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पेट्रोल-डीजल के 72 करोड़ डकार रही सरकार

प्रदेश के 3.07 लाख तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नहीं मिलता वाहन भत्ता प्रत्येक कर्मचारी को सालाना 2400 रुपए का नुकसान होता है...

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Krishna singh

Oct 07, 2016

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भोपाल. सरकार वाहन भत्ते में शहर के आधार पर भेदभाव कर कर्मचारियों के हर माह छह करोड़ और सालाना 72 करोड़ रुपए डकार जाती है। यदि सरकार भोपाल, इंदौर के तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की तरह अन्य शहरों के कर्मचारियों को भी प्रतिमाह 200 रुपए वाहन भत्ता दे तो उसे इतनी रकम देना होगी। यह भत्ता प्रदेश के 4.45 लाख कर्मचारियों में 3.07 लाख कर्मचारी तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को नहीं मिल रहा है। प्रति कर्मचारी सालाना 2400 रुपए का नुकसान हो रहा है। तीन लाख कर्मचारियों का एक साल का वाहन भत्ता 72 करोड़ रुपए से अधिक बनता है। शासन यह भत्ता भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर की नगर सीमा में रहने वाले कर्मचारियों को ही देता है। शासन का मत है कि चारों शहर उच्च गे्रड में हैं, इसलिए यह भत्ता दिया जाता है। अन्य शहरों के कर्मचारियों को यह भत्ता न दिए जाने की बात पॉलिसी मैटर बताकर कहकर टाल दी जाती है। 2012 से 200 रुपए वाहन भत्ता दिया जा रहा है।

शासन का दोहरा मापदंड ठीक नहीं
छोटे शहरों के कर्मचारियों के साथ शासन इस तरह के कई खेल करता है। बड़े शहरों के कर्मचारी मुखर हो जाते हैं, इसलिए उन्हें लाभ मिल जाता है। शासन को सभी को समान रखना चाहिए।
-राजेश मालवीय, कर्मचारी नेता, पचोर

हम अब शासन से मांग करेंगे कि प्रदेश के सभी शहरों के कर्मचारियों को वाहन भत्ता दे। यह दोहरा मापदंड ठीक नहीं है।
-संतोष दीक्षित, कर्मचारी नेता, रायसेन

छोटे शहरों के कर्मचारियों के साथ यह भेदभाव सहन नहीं किया जाएगा। गुपचुप तरीके से शासन बड़े शहरों के लिए आदेश कर देता है। एेसा चलने नहीं देंगे।
-श्रीकांत शर्मा, गुना

हमें देखना होगा कि एेसा कैसे किया गया। शासन की पॉलिसी क्या हैं। कर्मचारी हित में जो भी होगा सरकार करेंगे।
-लाल सिंह आर्य, राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार