
,,
फ्रांस के राष्ट्रपति इमानुएल मैक्रों भारत दौरे पर हैं। वे एक दिन पहले राजस्थान की राजधानी जयपुर भी गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी यह यात्रा यादगार बन गई। जयपुर गुलाबी नगरी के नाम से चर्चित है और इसे भारत का पेरिस भी कहा जाता है। फ्रांस का भोपाल से भी सदियों पुराना रिश्ता रहा है। यहां फ्रांस के समय के शक्तिशाली शासक हाउस ऑफ बॉर्बन का वंशज निवास करता है। यह यह सामान्य परिवार नहीं है। इस परिवार की वंशावली जीन फिलिप डी बॉर्बन से मिलती है। यह परिवार प्रतिष्ठित हाउस आफ बॉर्बन्स के मुखिया हैं, यह ऐसा परिवार है जिसके पूर्वजों ने कभी फ्रांस पर दो शताब्दियों से अधिक समय तक राज किया था।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल से भी फ्रांस का सदियों पुराना रिश्ता है। भोपाल का फ्रांस से सदियों पुराना कनेक्शन है, इसका उल्लेख विकीपीडिया में भी मिलता है। विकिपीडिया में इसका उल्लेख है कि बल्थाजार नेपोलियन IV डी बॉर्बन (जन्म 29 जुलाई 1958) हाउस ऑफ बॉर्बन के वरिष्ठ वंशज होने का दावा करते हैं और इस प्रकार फ्रांस के विलुप्त साम्राज्य के सिंहासन के दावेदार हैं ।
भोपाल बॉर्बन्स (THE BOURBONS OF BHOPAL) की कहानी जीन फिलिप से शुरू होती है जो फ्रांस के पहले बॉर्बन राजा हेनरी चतुर्थ का चचेरा भाई था, जो 1560 में भारत आया था। जल्द ही, उसने मुगल सम्राट अकबर का विश्वास जीत लिया था। द बॉर्बन्स आफ इंडिया एक भारतीय परिवार है जो हाउस आफ बार्बन के वैध उत्तराधिकारी होने का दावा करता है, जो जीन फिलिप डी बार्बन एक निर्वासित फ्रांसीसी कुलीन व्यक्ति था। जिसने मुगल काल में सेवा की थी। बादशाह अकबर का दरबार परिवार को हाउस ऑफ बॉर्बन-भोपाल के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम मध्य भारत के भोपाल शहर से लिया गया है, यहां उनकी पिछली कुछ पीढ़ियां रहती थीं और स्वतंत्र पूर्व भारतीय भोपाल राज्य रॉयल कोर्ट में काम करती थीं।
भोपाल शहर के सदर मंजिल और शौकत महल में इंडो-फ्रेंच आर्किटेक्चर की झलक दिखाई देती है। फ्रांस से निर्वासित बार्बन वंश के जीन फिलिप डी बार्बन की आगे की पीढ़ियों ने ही भोपाल में शौकत महल और कैथोलिक चर्च का निर्माण करवाया था। इसके अलावा साल 1870 में भोपाल आए फ्रांसीसी यात्री लुईस रूजलेट ने ही शहरवासियों को शतरंज के बारे में बताया था।
फ्रांस के सिंहासन पर दावा
बॉर्बन-भोपाल परिवार के वर्तमान मुखिया बल्थाजार नेपोलियन चतुर्थ डी बॉर्बन हैं, जो पेशे से वकील हैं। डी बॉर्बन के फ्रांस के बॉर्बन से संबंध के दावे का ग्रीस के राजकुमार माइकल ने अपने ऐतिहासिक उपन्यास ले राजा बॉर्बन में समर्थन किया था।
लखेरापुरा में था महल
साल्वाडोर के उत्तराधिकारी बल्थाजार प्रथम भोपाल के प्रधानमंत्री बने, लेकिन 1829 में एक महल की साजिश में उन्हें जहर देकर मार दिया गया। पुराने लोग लखेरापुरा में पहले बल्थाजार की पत्नी इसाबेला के महल को याद करते हैं, जो बाद में ढहा दिया गया था। भोपाल के जहांगीराबाद क्षेत्र में उनकी हवेली भी थी।
Updated on:
26 Jan 2024 01:54 pm
Published on:
26 Jan 2024 01:52 pm
बड़ी खबरें
View Allभोपाल
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
