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चयन के बाद भी ‘कारगिल जवानों’ को नहीं मिली नौकरी, निकाली थी वैकेंसी

MP News: अंतिम मेरिट लिस्ट में 69 लोगों का चयन हुआ। इसमें 10 से ज्यादा सेना के रिटायर्ड थे।

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फोटो सोर्स: पत्रिका

फोटो सोर्स: पत्रिका

MP News: करगिल की लड़ाई में शामिल जवानों को अब चपरासी की नौकरी के लिए भटकना पड़ रहा है। इन्होंने सेन्ट्रल बैंक में निकली भर्ती के लिए आवेदन दिया था, लेकिन अफसरों की मनमानी के चलते देश सेवा करने वाले इन जवानों को अब दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही है। बैंक अफसरों का कहना है कि वे कॉर्पोरेट कार्यालय से इस मामले में जानकारी ले रहे हैं। दरअसल, सेन्ट्रल बैंक की तरफ से 2012 में सफाईकर्मी और चपरासी के लिए वैकेंसी निकाली थी।

इसी आदेश के तहत 2013 में 69 पदों पर भर्ती निकाली गई। साढ़े चार हजार लोगों का इंटरव्यू लिया गया। इसके बाद अंतिम मेरिट लिस्ट में 69 लोगों का चयन हुआ। इसमें 10 से ज्यादा सेना के रिटायर्ड थे। इन्हें 18 अप्रेल 2013 को रिपोर्टिंग लेटर भी दिया, लेकिन बैंक अफसरों ने भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी का हवाला देते हुए मुय कार्यालय से भर्ती रोकने के आदेश दे दिए।

दिव्यांग सैनिक की कहानी

करगिल युद्ध में दिव्यांग हुए सैनिक सुपियार सिंह राजपूत ने पत्रिका को बताया कि वे 12 साल से बैंक अफसरों के चक्कर काट रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सभी पदों पर भर्ती कर दी गई,लेकिन हमारे यहां सुनवाई नहीं हो पा रही है। वे बैंक अधिकारियों से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन हेड ऑफिस का बहाना बनाकर उनकी सुनवाई नहीं हो रही। उनका कहना है कि वे 57 वर्ष के हो चुके हैं।

क्या कहते हैं अधिकारी

सेन्ट्रल बैंक ऑफ इंडिया के क्षेत्रीय कार्यालय के क्षेत्रीय प्रमुख संजीव कुमार ने कहा कि मामला बहुत पुराना है। एक बार हमें कॉर्पोरेट कार्यालय से कनेक्ट होने दीजिए। पुराने मामले में क्लेम किया जा रहा है। इसे थोड़ा समझने का समय दीजिए। कुछ लोगों ने सोमवार को बैंक के ईडी को भी आवेदन दिया है। एकाध दिन का समय दीजिए। इसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।