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एक विशेष मंत्र जो नाग पंचमी पर दिलाएगा हर परेशानी से छुटकारा!

नाग पंचमी पर समस्यानुसार करें मंत्र का जाप...

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Nag Panchami 2018

एक विशेष मंत्र जो नाग पंचमी पर दिलाएगा हर परेशानी से छुटकारा!

भोपाल। सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी मनाई (Nag panchami 2018) जाती है। इस दौरान शिव भक्‍त नाग की पूजा करते हैं।

इस बार 15 अगस्त, बुधवार के दिन नागपंचमी पर स्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। ज्योतिष में इस योग को बहुत ही शुभ योग माना गया है। नागपंचमी पर पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 54 मिनट से 8 बजकर 30 मिनट तक रहेगा।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार नाग पंचमी का खास फायदा उन लोगों के लिए भी खास है, जिनकी जन्मकुंडली में कालसर्प दोष है। माना जाता है कि इस दिन यदि भगवान शिव का अभिषेक करते समय उन्‍हें चांदी के नाग और नागिन का जोड़ा अर्पित किया जाए तो कालसर्प दोष की शांति होती है।

कुछ खास मंत्र जो बदल देते हैं जीवन की दिशा...
पंडित शर्मा के अनुसार कुण्डली में या और तरह दोषों को मिटाने में मंत्र काफी उपयोगी होते हैं। ऐसे में कई बार किसी दोष के कारण बार बार सामने आने वाली समस्याओं को खत्म किया जा सकता है। इन समस्याओं के हटने से कई बार लोगों के जीवन की दिशा ही बदल जाती है।

उनके अनुसार मान्यता है कि यदि कालसर्प दोष से पीड़ित व्‍यक्‍ति नागपंचमी के दिन शिव जी की विधि विधान से पूजा कर, इस नाग गायत्री मंत्र - 'ॐ नवकुलाय विद्यमहे विषदंताय धीमहि तन्नो सर्प: प्रचोदयात्' का जाप करता है तो, कालसर्प दोष से मुक्‍ति मिल सकती है। इसके अलावा इस दिन 'ॐ नमः शिवाय' और 'ॐ नागदेवताय नम:' मंत्र का जप करना भी लाभकारी माना गया है।

अलग-अलग समस्याओं के लिए अचूक मंत्र-
पंडित सुनील शर्मा कहते हैं कि एकाक्षरी महामृत्युंजय मंत्र- 'हौं'के जाप से स्वास्थ्य अच्छा बना रहता है। इसके लिए सुबह उठकर इस मंत्र का जाप करें।

- जब आपको छोटी-छोटी बीमारियां परेशान करें तो त्रयक्षरी महामृत्युंजय मंत्र- 'ऊं जूं स:' खास प्रभावशाली होता है। रात में सोने के पहले इस मंत्र का कम से कम 27 बार जाप करने से आपको कोई भी बीमारी परेशान नहीं करेगी।

- सर्जरी और दुर्घटना जैसी संभावनाएं होने पर चतुराक्षी महामृत्युंजय मंत्र- 'ऊं हौं जूं स:' खास लाभकारी होता है। माना जाता है कि इसे सुबह शिव जी को जल अर्पित करके 3 माला जाप करने से हर दुर्घटना से बचा जा सकता है।

आयु या स्वास्थ्य की समस्या से छुटकारे के लिए दशाक्षरी महामृत्युंजय महामंत्र- 'ऊं जूं स: माम पालय पालय' का प्रयोब करना चाहिए। इसे अमृत मृत्युंजय मंत्र भी कहते हैं, जिसके लिए इस मंत्र का जाप करना है, उसका नाम इस मंत्र में प्रयोग करें। तांबे के बर्तन में जल भरकर उसके सामने इस मंत्र का जाप करें। फिर उस जल को उसे पिला दें।

सभी परेशानियां दूर करने वाला मंत्र:

मृत संजीवनी महामंत्युंजय मंत्र...
ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः
ॐ त्र्यम्‍बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्‍धनान् मृत्‍योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

पंडित सुनील शर्मा व ज्योतिष बीके श्रीवास्तव कहते हैं कि महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से कोई भी रोग दूर हो जाता है। इसके अलावा माना जाता है कि ऐसा करने से सारी परेशानियां भी खुद-ब-खुद गायब हो जातीं हैं। लेकिन,इस मंत्र का जाप करते समय ये सावधानियां अवश्य रखनी चाहिए।

सावधानियां...
- महामृत्युंजय मंत्र का उच्चारण सही तरीके अौर शुद्धता से करना चाहिए। मंत्र उच्चारण के समय एक शब्द की गलती भी भारी पड़ सकती है।

- मंत्र के जप के लिए एक निश्चित संख्या निर्धारित कर लें। जप की संख्या धीरे-धीरे बढ़ाएं लेकिन कम न करें।

- इस मंत्र का जप धीमे स्वर में करें। मंत्र जप के समय इसका उच्चारण होठों से बाहर नहीं आना चाहिए।

- महामृत्युंजय जप के दौरान धूप-दीप प्रज्वलित रहना चाहिए।

- जहां पर भगवान शिव की प्रतिमा या महामृत्युंजय यंत्र रखा हो वहीं पर इस मंत्र का जप करें।

- मंत्र का जप सदैव पूर्व दिशा की अोर मुख करके करना चाहिए। जब तक मंत्र का जप होगा उतने दिनों तक तामसिक चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए।

कालसर्प दोष: ऐसे करें पूजा...
यदि आप या आपका कोई अपना कालसर्प दोष से प्रभावित है तो उसे नागपंचमी के दिन बहते हुए जल में 11 नारियल प्रवाहित करने चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से कालसर्प दोष से मुक्ति मिलती है।

आप चाहें तो नाग पंचमी के दिन पीपल के पेड़ के नीचे किसी बर्तन में दूध में भी रख सकते है।
मान्यता है कि ऐसा करने से कुंडली के सर्प दोष से मुक्‍ति मिलती है। वहीं, इस दिन महिलाएं दीवारों पर नाग का चित्र बनाकर दूध से स्नान कराके विभिन्न मंत्रों से पूजा अर्चना करती हैं।

ये मंत्र कर देगा भय खत्म...
अगर आपके मन में भी सांप का डर है तो सुबह उठते ही अनंत, वासुकि, शेष, पद्म, कंबल, अश्वतर, शंखपाल, धृतराष्ट्र, तक्षक, कालिया और पिंगल इन 12 देव नागों का स्मरण कीजिए।

आपका भय तत्काल खत्म होगा। ऐसे में ‘ऊं कुरुकुल्ये हुं फट् स्वाहा' मंत्र का जाप लाभदायक होता है।

पंडित शर्मा के अनुसार यह भी माना जाता है कि इनका नाम स्मरण करने से धन भी मिलता है। साल के बारह महीनों, इनमें से एक-एक नाग की पूजा करनी चाहिए।

इस बार नाग पंचमी 15 अगस्त को है। अगर राहु और केतु आपकी कुंडली में अपनी नीच राशियों- वृश्चिक, वृष, धनु और मिथुन में हैं तो आपको अवश्य ही नाग पंचमी की पूजा करनी चाहिए। कहा जाता है कि दत्तात्रेय जी के 24 गुरु थे, जिनमें एक नाग देवता भी थे।

नाग पंचमी भगवान शिव की पूजा भी...
श्रावण माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाने वाली नाग पंचमी शिवजी की पूजा भी है। शिव जी के गले में वासुकि नाग है। समुद्र मंथन से निकले ‘कालकूट' विष को गले में धारण कर शिव ने सृष्टि का विनाश होने से बचाया।

भगवान शिव के गले में हार के रूप में सुशोभित ‘अनंत' नामक नाग कालकूट विष के दाह को कम करते हैं।

माना जाता है कि 12 नागों में अनन्त नाग सूर्य के रूप हैं, वासुकि चंद्रमा के, तक्षक मंगल के, कर्कोटक बुध के, पद्म बृहस्पति के, महापद्म शुक्र के और कुलिक व शंखपाल शनि ग्रह के रूप हैं। वहीं पौराणिक मान्यता के अनुसार, यह पृथ्वी भी शेषनाग के फन पर टिकी हुई है।

जानिये नाग वंश का इतिहास...
सनातन धर्म में सांप की विशेष रूप से पूजा की जाती है और इन्हें देवता का रूप मानते हैं। हिंदूपंचांग के अनुसार सावन मास की शुक्ल पंचमी को नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है। इस बार यह उत्सव 15 अगस्त को है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार इस धरती पर नागों की उत्पत्ति कैसे हुई इसका वर्णन हमारे ग्रंथो में मिलता है। इनमें वासुकि, शेषनाग ,तक्षक और कालिया जैसे नाग हैं। नागों का जन्म ऋषि कश्यप की दो पत्नियों कद्रु और विनता से हुआ था।

1. वासुकि नाग...
नाग वासुकि को समस्त नागों का राजा माना जाता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार समुद्र मंथन के समय नागराज वासुकि को रस्सी के रूप में प्रयोग किया गया था। त्रिपुरदाह यानि युद्ध में भगवान शिव ने एक ही बाण से राक्षसों के तीन पुरों को नष्ट कर दिया था। उस समय वासुकि शिव जी के धनुष की डोर बने थे। नाग वासुकि को जब पता चला कि नागकुल का नाश होने वाला है और उसकी रक्षा इसके भगिनीपुत्र द्वारा ही होगी तब इसने अपनी बहन जरत्कारु को ब्याह दी। इस तरह से उन्होंने सापों की रक्षा की, नहीं तो समस्त नाग उसी समय नष्ट हो गये होते।

2. शेषनाग...
शेषनाग का दूसरा नाम अनन्त भी है। शेषनाग ने अपनी दूसरी माता विनता के साथ हुए छल के कारण गंधमादन पर्वत पर तपस्या की थी। इनकी तपस्या कारण ब्रह्राजी ने उन्हें वरदान दिया था।

तभी से शेषनाग ने पृथ्वी को अपने फन पर संभाले हुए है। धर्म ग्रंथो में लक्ष्मण और बलराम को शेषनाग के ही अवतार माना गया है। शेषनाग भगवान विष्णु के सेवक के रूप में क्षीर सागर में रहते हैं।

3. तक्षक नाग...
तक्षक नाग के बारे में महाभारत में एक कथा है। उसके अनुसार श्रृंगी ऋषि के श्राप के कारण तक्षक नाग ने राजा परीक्षित को डसा था जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी। तक्षक नाग से बदला लेने के उद्देश्य से राजा परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने सर्प यज्ञ किया था। इस यज्ञ में अनेक सर्प आ-आकर गिरने लगे। तब आस्तीक मुनि ने तक्षक के प्राणों की रक्षा की थी। तक्षक ही भगवान शिव के गले में लिपटा रहता है।

4. कर्कोटक नाग...
कर्कोटक शिव के एक गण हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार,अपनी माता के शाप से बचने के लिए सारे नाग अलग-अलग जगहों में यज्ञ करने चले गए।

कर्कोटक नाग ने ब्रह्राजी के कहने पर महाकाल वन में महामाया के सामने स्थित शिवलिंग की पूजा की। शिव ने प्रसन्न होकर कहा जो नाग धर्म का आचरण करते हैं, उनका विनाश नहीं होगा।

जानिये नाग पंचमी का इतिहास...
मान्यता है कि श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि को समस्त नाग वंश ब्रह्राजी के पास अपने को श्राप से मुक्ति पाने के लिए मिलने गए थे। तब ब्रह्राजी ने नागों को श्राप से मुक्ति किया था, तभी से नागों का पूजा करने की परंपरा चली आ रही है।

वहीं एक दूसरी कथा भी प्रचलित है जहां पर ब्रह्राजी ने धरती का भार उठाने के लिए नागों को शेषनाग से अलंकृत किया था तभी से नाग देवता की पूजा की जाती है।
इनके अलावा एक अन्य मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन में वासुकि नाग को रस्सी के रूप में प्रयोग किया गया था। इस कारण से भी नागपंचमी का त्योहार मनाया जाता है।

हिंदूकलेंडर के अनुसार अगस्त 2018 में कब कौन सा व्रत या त्यौहार...
- 4 अगस्त, शनिवार - कालाष्टमी
- 6 अगस्त, साेमवार - श्रावण का दूसरा सोमवार व्रत
- 7 अगस्त, मंगलवार - कामिका एकादशी और मंगला गौरी व्रत
- 9 अगस्त, गुरुवार - प्रदोष व्रत, सावन शिवरात्रि व्रत
- 11 अगस्त, शनिवार - श्रावण अमावस्या, हरियाली अमावस्या
- 12 अगस्त, रविवार - चंद्र दर्शन
- 13 अगस्त, साेमवार - हरियाली तीज, सावन सोमवार व्रत
- 14 अगस्त, मंगलवार - विनायकी चतुर्थी, मंगला गौरी व्रत
- 15 अगस्त, बुधवार - नागपंचमी व्रत
- 16 अगस्त, बुधवार - कल्की जयंती, स्कंद षष्ठी व्रत
- 17 अगस्त, गुरुवार - गोस्वामी तुलसीदास जयंती, सूर्य संक्रांति
- 18 अगस्त, शुक्रवार - दुर्गाष्टमी व्रत
- 20 अगस्त, सोमवार - श्रावण सोमवार व्रत
- 22 अगस्त, बुधवार - पुत्रदा एकादशी, दामोदर द्वादशी व्रत
- 23 अगस्त, गुरुवार - प्रदोष व्रत
- 24 अगस्त, शुक्रवार - वरलक्ष्मी व्रत, ओणम
- 25 अगस्त, शनिवार - ऋग्वेद उपाकर्म
- 26 अगस्त, रविवार - श्रावण पूर्णिमा, रक्षाबंधन
- 29 अगस्त, बुधवार - कजरी तीज
- 30 अगस्त, गुरुवार - संकष्टी चतुर्थी