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अमिताभ बच्चन की फिल्म देखकर एक शख्स ने कह दिया था ‘सदी का महानायक’

दीवार फिल्म में अमिताभ का किरदार देखकर कवि दुष्यंत कुमार ने इस अभिनेता की कला को पहचान लिया था।

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भोपाल

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Manish Geete

Oct 11, 2019

 

Amitabh Bachchan: 70 के दशक में भी अमिताभ बच्चन की फिल्में हिट होना शुरू हो गई थी। उसी वक्त की फिल्म जब रिलीज हुई तो यह फिल्म भोपाल में भी लगी। इसी फिल्म में अमिताभ का किरदार देखकर कवि दुष्यंत कुमार ने इस अभिनेता की कला को पहचान लिया था। वे उनकी एक्टिंग से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने एक पत्र अमिताभ बच्चन के नाम लिखा। और प्रिय अमित कहकर संबोधित किया और लिख दिया कि यही शख्स 'सदी का महानायक' कहलाएगा।

patrika.com महानायक अमिताभ बच्चन के जन्म दिवस के मौके पर बता रहा है उनसे जुड़े किस्से...। 11 अक्टूबर को ट्वीटर और फेसबुक पर अमिताभ बच्चन को शुभकामनाएं देने का तांता लगा हुआ है।

कवि दुष्यंत कुमार का वो पत्र आज भी भोपाल के दुष्यंत कुमार स्मारक पांडुलिपि संग्रहालय में सुरक्षित रखा हुआ है। आज यह पत्र इस संग्रहालय की शान बढ़ाता है। कई बार जया बच्चन भोपाल आती हैं तो संग्रालय आती हैं और दुष्यंत कुमार के पत्रों का अवलोकन जरूर करती हैं।

 

दुष्यंत ने बांधे थे तारीफों के पुल

दुष्यंत ने अमिताभ बच्चन को लिखे पत्र में उनके किरदार की तारीफों के अनेक पुल बांधे। इसमें लिखा था कि अमित का अभिनय इतना अच्छा था कि ऐसा लगा ही नहीं कि वे अभिनय कर रहे हैं। उन्होंने अपना किरदार काफी आत्म विश्वास के साथ निभाया, उनके अभिनय की जितनी भी तारीफ की जाए कम है। उन्होंने अपने पत्र में अमित के लिए 'सदी के महानायक' कहलाने का भाव व्यक्त कर दिया था।

 

पारिवारिक रिश्ते थे बच्चन परिवार से

दुष्यंत कुमार ने अपने पत्र में अमिताभ की तुलना उस जमाने के स्टार शशि कपूर और शत्रुघ्न से भी की थी। उन्होंने लिखा था कि शशि कपूर जैसा स्टार भी अमिताभ के आगे छोटा लग रहा था। उन्होंने अमिताभ से इलाहाबाद में बिताए दिनों का भी जिक्र किया था कि वे हिन्दी के महान कवि हरिवंशराय बच्चन के घर भी जाते थे। दिल्ली के मकान पर भी कई बार गए, उस समय पता नहीं था कि हरिवंश राय बच्चन का बेटा इतने बड़े मुकाम पर पहुंच जाएगा और उन्हें एक यह पत्र लिखना पड़ेगा।

 

संग्रहालय में हैं बाबूजी के 50 पत्र

दुष्यंत ने अमित को यह पत्र स्वयं के हाथों से लिखा था, जिसे टाइप कराकर अमिताभ बच्चन को भेजा गया था। इसके अलावा संग्रहालयमें हरिवंश राय बच्चन के हाथों से लिखे 50 पत्र भी मौजूद हैं। इन्हीं पत्रों को देखने के लिए कई बार जया बच्चन भी संग्रहालय आ चुकी हैं। बताया जाता है कि हरिवंश राय बच्चन और दुष्यंत अच्छे मित्र भी थे।

 

आकाशवाणी में करते थे नौकरी

दुष्यंत जन्म उत्तरप्रदेश के बिजनौर के पास राजपुर नवादा गांव में एक सितम्बर 1933 को हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पढ़ाई पूरी करने के बाद वे भोपाल पहुंच गए। उनकी भोपाल आकाशवाणी में नौकरी लग गई। वे यहां असिस्टेंट प्रोड्यूसर बन गए थे। दुष्यंत की दोस्ती कमलेश्वर, मार्कण्डेय से भी थी। बाद में वे कमलेश्वर दुष्यंत के समधी बन गए। दुष्यंत बेहद मनमौजी और सहज स्वभाव के थे।

 

बड़े शायरों में बना ली थी जगह
दुष्यंत कुमार ने जिस समय साहित्य की दुनिया में कदम रखा उस समय भोपाल में दो शायरों ताज भोपाली और क़ैफ़ भोपाली का राज था। वे गजल की दुनिया में सिरमौर थे। हिन्दी में भी उस समय अज्ञेय और गजानन माधव मुक्तिबोध की कठिन कविताओं का दौर था। उस समय आम आदमी के लिए नागार्जुन और धूमिल ही शेष थे। यही वह दौर था जब मात्र 42 साल के जीवन में दुष्यंत कुमार ने जो प्रसिद्धि अर्जित की, उसे आज भी लोग याद करते हैं। दुष्यंत ने कविता, गीत, गज़ल, काव्य नाटक, कथा आदि विधाओं में लेखन किया, लेकिन गजलों की लोकप्रियता ने अन्य विधाओं को अलग-थलग कर दिया। प्रिय अमित लिखकर पत्र भेजने वाले दुष्यंत का 30 दिसंबर 1975 में भोपाल में निधन हो गया था।

 

 

काफी चर्चित हैं ये कविताएं

दुष्यंत ने एक कंठ विषपायी , सूर्य का स्वागत , आवाज़ों के घेरे , जलते हुए वन का बसंत , छोटे-छोटे सवाल आदि किताबों का सृजन किया था।

आज भी लोग गुनगुनाई जाती है दुष्यंत की ये कविता

हो गई है पीर पर्वत-सी पिघलनी चाहिए,
इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए।

सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं,
सारी कोशिश है कि ये सूरत बदलनी चाहिए।

मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही,
हो कहीं भी आग, लेकिन आग जलनी चाहिए।