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गलत तरीके से तलाक पर समुदाय करेगा बहिष्कार

जलसा-ए-ख्वातीन : देश भर से संकल्प पत्र जुटाकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, न्यायाधीश, महिला आयोग और विधि आयोग को भेजेंगी

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भोपाल। हजारों मुस्लिम महिलाओं ने राजधानी के इकबाल मैदान में हाथ उठाकर ऐलान किया कि उन्हें शरीयत में कोई बदलाव मंजूर नहीं। चंद लोगों के विरोध के कारण लाखों लोगों की आस्था को ठेस नहीं पहुंचाई जा सकती है। बुराई हर समाज में है। ये बुराई अज्ञानता के कारण है। इन बुराइयों और गलतफहमियों को दूर करने के लिए सोशल रिफॉर्म की जरूरत है। इसके लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देश भर में आंदोलन चलाएगा। सोशल रिफॉर्म के लिए लोगों को सोशल मीडिया के जरिए जोड़ा जाएगा। गलत तरीके से तलाक देने वालों के सामाजिक बहिष्कार का ऐलान भी किया गया।

पर्सनल लॉ बोर्ड ने सोमवार को -जलसा ए ख्वातीन आयोजित किया। इसमें करीब पांच हजार महिलाएं शामिल हुईं। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और शरीयत के बीच पैदा हो रहे विवाद पर उन्होंने कहा, वे शरीयत में कोई बदलाव नहीं चाहतीं। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हम एहतेराम करते हैं। कोर्ट के फैसले से इसके एक हिस्से पर रोक लग गई। ऐसे में हक प्रभावित हो रहा है। इसीलिए महिलाएं संकल्प पत्र भरेंगी। इसकी शुरूआत इकबाल मैदान से हो गई। देशभर से संकल्प पत्र भरवाकर राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, चीफ जस्टिस, महिला आयोग और विधि आयोग को भेजे जाएंगे।

टोल फ्री नंबर हुआ जारी

बोर्ड सदस्य डॉ. असमा जोहरा ने बताया कि बोर्ड की महिला विंग ने मुस्लिम वुमन हेल्पलाइन टोल फ्री नंबर 18001028426 जारी किया है। ये सात भाषाओं में है। यहां कोई भी महिला और युवती शरीयत की जानकारी ले सकती है। अगर कोई परेशानी है तो वह भी बता सकेगी।

सुधार की जरूरत

* किसी एक तबके के हित की बात कह निशाने पर लेना ध्यान भटकाना है। सुधार की जरूरत हर समाज है। इसके *ए जागरूकता की जरूरत है। सही तरीका बताने की जरूरत है।
- असमां जोहरा, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड महिला विंग

तलाक की नौबत नहीं

* भोपाल में बेगमों का राज रहा। महिलाएं अपने घर की बेगम हैं। शादी-ब्याह इस्लामी तरीके व सोच पर हो तो कभी तलाक की नौबत ही न आए। तलाक का सही तरीका बताया जाए। इसमें सुलह को तीन महीने का वक्त होता है।
-सैय्यद मुश्ताक अली नदवी, शहर काजी

* शरीयत में जो है उसे मानेंगे। तीन तलाक मामले पर लोगों में कई गलत फहमियां हैं। इसे दूर करेंगे। इसके गलत इस्तेमाल से पीडि़त महिलाओं को इंसाफ दिलवाएंगे।
- डा. सूफिया कन्वीनर मप्र ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड महिला विंग

* कोई भी आंदोलन महिलाओं के सहयोग के बिना अधूरा है। ये इतिहास गवाह है। शरीयत में दखल को रोकने और इसका सही तरीका बताने महिलाओं की जिम्मेदारी है वे आगे आएं।
- सज्जाद नोमानी, सदस्य

* ऐसा नहीं कि तलाक से सभी महिलाएं परेशान हैं। कुछ मामले हो सकते हैं। किसी खास समुदाय की बजाय हर उस महिला के लिए लडऩे की जरूरत है जो ऐसे मामले से पीडि़त है।
रईसा मलिक, जनप्रतिनिधि

घर-घर जाकर भरवाए जाएंगे संकल्प पत्र

तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले और शरीयत के बीच पैदा हो रहे विवाद पर मुस्लिम महिलाएं संकल्प पत्र भरेंगी। भोपाल से इसकी शुरुआत हो गई है। राजधानी के इकबाल मैदान में सोमवार को आयोजित जलसा ए ख्वातीन में मौके पर ही कई महिलाओं ने ये संकल्प पत्र भरे। भोपाल में अब घर-घर जाकर महिलाओं से संकल्प पत्र भरवाए जाएंगे। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की महिला विंग की सदस्य, उलेमा और पदाधिकार इसकी शुरुआत करेंगे। बोर्ड के सदस्य आरीफ मसूद ने बताया कि इसके साथ ही शहर में इस मामले पर विभिन्न आयोजन भी कराए जाएंगे, जिसमें मुस्लिम महिलाओं को तीन तलाक, शरियत और इससे जुड़ी हुई बातें बताई जाएंगी।

बोर्ड के सदस्य आरिफ मसूद ने कहा कि ये मजमा इस बात का गवाह है महिलाएं साथ हैं। विरोध करने की गलत बातें फैलाई जा रही हैं। जो विरोध में है उनकी संख्या एक प्रतिशत के करीब है। बोर्ड के सदस्य सज्जाद नोमानी ने कहा कि कोई भी आंदोलन महिलाओं के सहयोग के बिना अधूरा है। ये इतिहास गवाह है। शरीयत में दखल को रोकने और इसका सही तरीका बताने महिलाओं की जिम्मेदारी है वे आगे आएं।

पर्दे का इंतजाम

महिलाओं के जलसे में पर्दे का इंतजाम किया गया था। पर्दे के दूसरी तरफ रहकर उलेमा ने अपनी तकरीर की। वहीं पर्दे के दूसरे तरफ बड़ी संख्या में लोग जमा थे। जलसे का समापन दुआ के साथ हुआ। उलेमा शिराज मुजद्दिदी ने सही और भलाई के रास्ते पर चलने की दुआ कराई। आयोजन में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।

ये रहे मौजूद
बोर्ड अध्यक्ष राबे हसन मदनी, महासचिव वली रहमानी, असमा जेहरा, डॉ. सूफिया कन्वीनर मप्र, शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी मौजूद थे।

बाबरी मस्जिद मामले मेंं सभी पक्षों को सुना जाए
ऑ ल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की रविवार को हुई बैठक बाबरी मस्जिद को लेकर भी चर्चा हुई थी। इस मामले में कहा गया कि बाबरी मस्जिद का मामला कोर्ट में है। वहां सभी पक्षों और तथ्यों को सुना जाए। पिछले कुछ दिनों से इस मामले में जल्दबाजी की जा रही है। वही कुछ ऐसे लोग भी इससे जुडऩे की कोशिश कर रहे हैं जो मामले में पक्षकार भी नहीं हैं। इससे केस प्रभावित हो सकता है।