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Video : तुमने बनाई थी चाय , मैंने पिया था इश्क़

चाय, चाय और चाय... अगर आप एक चाय लवर्स हैं, तो आप...

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चाय

भोपाल। चाय, चाय और चाय... अगर आप एक चाय लवर्स हैं, तो आप इसकी ललक को समझ सकते हैं। बहुत से लोगों के दिन की शुरुआत चाय से ही होती है। एक स्टडी के मुताबिक देश में तकरीबन 90 फीसदी लोग सुबह नाश्ते से पहले चाय जरूर पीते हैं।

उनमें से कई ऐसे हैं जो एक दिन में कई कई कप चाय पी जाते हैं। ऐसे में भोपाल को चाय के दीवानों का शहर कहना गलत नहीं होगा, क्योंकि यहां चाय की दीवानगी देखते ही बनती है। भोपाल में चाय की दीवानगी पर यंगस्टर्स बड़े ही शायराना अंदाज में कहते हैं कि 'तुमने तो सिर्फ चाय बनाई है लेकिन इस चाय में अपना इश्क पिया है। आज हम आपको भोपाल की ऐसी ही डिफरेंट और पॉपुलर चाय के बारे में बता रहा है।

150 साल पहले तुर्की से आई थी नमक वाली चाय
नमक वाली चाय भोपाल की पहचान बन चुकी है। अन्य देश, प्रदेश से आए लोग भी भोपाल आकर यहां की सुलेमानी चाय पीना नहीं भूलते हैं। शाम ढलते ही पुराने भोपाल में सालों पुरानी चाय की कुछ दुकानों में भीड़ उमड़ पड़ती है और चुस्कियों का ऐसा दौर शुरू होता है जो आधी रात तक चलता है।

पुराने से दिखने वाले कप- प्लेटों में भाप छोड़ती गर्मागर्म चाय देखने में तो आम चाय सी ही नजर आती है, लेकिन ये है बेहद खास। इस चाय के इतिहास के बारे में इतिहासकार बताते हैं कि करीब 150 साल पहले भोपाल की बेगम सिकंदर जहां तुर्की के दौरे पर गईं। वहां से वे इस नमक वाली चाय की रेसिपी लेकर आईं। बाद में पंजाब के महाराजा रंजीत सिंह ने भी नवाब हमीदुल्लाह को एक खास चाय के जायके का राज बताया। धीरे- धीरे नमक वाली यह चाय महल से निकलकर शहर के नुक्कड़ तक पहुंची और आज लोगों की आदत बन गई। शहर में लक्ष्मी टाकीज, इब्राहिमपुरा, बुधवारा समेत पुराने शहर के लगभग हर नुक्कड़ पर इस चाय की दुकानें हैं।

ऐसे बनती है नमक वाली चाय

एकपात्र में चाय पत्ती, शक्कर और खड़ा नमक डालकर उबाला जाता है। इससे बनी चाय को तांबे के बर्तन में डालकर धीमी आंच पर पकाते हैं। दूसरे बर्तन में गर्म हो रहे दूध में इस चाय को मिलाते हैं और नमक वाली चाय तैयार हो जाती है। यह चाय गले की खराश, कफ, सिर दर्द और खांसी जैसी समस्याओं में भी कारगर है।

पुणे और इंदौर के बाद अब भोपाल में भी भीनी खुशबू वाली तंदूरी चाय
तंदूर... यह शब्द जेहन में आते ही, तंदूरी चिकन, रोटी और पनीर ही आता है, लेकिन क्या कभी आपने तंदूरी चाय पी है? अब भोपाल में खास तरह से बनी तंदूरी चाय बिकती है। आप इसके टेस्ट को भुला नहीं पाएंगे।

पुणे और इंदौर के बाद अब भोपाल में भी तंदूर में पकी भीनी-भीनी खुशबू वाली कुल्हड़ चाय परोसी जा रही है। एग्रीकल्चर में बीएससी कर रहे कमलदीप पटेल ने अपने दोस्त राहुल पटेल के साथ मिलकर 10 नंबर स्थित फुलवारी मार्केट में यह तंदूरी चाय सर्व करते हैं। कमलदीप बताते हैं कि तीन महीने पहले फेसबुक पर पुणे की तंदूरी चाय का वीडियो देखा था। भोपाल में जितने भी समय रहा यह देखा कि यहां चाय के बहुत दीवाने हैं। उन्हें कुछ भी नया परोसो तो वो बहुत जल्दी अपनाते भी हैं। लिहाला मैं अपने दोस्त के साथ पुणे गए और चाय बनाने का तरीका जाना। वापस लौटकर पहले इंदौर और फिर भोपाल में यह तंदूरी चाय बनानी शुरू की।

ऐसे बनती है तंदूरी चाय
तंदूरी चाय के बारे में कमलदीप बताते हैं कि इसे बनाने की एक अलग प्रक्रिया है। यहां हम पहले एक पहले से गर्म किए गए तंदूर में कुल्हड़ को गर्म करते हैं। इसके बाद आधी पकी हुई चाय को गर्म कुल्हड़ में डालते हैं। इससे चाय के बुलबुले बनने लगते हैं और वह उबलकर कुल्हड़ से बाहर निकलने लगती है। इस तरह से बनी हुई चाय में स्मोकी फ्लेवर आ जाता है।

चाय-34 - चाय के डिफरेंड फ्लेवर, अब आएगी दम चाय
पुराने भोपाल में तो चाय के कई मशहूर ठिकाने मौजूद हैं लेकिन अब नए भोपाल को भी चाय के अनूठे टेस्ट से रूबरू कराने के लिए मधुर मल्होत्रा ने पांच साल पहले एमपी नगर जोन-2 में चाय 34 नाम से टी-शॉप खोली। यहां मिलने वाली 20 से ज्यादा वैराइटी की चाय इसे खास बनाती है। अपने अलग स्वाद के लिए ही यह यूथ का फेवरेट प्वाइंट बन चुका है।

ऑस्ट्रेलिया से पढ़ाई करने के बाद मधुर ने अपना रियल इस्टेट का बिजनेस संभाला लेकिन उनका दिल कुछ और ही करने का था। मधुर बताते हैं, एक दिन दोस्तों के साथ बैठकर बात कर रहा था और चाय 34 का ख्याल आया और इसे शुरू किया। कुछ अलग करने के लिहाज से सबसे पहले भोपाल में कुल्हड़ और फ्लेवर्ड चाय का कॉन्सेप्ट लाए। आज गुजरात, बिहार और यूपी में भी चाय 34 की फ्रेंचाइजी है। जल्द ही 1 मिनट में एक्सप्रेस चाय सर्विस शुरू करेंगे और अगले महीने से भोपाल को पहली बार दम चाय से रूबरू कराएंगे।

यह नाम रखने की तीन वजह

शॉप में चाय की 20 से ज्यादा वैराइटीज हैं। तुलसी-इलाइची, तुलसी-अदरक, मसाला चाय जैसे देसी वैराइटीज के अलावा यहां पर लेमन-हनी, लेमन-तुलसी जैसे रॉ टी फ्लेवर्स भी हैं। मधुर बताते हैं कि यहां सीजन के हिसाब से चाय के फ्लेवर्स की डिमांड होती है। चाय 34 नाम रखने के पीछे मधुर तीन कारण गिनाते हैं। पहला- जिस प्लॉट पर दुकान है वो एचआईजी-34 है, दूसरा- मेन्यू में 34 आइटम हैं और 34 फ्लेवर की चाय तैयार करना। तीसरा- चाय के साथ 34 की राइमिंग अच्छी होती है।