
भोपाल@रूपेश मिश्रा
जरा सी हंसी में जीवन और सेहत दोनों के राज छिपे होते है। आज के दौर में तो स्वस्थ्य और सुकून के लिए लोग लॉफ्टर थेरेपी तक ले रहे हैं। लिहाजा ऐसे दौर में कई ऐसे स्टैंडअप कॉमेडियन और हास्य कवि भी हैं जिन्होंने अपने घर परिवार से लड़कर..तो किसी ने मोटी तनख्वाह छोड़कर तो किसी ने मास्टरी के साथ लोगों को हंसाने का कारोबार करना पसंद किया। तो मिलिए हंसी की दुकान चलाने वाले कलाकारों से….
सुमित मिश्रा
स्टैंडअप कॉमेडियन
- केमिकल इँजीनियरिंग छोड़ स्टैंड-अप कॉमेडियन बने
भोपाल के 25 वर्षीय सुमित मिश्रा ने केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की मल्टीनेशनल कंपनियों में नौकरी भी की लेकिन हंसने और हंसाने के शौक से हमेशा महरूम रहे। सुमित ने बताया कि इंजीनियरिंग के बाद सरकारी नौकरी की भी तैयारी की लेकिन मन नहीं लगा। फिर पूरी तरीके से स्टैंडअफ कॉमेडियन बन गया। खैर अभी एक आईटी कंपनी में नौकरी करता हूं लेकिन जल्द छोड़ दूंगा। क्योंकि लोगों को हंसाने में जो संतुष्टी मिलती है वो कहीं नहीं मिलती। सुमित अब अपने मां के साथ भी कॉमेडी के वीडियो सोशल मीडिया में शेयर करते हैं। जिसे लाखों लोग पसंद करते हैं।
दिनेश देसी घी
हास्य कवि
- लोगों को हंसाने का ऐसा नशा कि मास्टरी के साथ करते हैं कविता पाठ
शाजापुर जिले के रहने वाले कास्य कवि दिनेश इत्तेफाक से कवि बने और बाद में श्रोताओं ने उन्हें दिनेश देसी घी का नाम दिया। दिनेश ने बताया कि वो मीडिल स्कूल में शिक्षक हैं और इसी के साथ हास्य कवि भी हैं। उन्होंने कहा कि बचपन से ही दोस्तों और शिक्षकों को तुकबंदी सुनाता था। तभी एक कवि सम्मेलन हुआ और एक कवि नहीं पहुंचे तो रिक्त स्थान की पूर्ति के लिए मुझे बैठा दिया। तभी पहले कार्यक्रम में ही लोग खूब हंसे और मैं कवि बन गया। तब से एका जुनून चढ़ा कि लोगों को हंसाने का नशा ही हो गया। श्रृंगार भी लिखा, वीर भी लिखा लेकिन जीवन का सुकून हंसते चेहरों को देखकर ही मिला।
दीपक 'दनादन'
हास्य कवि
- रूलाने के लिए रिश्तेदार ही काफी है इसलिए मैं हंसाता हूं
टीकमगढ़ जिले के रहने वाले दीपक शुक्ला ने कक्षा सातवीं में ही तय कर लिया था कि वो हंसाने का ही कारोबार करेंगे क्योंकि रूलाने के लिए रिश्तेदार ही काफी है। दीपक ने बताया कि पारवारिक मजबूरियों के कारण कुछ वक्त के लिए नौकरी जरूर की लेकिन कभी मन नहीं लगा। और वैसे भी पिता जी को कुछ और मंजूर था। एक मर्तबा उन्होंने नाराज होकर मेरी डायरी तक फाड़ दी थी। लेकिन फिर मेरे अंदर का कवि जागा और मैं लोगों को हंसाने लगा। आज पूरे भारतवर्ष में कविता पाठ कर चुका हूं। जिसका एक ही निचोड़ निकला है कि हंसाने से ज्यादा पूर्ण का काम इस दौर में कुछ भी नहीं है।
Published on:
08 May 2023 07:40 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
