासखण्ड स्तर पर आयोजित किए जाएंगे।
6 माह के लिए अस्थायी लाइसेंस
मिली जानकारी के अनुसार अस्थायी ड्रायविंग लायसेंस नियमानुसार छह माह की अवधि के लिए बनाया जाएगा। इस अवधि में प्रदेश के 94 ड्रायविंग प्रशिक्षण संस्थानों के माध्यम से बालिकाओं-महिलाओं को ड्राइविंग प्रशिक्षण दिया जाएगा। जब बालिकाएं वाहन चालन सीख जाएंगी उसके बाद ही महिलाएं और बालिकाओं के लिए परिवहन विभाग विशेष अभियान चलाकर नियमित लायसेंस उपलब्ध कराएगा।
रात को भूलकर भी न देखें चंद्रमा
अगर आप दोपहिया वाहन चलाते हैं तो ध्यान रखें कि जिस रात में चांद पूरा रहता है उस रात के पहले बाइक हादसे का शिकार होने की संभावना ज्यादा होती है। ये बात हम नहीं कह रहे हैं बल्कि ये बात एक नई स्टडी में सामने आई है। शोधकर्ताओं का मानना है कि जिस दिना चांद पूरा रहता है उस दिन बाइक सवार का ध्यान ज्यादा भटक जाता है जिससे इस रात को सबसे ज्यादा हादसे होते हैं। बता दें कि साल में करीब 12 बार पूरा चांद दिखता है जो बड़ा और चमकीला होता है, इसलिए भी ड्राइवर का ध्यान भटका सकता है।
ये हैं आकड़े
कनाडा की यूनिवर्सिटी ऑफ टॉरंटो और अमेरिका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने पूर्ण चंद्र वाली रात में होने वाले सड़क हादसों को गिना उसके बाद पूर्ण चंद्र से ठीक एक हफ्ते पहले और बाद वाले हफ्ते में होने वाले सड़क हादसों की गिनती की। इसका परिणाम ये आया कि 1 हजार 482 रातों में 13 हजार 29 लोग घातक बाइक हादसों का शिकार हुए। इनमें 494 रातें पूर्ण चंद्र वाली थीं, जबकि 988 रातें सामान्य थीं। आमतौर पर बाइक चलाने वाला मध्यम उम्र का पुरुष (औसत उम्र 32 साल) होता है जो हेलमेट नहीं पहनता। कुल मिलाकर साल 1975 से 2014 के बीच पूरे चांद की 494 रातों में 4 हजार 494 घातक दुर्घटनाएं हुईं।
रात में चंद्रमा देखना बनता है पाप का कारण, अंजाने में लगता है ये श्राप
हिंदू धर्म के देवी- देवताओं में मानें जानें वाले चंद्रमा के बारें में आपनें कभी यह सुना है कि चंद्रमा को भी देखनें से कोई दोष लगता है। चंद्रमा जिसें देख कर लोग खूबसूरती की तारीफ करते है, जिसकी तुलना सुंदर लोगों से की जाती है, लेकिन भाद्र पद में शुक्ल पक्ष चतुर्थी को चंद्रमा नही देखना चाहिए। इस बारें में विस्तार से रामचरित मानस में बताया गया कि इस दिन चांद देखनें से क्या होता है। इस दिन चंद्रमा देखना आपके लिए कितना हानिकारक हो सकता है। इसके पीछें कई पौराणिक कथाएं भी है जो हिंदू धर्म के ग्रंथों में दी गई है। इसके पीछें एक पौराणिक कथा है माना जाता है कि चांद को अपनी खूबसूरती में बहुत घमंड था जिसके कारण वह सभी को बदसूरत समझता था। एक दिन भगवान गणेश घूमते-घूमते चंद्रलोक पहुंच गए। चंद्रमा उन्हें वहा देखकर जोर-जोर से हंसने लगे क्योंकि गणेश भगवान का उन्हें टूटा हुआ दांत, हाथी का सिर और मुषक वाहन दिख गया था। चंद्रमा को वह कुरुप लग रहे थे जिसके लिए चांद नें अनका खुब उपहास किया जिससे कोध्रित होकर गणेश भगवान ने चंद्रमा को श्राप दे दिया कि जिस रूप का तुम्हें इतना अभिमान है जिसके कारण तुम मेरी हंसी उड़ा रहे हो, इसी कारण चौथ के दिन तेरा रुप इतना कुरुप दो जाएगा कि इस दिन तुम्हें कोई देखेगा नहीं और जिसनें भी देखा उसे दोष लग जाएगा।
कुण्डली में चंद्र का प्रभाव है तो करें ये उपाय
यदि आपकी जन्म कुंडली में चंद्रमा की दशा खराब है और इसके कारण आपके जीवन में जानें कितनी कठिनाईयां आ रही है। तो इसके लिए आप चंद उपाय कर इन मुश्किलों से छुटकारा पा सकते हैं। पंडित सुनील शर्मा के अनुसार कुंडली में ग्रहों की कमजोर स्थिति कई तरह से परेशानी पैदा कर सकती है। अगर आपकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर स्थिति में है तो यह भी आपकी परेशानी का सबब बन सकता है। चंद्रमा को संतुलित करने या उसकी स्थिति को सुधारने के लिए आप रंगों से लेकर वास्तुशास्त्र तक से जुड़े कारगर उपाय आजमा सकते हैं। जो इस प्रकार हैं...
1. आप पश्चिम दिशा में झाड़ू या कोई भी गंदगी चीज जैसे कि पोंछा, डस्टर आदि ना रखें। साथ ही घर के उत्तर-पश्चिमी कोने में गुलाबी रंग का बल्ब लगाएं और दिन ढलते ही इसे जला देना चाहिए।
2. अगर आपका चंद्रमा कमजोर है और उसे ताकतवर बनाना है, तो कम से कम 10 रत्ती का मोती धारण कर सकते हैं, लेकिन इससे पहले किसी जानकार को अपनी कुण्डली दिखा लें।
3. अगर आप मोती नहीं खरीद सकते है, तो मोती के उपरत्न मून स्टोन को भी पहन सकते हैं। इसे भी आप चांदी की अंगूठी में डालकर पहन सकते है। याफिर इसे आप चांदी का लॉकेट बनवाकर गले में पहन सकते हैं।
मन और मस्तिष्क संबंधी देता है परेशानी
ऋग्वेद में कहा गया है कि च्चन्द्रमा मनसो जातश्चक्षोः सूर्यो अजायत:।च् अर्थात चंद्रमा जातक के मन का स्वामी होता है। मन का स्वामी होने के कारण यदि जन्म कुंडली में चंद्रमा की स्थिति ठीक न हो या वह दोषपूर्ण स्थिति में हो तो जातक को मन और मस्तिष्क से संबंधी परेशानियां होती हैं। पंडित शर्मा के मुताबिक भारत में प्रत्येक जन्मपत्री में दो लग्न बनाये जाते हैं। एक जन्म लग्न और दूसरा चन्द्र लग्न। जन्म लग्न को देह समझा जाए तो चन्द्र लग्न मन है। बिना मन के देह का कोई अस्तित्व नहीं होता और बिना देह के मन का कोई स्थान नहीं है। देह और मन हर प्राणी के लिए आवश्यक है इसीलिये लग्न और चन्द्र दोनों की स्थिति देखना ज्योतिष शास्त्र में बहुत ही महत्त्वपूर्ण है। सूर्य लग्न का अपना महत्व है। वह आत्मा की स्थिति को दर्शाता है। मन और देह दोनों का विनाश हो जाता है परन्तु आत्मा अमर है।
Published on:
14 Dec 2017 02:10 pm
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