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शहीद भवन : बादल सरकार के लिखे नाटक ‘सारी रात’ का मंचन

नाटक में बरसात की ‘सारी रात’ की कहानी... भोपाल में करीब 10 साल बाद हुआ इस नाटक का मंचन

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भोपाल। ‘रात, सारी रात जागता रहा मैं अविचल अनवरत अनिद्रा से भरा अपलक’ इस पंक्ति के इर्द-गिर्द घुमते हुए बादल सरकार द्वारा लिखित नाटक ‘सारी रात’ का मंचन बुधवार शाम शहीद भवन सभागार में किया गया। करीब 10 साल बाद यह प्ले भोपाल में किया गया। नाटक की कहानी बरसात की एक रात की कहानी है, जिसमें सैर को निकले पति- पत्नी रास्ता भूल जाते हैं और बारिश से बचने के लिए एक सुनसान घर में शरण लेते है जहां अचानक एक वृद्ध व्यक्ति प्रकट होता है जो अपने आप को उस घर का मालिक बताता है और इस विवाहित जोड़े की आवभगत में जुड़ जाता है।

यह नाटक इन तीन चरित्रों के वार्तालाप के रूप मे दर्शको के सामने आता है। जिसके दौरान उस वृद्ध की वजह से, प्यारा नोक-झोंक भरा और पुख्ता दिखने वाले इस नवविवाहित जोड़े के आपसी संबंधो का अंतद्र्वंद्व बाहर आता है। शचिंद्र श्रीवास्तव द्वारा निर्देशित और नितिन तेजराज, सवी भंडारी द्वारा अभिनीत यह करीब एक घंटे 15 मिनट तक दर्शको को अपने से बांधे रखता है।

बशुरुआत के आधे घंटे तक लगातार दर्शकों के मन में यह रोमांच बना रहता है कि अगले दृश्य में क्या होगा? अजीब वेष-भूषा और शक्ल वाला यह वृद्ध व्यक्ति कौन है? यह एक कल्पना है या रोमांच कायम रखने के लिए किया गया एक निर्देशकीय प्रयास... लेकिन नाटक के दूसरे आधे घंटे में सब स्पष्ट हो जाता है। नाटक में लाइटिंग और पानी की मदद से बारिश का सीन बहुत ही शानदार तरीके से क्रिएट किया गया।

नहीं खींची सही और गलत की कोई रेखा

वास्तविकता और काल्पनिकता के बीच हिचकोले लेता यह वृद्ध चरित्र अलग- अलग समय में अलग-अलग भूमिका निभाता है। कभी वो एक मेजबान है तो कभी एक औरत का काल्पनिक प्रेमी जिसमे वो सब कुछ है ,जो नाटक में मौजूद स्त्री एक पति से चाहती है। यह प्रेमी एक पत्नी की वैसी आकांक्षाओं की उपज है जो उसके सीधे साधे पति की समझ में ही नहीं आता। नाटक की खासियत यह है कि निर्देशक और नाटककार दोनों ने ही सही और गलत की रेखा नहीं खींची है।

असल में एडवोकेट हैं नाटक के डायरेक्टर

इस नाटक के डायरेक्टर शचिंद्र श्रीवास्तव हैं जोकि इस प्ले में बुजुर्ग व्यक्ति का भी किरदार निभाते नजर आए। असल जिंदगी में शचिंद्र एक एडवोकेट हैं जो जिला अदालत में क्रिमिनल और क्लेम केसेज लड़ते हैं। शचिंद्र बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 1985 से जावेद जैदी और रामप्रसाद मिश्रा के साथ प्ले करना शुरू किया था। भोपाल यूनिवर्सिटी में भी नेशनल लेवल पर प्ले किए जिसमें उन्हें बेस्ट एक्टर का खिताब और गोल्ड मेडल भी मिला। हमीदिया कॉलेज से एलएलबी करने के बाद वर्ष 1992 से अगले आठ सालों तक वकालत की प्रैक्टिस की। फिर वर्ष 2000 में आलोक चटर्जी के साथ जुडकऱ कई प्ले किए। वर्ष 2006 में अपनी संस्था बनाई और अब तक करीब 10 प्ले डायरेक्टर कर चुके हैं। शचिंद्र कई फिल्में और सीरियल्स में भी काम कर चुके हैं।