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सात मेडिकल कालेजों सहित 21 अस्पतालों में 16 सौ 61 करोड़ का घोटाला

- मंत्रालय के अफसरों से लेकर मैदानी अफसर शामिल- एक ही बिल पर दो-दो बार करोड़ों के भुगतान - दवा खरीदी और साफ-सफाई का ठेका देने के नाम पर बड़ा खेल- महालेखाकार की आडिट टीम ने लगाई आपत्ति, सरकार से मांगा जवाब

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भोपाल

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Ashok Gautam

Sep 30, 2019

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Ventilator scam: BJP took action without warning, ban on purchase

भोपाल। प्रदेश के सात चिकित्सा शिक्षा महाविधालय सहित 21 स्वास्थ्य संस्थाओं में १६ सौ ६१ करोड़ रूपए से अधिक का घोटाला हुआ है। चिकित्सा शिक्षा संचालनालय से लेकर मैदानी अफसरों ने २००७ से २०१८ तक जमकर खेल किया है। इसमें एक ही बिल पर दो-दो बार भुगतान करना, दवा खरीदी और सरकारी अस्पतालों में सफाई ठेके के नाम पर ये अनियमितताएं की गई हैं।

इसका खुलासा महालेखाकर के ऑडिट में हुआ है। महालेखाकार के अफसरों ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा है कि स्वास्थ्य महकमे ने लाखों रुपए के फर्जी बिल लगाकर बिजली उपकरण खरीदना बताए गए हैं। जो कि गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। ऑडिट रिपोर्ट में यह भी कहा है कि चिकित्सा शिक्षा महाविधालय और अस्पतालों में करोड़ों रूपए से खरीदी गई दवाओं की गुणवत्ता का परीक्षण भी नहीं कराया गया है।

जांच में यह बात भी सामने आई कि कई अस्पतालों और मेडिकल कालेजों ने कमीशन के लिए पहले मीशनें खरीद लीं। इसके बाद मशीन रखने के लिए कक्ष, बिजली की फिटिंग और आपेरटर की भर्ती की गई है। आउटर्सोस के कर्मचारियों को अस्पतालों और मेडिकल कालेज में जरूरत से ज्यादा भर्ती किया गया है। स्वशासी समिति की अनुमति के बिना ही करोड़ों रूपए संस्थाओं ने खर्च कर दिए। इसके साथ ही इन राशियों की उपयोगिता प्रमाण पत्र भी शासन को नहीं दिया गया।

परिसर में रहने डॉक्टरों से नहीं वसूला जल कर

मेडिकल कालेजों परिसर में रह रहे डॉक्टरों और मेडिकल स्टाफ से जल कर नहीं वसूला गया। संस्थान उनके हिस्से जलकर की राशि खुद जमा करता था। इसके अलावा चिकित्सालयों में जल कर घरेलू दरों पर नगर निगमों में जमा किया गया, जिस अलग-अलग मेडिकल कालेजों में करोड़ों की पेनालटी लगाई गई। चिकित्सकों को अव्यवसायिक भत्तों का निर्धारित सीमा से अधिक भुगतान किया गया। डाक्टरों और चिकित्सा कर्मचारियों के वेतन भत्ते में सीमा से ज्यादा राशि खर्च की गई। सफाई कर्मचारी होने के बाद भी सफाई का काम ठेके पर दिया गया। ठेकेदारों को उपकृत करने के लिए निर्धारित संख्या से अधिक सुरक्षाकर्मी रखे गए।


नर्सिंग कॉलेज के प्राचार्य ने खोला फर्जी खाता

ऑडिट में इस बात का भी खुलासा हुआ कि जबलपुर नर्सिंग कालेज के प्राचार्य ने फर्जी तरीके से खाता खोलकर उसमें सरकारी पैसा जमा करवाया। जबकि यह पैसा सरकार के खाते में जमा होना था। ऑडिट टीम ने इस मामले में आपत्ति करते हुए जवाब तलब किया है। जांच में इस कालेज में नर्सिंग छात्राओं के कॉशन मनी में गबन होने का मामला भी सामने आया है। इसके अलावा महाविद्यालयों में छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं देने के मामले भी मिले हैं।

जीआर मेडिकल कॉलेज में निजी नर्सिंग स्कूल का संचालन

गजराराजा मेडिकल कॉलेज में ढेरों अनियमितता के साथ आईएनसी के नियम के विरूद्ध निजी नर्सिंग स्कूल चलते हुए मिला। ऑडिट टीम ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई है। इसके अलावा जेएच के अधीक्षक को ढाई करोड़ रुपए लोन दिया गया था, लेकिन इसकी आज तक वसूली नहीं की गई। मनमाने तरीके से ***** ब्लड कम्पोनेन्ट प्रोसेसिंग चार्जेस तय करने से ५५ लाख रुपए की चपत लगी है। सुरक्षा व्यवस्था में वित्तीय अनियमितताएं की गई हैं। जेएच में रैबीज के इंजेक्शन खरीदने में भी लाखों रुपए की गड़बड़ी की गई। इन्हें बाजार दर से अधिक में खरीदा गया।


एमवाय में दवाएं खरीदने में गड़बड़ी

एमवाय में दवा खरीदी में घोटाला किया गया है। ऑडिट रिपोर्ट में कहा गया है कि सबसे कम दर के टेंडर वाले से दवाएं लेने की बजाए दूसरे नंबर पर आए टेंडर वाले ठेकेदार से दवाएं खरीदी की गईं। इसी तरह जननी सुरक्षा योजना में बरती गई लापरवाही से अस्पताल को करोड़ों रुपए की चपत लगी है। वहीं अस्पताल की सामग्री को प्रिंट करने के नाम पर ५६ लाख रुपए के फर्जी बिल लगाए गए हैं। डेढ करोड़ की बिजली उपकरण खरीदी में अनियमितता की गई। मरीजों को घटिया खाना खिलाया गया। वहीं इंदौर के कैंसर अस्पताल अधीक्षक ने जरूरत से ज्यादा दवा खरीदी गई गई। करोड़ों रूपए की दवाओं का गुणवत्ता परीक्षण नहीं कराया गया।


गंाधी चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल

गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन ने सफाई कर्मचारी होने के बावजूद सफाई का ठेका दिया। इतना ही नहीं ठेकेदार को अधिक भुगतान भी कर दिया। वहीं सुल्तानिया अस्पताल के अधीक्षक ने रोल बैण्डेज, गांज कॉल बैंडेल और दवाओं की जरुरत से ज्यादा खरीदी की। वहीं इन दवओं के दो बार बिल लगाकर भुगतान किया गया। प्रसूता को निर्धारित अवधि तक चिकित्सालयों में भर्ती न रहने पर भी आधिक सहायता का भुगतान किया गया।

सुभाष चंन्द्र मेडिकल कालेज जबलपुर

नेताजी सुभाष चन्द्र चिकित्सा महाविद्यालय में जरुरत से ज्यादा सफाई कर्मी और सुरक्षा कर्मियों को रखा गया। वहीं मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक ने निर्धारित दर से अधिक दर पर उपकरण और दवाएं खरीदी। एक ही चालान से एक ही मरीजों को दो बार औषधि का वितरण दिखाया। लाखों की अनियमितताएं सामने आई।


श्यामशाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा

श्यामशाह मेडिकल कॉलेज के डीन ने जितने सफाई कर्मचारियों को रखा उससे कहीं ज्यादा भुगतान किया गया। ट्रामा केयर सेंटर के लिए भवन निर्माण और कर्मचारियों की भर्ती किए बिना उपकरणों की खरीदी की गई। स्वशासी समिति के बिना अनुमति के ही करोड़ों रूपए खर्च कर दिए गए।

कहां कितनी गड़बड़ी -

संस्था का नाम ------------------------------------------ ------अनियमितता की राशि लाख में
अधिष्ठाता महात्मा गंाधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय ग्वालियर -------3717.61

जयारोग चिकित्सालय ग्वालियर -----------------------------6464.55
अधिष्ठाता महात्मा गंाधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय इंदौर --------------6828.52

एमवाय अस्तपाल इंदौर---------------------------------------9308.06
मानसिक चिकित्सालय इंदौर -----------------------------------145.89

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प्रचार्य नर्सिंग महाविद्यालय इंदौर --------------------------------1611.01
अधीक्षक कैंसर अस्पताल इंदौर ---------------------------1191.47

प्राचार्य नर्सिंग महाविद्यालय इंदौर ------------------1611.01
अधिष्ठाता चिकित्सा महाविद्यालय भोपाल---------56790.89

अधीक्षक सुल्तानिया जनाना अस्तानिया जनाना अस्तपाल भोपाल-----४८४९.२३
संचालक चिकित्सा शिक्षा भोपाल---------------------19568.36

संचालक सूचना शिक्षा संचार ब्यूरो ------------------6५१.५७
अधिष्ठाता महात्मा गंाधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय जबलपुर----११७७६४.८

उप संचालक, सुपरीडेंट मेडिकल कालेज अस्तपाल जबलपुर ------8013.34
वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट सुपरिटेंडेंट कैंसर अस्तपाल जबलपुर ------------2303.12

अधीष्ठाता श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय रीवा-------------6982.74
संचालक, सुपरीडेंट जीएम अस्पताल रीवा--------------------979.5

अधीष्ठाता बुंदेलखंड चिकित्सा महाविद्यालय सागर --------------२२३१६.३७
मानसिक चिकित्सालय ग्वालियर --------------------------661.24

मानसिक चिकित्सालय ग्वालियर --------------------------661.24
शासकीय बीएमसी नर्सिंग महाविद्यालय जबलपुर ----------------396.24