
‘व्यक्ति को जीवन में सत्य का मार्ग चुनना चाहिए’
भोपाल/आनंद नगर। देवकी और वसुदेव के विवाह के समय आकाशवाणी हुई थी कि देवकी की आठवीं संतान कंस का वध करेगी। इसके बाद कंस ने दोनों को मथुरा की जेल में बंद कर दिया। जेल में कंस ने देवकी और वसुदेव की सात संतानों का वध कर दिया। आठवीं संतान के रूप में श्रीकृष्ण का जन्म हुआ और भगवान की माया से वसुदेव ने बाल गोपाल को यशोदा के घर पहुंचा दिया था।
उन्होंने बताया कि बाल कृष्ण ने सबसे पहले पूतना का वध किया। वह कंस द्वारा भेजी गई एक राक्षसी थी और श्रीकृष्ण को स्तन पान के जरिए विष देकर मारना चाहती थी। कथा वाचक पं. महेश शास्त्री ने श्रद्धालुओं से कहा कि पूतना के वध के बाद कंस ने तृणावर्त राक्षस को भेजा।
तृणावर्त बवंडर बनकर गया और उसने बालकृष्ण को भी अपने साथ उड़ा लिया, लेकिन श्रीकृष्णन ने उसका भी वध कर दिया। इसके बाद वत्सासुर, अघासुर आदि राक्षसों का वध कर भगवान श्रीकृष्ण ने सभी बच्चों को बचा लिया। उन्होंने कहा कि बुराई कितनी भी बढ़ी हो, अच्छाई के सामने टिक नहीं सकती है, इसलिए हमें हमेशा सत्य का मार्ग चुनना चाहिए।
श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन
संत हिरदाराम नगर में श्रीराम रामायण मंडल की ओर से सिद्ध हीरामन बाबा मंदिर बरेला लालघाटी में पं. अजय पुरोहित के सान्निध्य में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन 20 मई से होगा। आयोजन समिति के अध्यक्ष बृज यादव, सचिव पवन सारथी, उपाध्यक्ष जीतू यादव ने बताया कि रविवार को सुबह 8 बजे लालघाटी चौराहा से कलश यात्रा निकाली जाएगी।
Published on:
20 May 2018 04:30 pm
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