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दागी पुलिस वालों पर PHQ की सख्ती, निलंबन के बाद 800 किमी दूर भेजा

- पहली बार निलंबन के बाद दूरदराज के जिलों में किया गया अटैच

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भोपाल। रिश्वतखोरी समेत अन्य अनियमितताओं के मामलों में पकड़ाए अपसरों और पुलिसकर्मियों पर पुलिस मुख्यालय ने सख्ती दिखाई है। डीजीपी सुधीर कुमार सक्सेना के निर्देश पर पहली बार दागी पुलिस अफसरों और कर्मचारियों को तत्काल निलंबित कर उन्हें 800 किमी दूर जिलों में भेजा है। यह पहली बार है, जब निलंबन के बाद अन्यत्र जिलों में अटैच किया गया है।

अभी तक निलंबन अवधि में संबंधित जिलों या पुलिस लाइन में अटैच किया जाता रहा है। इसके अलावा जांच और कर्तव्य पालन में लापरवाही करने पर अफसरों को लाइन अटैच किया जाता है। जानकारी के मुताबिक यह कारवाइ भ्रष्टाचार और अनियमिताओं पर जीरो टॉलरेंस की नीति के तहत की गई है। अभी तक दागी पुलिस अफसर-कर्मचारी निलंबन के बाद उसी जिले में जमे रहते थे और बाद में बहाली करा लेते थे।

गौरतलब है कि रीवा और मऊगंज जिले में ही 28 मार्च से 16 अप्रेल के बीच रिश्वतखोरी के तीन अलग-अलग मामलों में एक ट्रैफिक सूबेदार, एक थाना प्रभारी, एक एसआइ, एक एएसआइ और एक आरक्षक के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

रीवा से शाजापुर तो किसी को उज्जैन से सीधी भेजा
1. रीवा में 28 मार्च को ट्रैफिक सूबेदार दिलीप कुमार तिवारी और आरक्षक अमित सिंह को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते पकड़ा था। डीजीपी के निर्देश पर दोनों को निलंबित किया गया और दोनों के मुख्यालय बदले गए। दिलीप कुमार तिवारी को रीवा से शाजापुर और अमित सिंह को भिण्ड भेजा गया।

2. रीवा जिले के समान थाना प्रभारी सुनील कुमार गुप्ता और उपनिरीक्षक रानू वर्मा द्वारा होटल संचालक से रुपए मांगने की शिकायत लोकायुक्त पुलिस से की गई थी। लोकायुक्त टीम की दबिश से पहले दोनों थाना छोड़कर भाग गए। इस मामले में निरीक्षक सुनील कुमार गुप्ता को रीवा से खंडवा और उपनिरीक्षक रानू वर्मा को टीकमगढ़ भेजा है। यहां ये लाइन अटैच रहेंगे।

3. मऊगंज के कार्यवाहक एएसआइ राजकुमार पाठक को 14 अप्रेल को लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेते ट्रैप किया था। पाठक को लाइन अटैच किया गया था। अब पाठक को बड़वानी भेजा गया है। निलंबन की कार्रवाई लोकायुक्त से रिपोर्ट मिलने के बाद की जाएगी। इसी तरह मऊगंज थाना प्रभारी को लाइन अटैच किया है। इन पर कत्र्तव्यों का सही तरीके से पालन नहीं करने के आरोप लगे थे।

4. मुरैना जिले के साइबर सेल द्वारा जांच में लापरवाही और गड़बड़ी किए जाने की शिकायत पर साइबर सेल प्रभारी सब इंस्पेक्टर सचिन पटेल को वापस एसएएफ भेजा गया। इसके बाद पटेल का ट्रांसफर 34वीं बटालियन धार किया है। साइबर सेल के आरक्षक सर्वजीत सिंह को आलीराजपुर, आरक्षक रवि पटेल को मंडला और आरक्षक अजीत जाट को बुरहानपुर और प्रशांत नरवरिया को झाबुआ भेजा है। ये सभी संबंधित जिलों की पुलिस लाइन में अटैच रहेंगे।

5. मुरैना के यातायात थाना प्रभारी अखिल नागर का थाने में शराब पीते हुए वीडियो वायरल होने के बाद तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया। नागर का मुख्यालय मुरैना से बदलकर खरगोन किया है।

6. उज्जैन में छह अप्रेल को आरक्षक रवि कुशवाह को लोकायुक्त टीम ने ट्रैप किया था। आरक्षक को निलंबित कर मुख्यालय उज्जैन से बदलकर सीधी किया है। इस मामले में चिमनगंज थाना प्रभारी जितेंद्र भास्कर को जिम्मेदार मानते हुए पुलिस लाइन उज्जैन अटैच किया है।