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मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने की रफ्तार स्लो, लैब में अभी तीन हजार की पेंडेंसी, 151 सैम्पल असुरक्षित पाए गए

- मिलावट अभियान के तहत लिए गए सैम्पलों की दुर्दशा, निजी लैब से जांच कराने के बाद भी ये हाल

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मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने की रफ्तार स्लो, लैब में अभी तीन हजार की पेंडेंसी, 151 सैम्पल असुरक्षित पाए गए

मिलावटखोरों पर शिकंजा कसने की रफ्तार स्लो, लैब में अभी तीन हजार की पेंडेंसी, 151 सैम्पल असुरक्षित पाए गए

भोपाल. मिलावट को लेकर राजधानी ही नहीं प्रदेश भर में लीगल और सर्विलांस सैम्पलिंग की जा रही है। रिपोर्ट भी आ रही हैं, लेकिन जितने सैम्पल लिए जा रहे हैं उसके मुकाबले रिपोर्ट मिलने की रफ्तार और बढ़ानी होगी। ईदगाह हिल्स स्थित राज्य स्तरीय लैब में कई महीनों से सैम्पल रखे रहते हैं। इसमें से कइयों की सील, पैकिंग तक उखड़ जाती है। संभवता अब उनकी जांच की जाए तो उसका रिजल्ट ही जीरो आए। ऐसे में मिलावटखोर बेखौफ होंगे ही। सैम्पलों की जांच में तेजी लाने के लिए इंदौर की एक लैब में जांच कराने के लिए टेंडर किए गए हैं। काफी सैम्पल वहां जांच के लिए भेजे जाते हैं, इससे पेंडेंसी का आंकड़ा कम हुआ है, लेकन तीन हजार सैम्पल फिर भी बाकी हैं। इससे निजी लैब जांच पर भी सवाल खड़े होते हैं। जांच के बाद प्रदेश में अनसेफ सैम्पलों की संख्या 151 तक पहुंच गई है। इससे साफ होता है कि मिलावट का धंधा जोरों पर है। हालांकि विभाग ने इन पर एफआईआर भी दर्ज कराई है।

शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के तहत अभी तक 8850 लीगल सैम्पल लिए जा चुके हैं। जिसमें भाजपा सरकार में लिए गए चार हजार से अधिक सैम्पल शामिल हैं। इसमें से करीब तीन हजार सैम्पलों की पेंडेंसी अभी तक बाकी है। जिनकी जांच होना बाकी है। इसमें दूध, पनीर, घी, तेल, सोया ऑयल, रिफाइंड, बादाम तेल, आटा, दाल, पानीपूरी, नमकीन, रेस्टोंरेंट से लिए गए खाद्य पदार्थों के सैम्पल, गुटखा फैक्ट्री, बर्फ फैक्ट्री, आइसक्रीम, पैक्ड जूस, फल, सब्जी आदी के सैम्पल ऐसे कॉमन सैम्पल माने जाते हैं जिसमें जांच रिपोर्ट जल्दी मिल जाती है। सूखे मसाले, बेसन, चना, गेहूं, ज्वार, बाजरा व अन्य खड़े अनाज, मसाले, फल, सब्जी के सैम्पलों की रिपोर्ट अक्सर अटक जाती है। कई बार सैम्पल सही तरीके से न लेने पर भी रिजेक्ट हो जाता है।

असुरक्षित सैम्पलों की संख्या 151 पहुंची
प्रदेश में अब यूरिया, रिफाइंड से बने मावा, दूध के सैम्पल फेल होने का रेशियों तीन गुना बढ़ा है। पहले जिले में पांच या छह सैम्पल ही असुरक्षित होते थे। लेकिन अब प्रदेश भर से आने वाले सैम्पलों की जांच के बाद दूध, पनीर, मावा, पैक्ड मिल्क के असुरक्षित निकलने वाले सैम्पलों की संख्या बढ़कर 151 के करीब हो गई है। भोपाल में ही अब तक असुरक्षित सैम्पलों के मामले में आधा दर्जन कारोबारियों पर एफआईआर दर्ज कराई जा चुकी है।

वर्जन

जब मैंने ज्वाइन किया था उस समय आठ हजार सैम्पलों की पेंडेंसी थी। हमनें काफी तेजी से जांच कर इसे कम किया है। ये बात यही है कि अभी तीन हजार की पेंडेंसी हैं। आगे चलकर इसे हम शून्य कर देंगे।
अभिषेक दुबे, ज्वाइंट कंट्रोलर, खाद्य एवं औषधि प्रशासन