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sleeping direction as per vastu shastra: सोते समय कभी भी इस दिशा में न रखें सिर, वास्तु के अनुसार ध्यान रखें ये बातें

सोते समय कभी भी इस दिशा में न रखें सिर, वास्तु के अनुसार ध्यान रखें ये बातें

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भोपाल। भागदौड़ भरी जिंदगी में शरीर के लिए अगर कुछ सबसे जरूरी है तो वो है 'सोना'। 'सोना' अर्थात शयन, नींद लेना। शरीर के लिए जितना जरूर खाना है उतना ही जरूरी सोना भी है। बता दें कि शास्त्रों में भी इस बात की चर्चा की गई है कि सोना किस तरह से हमारे शरीर के लिए लाभकारी है। शहर के ज्योतिषाचार्य पंडित जगदीश शर्मा बताते है कि सोते समय हमारे पैर दक्षिण दिशा की ओर नहीं होना चाहिए यानी उत्तर दिशा की ओर सिर रखकर नहीं सोना चाहिए। पूर्व या दक्षिण दिशा में सिर रखकर सोना चाहिए। इन दिशाओं में सिर रखकर सोने से लंबी आयु प्राप्त होती है और स्वास्थ्य भी अच्छा रहता है। वहीं अगर आप उत्तर या पश्चिम दिशा में सिर रखकर सोते है तो इससे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचता है। शास्त्रों के अनुसार यह अपशकुन भी है। यहां जानिए शास्त्रों में बताई गई सोने से जुड़ी खास बातें...

दक्षिण दिशा की ओर सिर रखने के फायदे (sleeping direction as per vastu shastra)

आपको बता दें कि जब भी आप दक्षिण दिशा की ओर सिर करके सोते है तो स्वाभाविक तौर पर पैर उत्तर दिशा में रहेगा। पैर और सिर की ये दिशा मे सोने से शास्त्रों के साथ-साथ प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, सेहत के लिहाज से इस तरह सोने का निर्देश दिया गया है। यह मान्यता भी वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित है। कहा जाता है कि इस दिशा में सिर पैर रखकर सोने से शरीर का ब्लड ,सर्कुलेशन भी ठीक रहता है।

इसलिए नहीं रखना चाहिए उत्तर दिशा में सिर

अगर आप ये सोच रहे है कि उत्तर दिशा में सिर करके क्यों नहीं सोना चाहिए तो आपको बता दें कि पृथ्वी में चुम्बकीय शक्ति होती है। ये चुंबकीय धारा दक्षिण से उत्तर की ओर लगातार प्रवाहित होती रहती है। जब हम दक्षिण की ओर सिर करके सोते हैं, तो यह ऊर्जा हमारे सिर ओर से प्रवेश करती है और पैरों की ओर से बाहर निकल जाती है। ऐसे में सुबह जगने पर लोगों को ताजगी और स्फूर्ति महसूस होती है। इसीलिए कहा जाता है कि उत्तर दिशा में सिर करके कभी नहीं सोना चाहिए।

पूरब की ओर भी कर सकते है सिर

आप चाहे तो सोने (sleeping direction) के दौरान पूरब और पश्चिम की ओर भी सिर कर सकते है। शास्त्रों के अनुसार ये स्थिति भी सोने के लिए बेहतर है। सनातन धर्म में सूर्य को जीवनदाता और देवता माना गया है। ऐसे में सूर्य के निकलने की दिशा में पैर करना उचित नहीं माना जा सकता। इस वजह से पूरब की ओर सिर रखा जा सकता है।

बाई करवट सोना सेहत के लिए हा लाभदायक

आपको बता दें कि बाईं करवट सोना शरीर के लिए फायदेमंद होता है। विज्ञान की दृष्टि से हमारी नाक से जो श्वास बाहर निकलती और अन्दर आती है उसे स्वर कहते हैं। नाक के बाएं छिद्र से श्वास लेने व छोड़ने की क्रिया को चन्द्र स्वर कहते हैं। इसी तरह दाहिनी ओर का स्वर सूर्य स्वर कहलाता है। सूर्य स्वर हमारे शरीर में उष्मा उत्पन्न करता है। इससे भी भोजन पचने में मदद मिलती है। इसीलिए हमारे शास्त्रों में बाईं करवट सोने को कहा गया है।

सोते समय जरूर ध्यान रखें ये बातें

- कभी भी घर में संध्या के समय न सोएं। शास्त्रों में संध्या के वक्त, खासकर गोधूलि बेला में सोने की मनाही है।
- रात में सोने से करीब 2 घंटे पहले अन्न ग्रहण कर लें।
- ध्यान रहे कि अगर बहुत जरूरी न हो तो देर रात तक न जागें।
- जब भी सोने जा रहे हो तो ध्यान रखें कि अपने मन को शांत रखें।
- जब भी सोने जाए तो प्रभु का स्मरण करना चाहिए और इस अनमोल जीवन के लिए उनके प्रति आभार जताना चाहिए।