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वर्तमान का पुरुषार्थ ही भाग्य बनता है: प्रशांत सागर महाराज

मुनिसंघ ने किया शौर्य स्मारक का अवलोकन
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भोपाल

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Rohit Prasad Verma

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Updated: 12 Jul 2018, 11:02 AM IST

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वर्तमान का पुरुषार्थ ही भाग्य बनता है: प्रशांत सागर महाराज

भोपाल. वर्तमान का पुरुषार्थ ही भविष्य का भाग्य बनता है, इसलिए जीवन में सदैव पुरुषार्थ करते रहना चाहिए। इसके बिना भाग्य भी काम नहीं करता। ये उद्गार मुनिश्री प्रशांत सागर महाराज ने हबीबगंज जैन मंदिर में व्यक्त किए। उन्होंने कहा पुरुषार्थ को बढ़ाते चलिए तो भाग्य भी साथ देगा।

मनुष्य के जीवन की गाड़ी के दो पहिए हैं, भाग्य और पुरुषार्थ दोनों एक दूसरे के पूरक हंै। दिगम्बर जैन पंचायत कमेटी ट्रस्ट के अंशुल जैन ने बताया, धर्मसभा के पूर्व मुनि संघ पद विहार करते हुए चौक जैन मंदिर से हबीबगंज जैन मंदिर पहुंचे। मंदिर समिति संयोजक प्रदीप नौहरकला, निर्माण कमेटी संयोजक राकेश जैन और ओएसडी मनोज बांगा आदि ने मुनि संघ की आगवानी की।

धर्मसभा में मुनिश्री निर्वेग सागर महाराज ने कहा, हमारे जीवन की यात्रा किसी न किसी लक्ष्य को लेकर चलती रहती है। एक यात्रा सांसारिक जीवन और दूसरी परमार्थ पाने के लिए होती है। दोनों ही जीवन में शांति और सुख चाहते हैं। सुख सभी की अभिलाषा है पर अंतर इतना है कि एक के जीवन में अतिइन्द्रीय सुख है और एक के जीवन में इंद्रीय सुख। इंद्रीय सुख तत्कालिक आनंद देता है, जो क्षण भंगुर होता है। अतिइन्द्रीय सुख दीर्घकालीन आनंद देता है।

जिनालय और शौर्य स्मारक का अवलोकन
इस मौके पर मुनिसंघ ने हबीबगंज जैन मंदिर परिसर स्थित निर्माणाधीन पंच बालयति एवं सहस्त्रकूट जिनालय का अवलोकन किया। दोपहर को शौर्य स्मारक का अवलोकन करने पहुंचे। शौर्य स्मारक देखने के बाद मुनिसंघ ने इसकी प्रशंसा की। इस मौके पर बड़ी संख्या में जैन समाज सहित अन्य श्रद्धालु मौजूद रहे और मुनिश्री के दर्शन किए।

वेदी प्रतिष्ठा और याग मंडल विधान का समापन
जैन मंदिर उमरावदूल्हा बाग में वेदी प्रतिष्ठा, याग महामंडल विधान का बुधवार को समापन हुआ। प्रात: मूलनायक भगवान पाŸवनाथ का अभिषेक व पूजा-अर्चना के साथ विधान के अघ्र्य समर्पित किए गए। प्रतिष्ठाचार्य ब्रम्हचारी नितेश भैया बागीदौरा के निर्देशन में विश्वशांत महायज्ञ में शांति कामना को लेकर आहुतियां दी गईं।