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छह मिनट में कथक की प्रस्तुति में दिखाई सती दाह की कथा

भारत भवन में आयोजित दो दिवसीय कथक नृत्य समारोह भावानुभाव का समापन

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भोपाल। भारत भवन में आयोजित दो दिवसीय कथक नृत्य समारोह भावानुभाव का सोमवार को समापन हो गया। अंतिम सभा क्षमा मालवीय और मनीषा अभय के कथक नृत्य की हुई। सभा की शुरुआत में क्षमा ने अप्रचतिल ताल भानुमति का चयन किया। इसमें 11 मात्रा में निबद्ध दुर्गा स्तुति जय दुर्ग भवानी कल्याणी दिया निधानी... के जरिए देवी आराधना की। उन्होंने अपनी सहयोगी नृत्यांगनाओं के साथ चतुरंग प्रस्तुति दी।

तीन ताल में निबद्ध इस प्रस्तुति के बोल छुम छननन निरतत सुढ़ंग अंग... थे। इसी क्रम में उन्होंने बिंदादीन महाराज रचित अष्टपदी की प्रस्तुति दी। राग बागेश्री में झपताल में निबद्ध श्याम छवि अति बनी... में श्रीकृष्ण के सुदंर स्वरूप का वर्णन किया गया है।

चौथी प्रस्तुति मल्हार रही, जिसमें राग मल्हार के सुरों की बौछारों से भीगी माटी की सौंधी महक सी प्रतीत हुई। इसमें 10 व 16 मात्राओं में बरसे बदरिया सवान की... के जरिए थिरकता हुआ नृत्य पेश किया।

यति माला सुनो सजन....
उनकी सबसे खास यातिमाला प्रस्तुति रही। मृदंगायति, जो कि मृदंग की तरह, दो तरफ दु्रत और बीच में विलंबित होती है। इन पांच प्रकारों के साथ प्रस्तुति में नृत्यांगनाओं ने सुंदर अभिनय पक्ष प्रस्तुति किया। गौ पुच्छा में गाय की पूंछ के समान हिलौरे लेकर चलना, स्त्रोतोगता में नदी की तरह प्रवाहमान गति आदि पेश की। डॉ. पुरु दाधीच रचित राग मिश्र भोपाली की इस रचना के बोल यति माला सुनो सजन.... रहे।

आदिशंकराचार्य रचित रचना अर्धनारिश्वर नटेश्वर का वर्णन
दूसरी प्रस्तुति नृत्यांगना मनीषा अभय की रही। उन्होंने प्रस्तुति की शुरुआत शिव वंदना से की। झपताल में आदिशंकराचार्य रचित रचना अर्धनारिश्वर नटेश्वर का वर्णन किया। इसके बाद तीनताल का वर्णन किया। प्रस्तुति की कड़ी को आगे बढ़ाते हुए दक्षयज्ञ प्रस्तुति दी।

इस लमझड़ कवित्त में उन्होंने सती दाह खंड को नृत्य में पिरोकर पेश किया। उनकी यह प्रस्तुति छह मिनट की रही। ठुमरी बिंदादीन महाराज रचित मिल जा वे नंद को... में श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन है। अंत में साढ़े पांच मात्राओं का ताल पेश किया जाएगा। इसमें तीन अलग अलग तुकड़े हैं उन्हें जोड़कर पेश किया गया।