
अशोक गौतम, भोपाल. प्रदेश के 90 प्रतिशत बड़े बांध लबालब हैं। विंध्य में कम बारिश के बाद भी बाणसागर बांध Bansagar Dam 100 फीसदी भरा है। इस मानसून सीजन में बड़े बांधों में तवा Tawa dam के गेट 121 बार खुले। इनसे जितना पानी निकाला, उतने में तवा 3 बार भर जाता। इसी तरह से 50 से 100 बार राजीव सागर, पारसडोह बांध, बैतूल के गेट खेले गए। नर्मदा बेसिन के बरगी, बारना, तवा Tawa dam इंदिरासागर, ओंकारेश्वर, मंडलेश्वर और गांधीसागर बांध एक महीने तक उफान पर रहे।
सुरक्षा व बाढ़ पर नियंत्रण के चलते 50 प्रतिशत बांधों के गेट 50 से ज्यादा बार खोले गए- दो साल में बांधों की इतनी अच्छी स्थिति पहले नहीं रही। 70 प्रतिशत बड़े बांघ 90 प्रतिशत से ज्यादा भरे हैं। सुरक्षा व बाढ़ पर नियंत्रण के चलते 50 प्रतिशत बांधों के गेट 50 से ज्यादा बार खोले गए। तवा Tawa dam , राजीव सागर, पारसडोह, गोपीसागर, बारना के गेट ज्यादा बार खुले। गेट 1 दिन में कई बार खुले। 1 बार खुलने के बाद 2—3 दिन तक लगातार गेट खुले रहे।
इनके गेट कई बार खुले
तवा, बारना, बरगी, बानसुजारा, राजीव सागर, गोपीसागर, इंदिरा सागर, केरवा, पारसडोहा, कोलार कलियासोत, पेंच, माही। अशोकसागर के गेट एक बार भी नहीं खोले गए। कुंडलिया और मोहनपुरा बांध के गेट भी 150 से ज्यादा बार खोले गए। ये दोनों बांध नए हैं, इससे इन्हें आधा ही भरा जाता है।
नर्मदा बेसिन के बांध रहे उफान पर
नर्मदा बेसिन के बांध एक महीने तक उफान पर रहे। इनमें बरगी, बारना, तवा, इंदिरासागर, ओंकारेश्वर, मंडलेश्वर और गांधीसागर बांध शामिल हैं। इन बांधों के आसपास गांवों और सहायक नदियों में बाढ़ के हालात बने। हालांकि अभी भी नर्मदा और इनकी सहायक नदियों का जलस्तर सामान्य नहीं हुआ है।
यहां के बांध 100 फीसदी भरे
उज्जैन, भोपाल, नर्मदापुरम के बांध सौ फीसदी भरे हैं। इस क्षेत्र में 42 बड़े बांध लबालब हैं। सिवनी की भी स्थिति बेहतर है। यहां 48 बड़े बांधों में से 36 भरे हैं। सागर क्षेत्र में कम बारिश होने के बाद भी 37 बांधों में से 20 लबालब हैं।
Published on:
10 Oct 2022 08:32 am
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