
ट्रैफिक लाइट पर रुकना, समाज के हर तबके की इज्जत करना नेशनलिज्म : अनुभव
अनुभव सिन्हा
अनुभव ने बताया कि इसका टाइटल मुल्क इसलिए है क्योंकि यह फिल्म हमारे और हमारे देश के बारे में है। आजकल हम राष्ट्रवाद के बारे में तमाम बातें सुनते रहते हैं और मेरा देश, मेरा भारत जैसे शब्द तो नारे ही बन गए हैं। यह कहना बहुत आसान है कि मैं अपने देश से प्यार करता हूं लेकिन इसके मायने इस कहने से कहीं ज्यादा है।
अनुभव ने कहा कि इस फिल्म में ऋषि कपूर के रोल के लिए मेरे पास कोई सेकंड च्वाइस थी ही नहीं, अगर ऋषि कपूर नहीं होते तो मैं यह फिल्म ही नहीं बनाता। अनुभव ने बताया कि मुल्क बनाने से पहले मैंने कई जगह आंतकवाद की परिभाषा सर्च की लेकिन मुझे कोई सटीक परिभाषा नहीं मिली।
बाद में मुझे सीआईए की परिभाषा मिली है जिसे ज्यादातर देश मानते हैं। इसके मुताबिक सिविलियंस के ऊपर इंटीमिडेशन या वायलेंस का इस्तेमाल करना आतंकवाद है। खास बात यह है कि इस परिभाषा में कहीं भी धर्म का जिक्र नहीं किया गया है।
अनुभव ने कहा कि देशप्रेम का सवाल हर कम्युनिटी से नहीं पूछा जाता है? यह सिर्फ मुस्लिम से ही पूछा जाता है, लोग खुद के ट्विटर अकाउंट पर देशभक्त लिखते हैं लेकिन देशभक्ति की परिभाषा क्या है? मेरा मानना है कि ट्रैफिक लाइट पर रुकना, बुजुर्गों को बैठने की जगह देना, समाज के हर तबके की इज्जत करना नेशनलिज्म है। जो आदमी देश से हजारों-करोड़ों रुपए लेकर भाग जाता है वो देशद्रोही है लेकिन जो अपने देश में रह रहा है वो देशभक्त है।
तापसी पन्नू
तापसी ने बताया कि इस फिल्म में मेरा किरदार एडवोकेट आरती मोहम्मद का है। इस रोल के लिए मैंने किसी लॉयर के घर जाकर कोचिंग नहीं ली थी। इसके लिए मैंने सेट पर डायरेक्टर के साथ खूब डिस्कशन किया। इसके अलावा कोर्टरूम सीन के वक्त सेट पर हमारे साथ एक प्रैक्टिसिंग लॉयर मौजूद रहते थे। जो इस बात पर नजर रखते थे कि जज को कैसे एड्रेस करना है या कटघरे में खड़े व्यक्ति को कैसे एड्रेस करना है।
चूंकि मैंने पिंक की है तो मुझे कोर्टरूम के बारे में आइडिया था। तापसी ने बताया कि इस फिल्म में मेरा एक मोनोलॉग है जो करीब दो पेज का है। इसमें बड़ी ही खूबसूरती के साथ 'हमÓ और 'वोÓ के बारे में बताया गया है। मैंने पहले ही कह दिया था कि फिल्म में क्लोजिंग स्टेटमेंट मेरा ही होगा।
फिल्म साइन करने से पहले क्या देखती हैं? इस सवाल पर तापसी ने बताया कि मैं खुद को मिडिल क्लास फैमिली से मानती हूं इसलिए मैं किसी भी फिल्म को चूज करने से पहले तीन चीजें देखती हूं। पहला- क्या मैं अपनी कमाई के 500 रुपए इस मूवी पर खर्च करना चाहूंगी? दूसरा- मुझे अपनी लाइफ के 40-50 दिन किसी डायरेक्टर के सुपरविजन में बिताने हैं तो क्या मुझे उनसे कुछ सीखने को मिलेगा? तीसरा- क्या मैं भविष्य में अपने बच्चों को यह फिल्म दिखाकर कह सकूंगी कि मैं इस फिल्म का हिस्सा रही हूं?
Published on:
07 Aug 2018 09:35 am
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