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शुक्र के आपकी राशि में शुभ-अशुभ प्रभाव

जानें आपके लिए शुभ या अशुभ है शुक्र

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शुक्र ग्रह के शुभ और अशुभ फल

भोपाल। 20 अप्रैल से शुक्र राशि बदलकर वृषभ में आ गया है। शुक्र ग्रह को सुंदरता,भौतिक सुख-सुविधा और ऐश्वर्य का प्रतीक माना जाता है। इस राशि में ये ग्रह 14 मई तक रहेगा। जिसका शुभ प्रभाव 9 राशियों पर पड़ेगा। वहीं अन्य 3 राशि वालों के लिए समय मिला-जुला रहेगा। यह अपनी ही राशि में गोचर हुआ है, जिसके कारण से कई राशियों पर इसका शुभ प्रभाव पड़ेगा। शुक्र के राशि परिवर्तन से मेष, वृष, कर्क, सिंह, कन्या, वृश्चिक, मकर, कुंभ और मीन राशि वालों
के लिए अच्छा समय रहेगा। ये ग्रह अपनी ही राशि वृष में आ रहा है। खुद की राशि में आने से इसका शुभ प्रभाव और बढ़ जाएगा।

जानें शुक्र ग्रह के शुभ और अशुभ फल

सौरमंडल के नवग्रहों में शुक्र का महत्व अधिक है। आकाश में सबसे तेज चमकदार तारा शुक्र ही है। आकाश में शुक्र ग्रह को आसानी से देखा जा सकता है। इसे
संध्या और भोर का तारा भी कहते हैं, क्योंकि इस ग्रह का उदय आकाश में या तो सूर्योदय के पूर्व या संध्या को सूर्यास्त के पश्चात होता है।

शुभ की निशानी : सुंदर शरीर वाला पुरुष या स्त्री में आत्मविश्वास भरपूर रहता है। स्त्रियां स्वत: ही आकर्षित होने लगती हैं। व्यक्ति धनवान और साधन-सम्पन्न होता है। कवि चरित्र, कामुक प्रवृत्ति यदि शनि मंद कार्य करे तो शुक्र साथ छोड़ देता है। शुक्र का बल हो तो ऐसा व्यक्ति ऐशो-आराम में अपना
जीवन बिताता है। फिल्म या साहित्य में रुचि रहती है।

अशुभ की निशानी : शुक्र के साथ राहु का होना अर्थात स्त्री तथा दौलत का असर खत्म। जिसकी राशि में शुक्र जब अशुभ फल देता है, तो जातक का अंगूठा बिना किसी बीमारी के बेकार हो जाता है, स्वप्न-दोष बार-बार होने लगता है। त्वचा में विकार (त्वचा संबंधी रोग) होने लगता है। इसके अलावा भी ऐसी कई स्थितियां हैं जिससे शुक्र को मंदा माना गया है

शुक्र के अशुभ लक्षण दिखाई दें तो करें ये 6 आसान उपाय

शुक्र जब अशुभ फल देता है, तो जातक का अंगूठा बिना किसी बीमारी के बेकार हो जाता है।
स्वप्न-दोष बार-बार होने लगता है।
त्वचा में विकार (त्वचा संबंधी रोग) होने लगता है।
शुक्र के सरल-उपाय
शुक्रवार का व्रत रखें।
लक्ष्मी की उपासना करें।
सफेद एवं साफ वस्त्र पहनें।
अपने भोजन में से गाय को खिलाएं।
रत्नों में खास कर हीरा, स्फटिक अथवा अमेरिकन डायमंड को मध्यमिका अंगुली में धारण करें।
घी, दही, कपूर एवं मोती का दान करें।