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लड़कियों के अंदरूनी अंगों में जन्मजात विकृति, हैरत में पड़ गए डाक्टर्स

एमआरकेएच सिंड्रोम वाली दो लड़कियों की सर्जरी

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सिंड्रोम वाली दो लड़कियों की सर्जरी

भोपाल. कई बच्चियां बिना योनि के पैदा होती हैं. इस जन्मजात विसंगति को एमआरकेएच सिंड्रोम कहा जाता है। यह विसंगति 5000 बालिकाओं में से 1 में ही पाई जाती है। हाल ही में एम्स भोपाल में भी ऐसी दो बच्चियां आईं जिनमें इन विसंगतियों को देख यहां के डाक्टर्स भी हैरत में पड़ गए. हालांकि अब दोनों की सर्जरी की गई है।

आमतौर पर किशोरावस्था के दौरान मासिक धर्म न होने पर इस विसंगति का पता लगता है- चिकित्सकों के अनुसार आमतौर पर किशोरावस्था के दौरान मासिक धर्म न होने पर इस विसंगति का पता लगता है। इसके चलते पेट में काफी दर्द भी हो सकता है। वहीं इसके उपचार के लिए की जाने वाली सर्जरी बेहद जटिल होती है। इसमें मूत्र मार्ग के चोटिल होने का उच्च जोखिम रहता है। हाल ही में एम्स भोपाल में ऐसे दो मरीजों में इन विसंगतियों की सर्जरी की गई।

एक प्राइवेट अस्पताल ने इस सर्जरी को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया - बताया जाता है कि एक प्राइवेट अस्पताल ने इस सर्जरी को और अधिक चुनौतीपूर्ण बना दिया था। सर्जरी की जटिलता के कारण रोगियों को एम्स रेफर किया जाता है। एम्स भोपाल में यह सर्जरी डॉ. के पुष्पलता के नेतृत्व में डॉ अरुण कुमार डोरा, डॉ ज्योति नाथ मोदी, डॉ भारती सिंह ने की।