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वीजा- पासपोर्ट के आकड़ों ने चौंकाया ! बांग्लादेश, कनाडा, यूक्रेन से स्टूडेंट का मोहभंग

Mp News: इंडियन स्टूडेंट मोबिलिटी रिपोर्ट 2023 के अनुसार अब अब्रॉड स्टडी की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश और देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होने की वजह से भी छात्र अपने शहर में ही प्रवेश लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

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Mp News: रीजनल पासपोर्ट कार्यालय भोपाल ने मार्च में वीजा और पासपोर्ट से जुड़ा एक आंकड़ा जारी किया था। जिसमें वीजा के लिए आवेदन करने वालों में 60 फीसदी स्टूडेंट थे। जो फॉरेन स्टडी के आंकाक्षी थे। जुलाई के बाद इस आंकड़े में बदलाव हुआ है। तमाम स्टूडेंट्स ने विदेश जाने के विचार को होल्ड कर लिया है।

कनाडा, बांग्लादेश और यूक्रेन सहित कई अन्य देशों में युद्ध और अशांति की वजह से विदेशी शिक्षा के प्रति उनका मोहभंग हुआ है। इंडियन स्टूडेंट मोबिलिटी रिपोर्ट 2023 के अनुसार अब अब्रॉड स्टडी की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश और देश में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध होने की वजह से भी छात्र अपने शहर में ही प्रवेश लेना ज्यादा पसंद कर रहे हैं।

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यह है बड़ा कारण

फॉरेन एजूकेशन मामलों के विशेषज्ञ अंकुर पाल का कहना है कि विदेश में विरोध प्रदर्शन, हिंसा, राजनीतिक अशांति, कड़ी वीजा नीतियां, कई स्थानों पर आर्थिक मंदी की वजह से अभिभावक अपने बच्चों को बाहर नहीं भेज रहे।

ये हैं पसंदीदा देश

विदेश अध्ययन के लिए मप्र के युवाओं के पसंदीदा देश-जर्मनी, किर्गिस्तान, आयरलैंड, सिंगापुर, रशिया, फ्रांस, यूएस, कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया, फिलीपीन्स, फ्रांस, न्यूजीलैंड, यूक्रेन और बांग्लादेश हैं।

बांग्लादेश भी नहीं रहा युवाओं की पसंद

रूस-यूक्रेन संघर्ष के बाद बागसेवनिया के अंकुर रास्तोगी बांग्लादेश में जाकर चिकित्सा अध्ययन करना चाहते थे। लेकिन वहां मौजूदा अशांति की वजह से उन्होंने अपना इरादा बदल दिया है। कोलार के रवि नामदेव पूर्वी बांग्लादेश के अब्दुल हामिद मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस के चौथे साल की पढ़ाई कर रहे हैं।

वे बड़ी मुश्किल से भोपाल लौटे हैं। उनका कहना है अकेले भोपाल के कम से कम एक दर्जन छात्रा बांग्ला देश के विभिन्न मेडिकल कालेजों में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे हैं। वे सभी भोपाल लौट आए हैं।

विदेशी विवि के प्रदेश में कैंपस

शिक्षा विशेषज्ञ रतन देशमुख के अनुसार दुनिया के कई नामी विश्वविद्यालयों के कैंपस भोपाल, इंदौर और ग्वालियर जैसे शहरों में खुल रहे हैं। इसके साथ ही कई निजी विश्वविद्यालयों द्वारा अपडेट नए कार्यक्रम पेश किए जा रहे हैं। इसलिए भी विदेश में अध्ययन की प्रवृत्ति कम हुई है।

घट गया आंकड़ा

कॅरियर काउंसर जॉन अब्राहम बताते हैं विदेशों में भारतीय छात्रों की संया 2022 की तुलना में 2023 में 45 प्रतिशत बढ़ी। यानी 1,318,955 के मुकाबले देश के 907,404 छात्र बाहर पढ़ने गए। लेकिन 2023 की तुलना में 2024 में यह संया 1.28 प्रतिशत घट गई। यानी करीब 1,335,878 कम छात्रों ने फॉरेन एजुकेशन के लिए अप्लाई किया।

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