भोपाल. सरकार वाहन भत्ते में शहर के आधार पर भेदभाव कर कर्मचारियों के हर माह छह करोड़ और सालाना 72 करोड़ रुपए डकार जाती है। यदि सरकार भोपाल, इंदौर के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तरह अन्य शहरों के कर्मचारियों को भी प्रतिमाह 200 रुपए वाहन भत्ता दे तो उसे इतनी रकम देना होगी। यह भत्ता प्रदेश के 4.45 लाख कर्मचारियों में 3.07 लाख कर्मचारी तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नहीं मिल रहा है। प्रति कर्मचारी सालाना 2400 रुपए का नुकसान हो रहा है। तीन लाख कर्मचारियों का एक साल का वाहन भत्ता 72 करोड़ रुपए से अधिक बनता है। शासन यह भत्ता भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर की नगर सीमा में रहने वाले कर्मचारियों को ही देता है। शासन का मत है कि चारों शहर उच्च गे्रड में हैं, इसलिए यह भत्ता दिया जाता है। अन्य शहरों के कर्मचारियों को यह भत्ता न दिए जाने की बात पॉलिसी मैटर बताकर कहकर टाल दी जाती है। 2012 से 200 रुपए वाहन भत्ता दिया जा रहा है।