
भोपाल। प्रदेश में पट्टे की जमीन को लेकर विवाद बरकरार है। सरकार ने 1980 के बाद दिए गए पट्टों की जमीन बेचने पर रोक लगाई थी, लेकिन जिलों ने इससे पहले के पट्टों वाली जमीन पर भी पाबंदी लगा दी गई। इसे लेकर किसानों और अफसरों के बीच खींचतान के दो दर्जन मामले सामने आए हैं।
दरअसल, वर्ष 2013 में 1980 से पूर्व के पट्टों की जमीन को बेचने को लेकर विवाद हुआ था। कलेक्टरों ने ऐसे प्रकरणों में जिलास्तर पर जमीन बिक्री पर रोक लगा दी थी। इसके बाद राजस्व विभाग ने मार्च 2014 में स्पष्ट किया कि 1980 के पहले के पट्टों वाली जमीन की बिक्री प्रतिबंधित है। इसके बावजूद सीहोर, बैतूल, राजगढ़, नरसिंहगढ़, विदिशा, रायेसन सहित दो दर्जन जिलों विवाद सामने आए हैं। यहां पूर्व के पट्टों की जमीन को बेचने पर जिला प्रशासन ने रोक लगा दी है। किसानों ने अपनी जरूरतों को लेकर जमीन बेची उनका विक्रय भी रोक दिया गया।
1980 से संशोधन
पट्टे की जमीन को लेकर 1980 में भू-संहिता में संशोधन हुआ था, तब पट्टों को बिना कलेक्टर की मंजूरी के बेचने पर रोक लगा दी गई थी। इसके बाद वर्ष 1992 में भी भू-संहिता में संशोधन हुए, तब स्पष्ट किया गया कि 1980 से पूर्व पट्टे वालों के जमीन बेचने की छूट रहेगी।
सरकार ने 1980 के पहले के पट्टों वाली जमीन की बिक्री पर रोक नहीं लगाई तो जिलास्तर पर पट्टों पर अहस्तांरणीय क्यों लिखा जा रहा है।
-रामलाल कुशवाह, किसान, सीहोर
राजस्व विभाग ने मार्च 2014 के आदेश में साफ लिखा है कि 1980 के पूर्व के पट्टों पर रोक की धारा लागू नहीं होगी, लेकिन जिलों में इसे नहीं माना जाता।
-धनश्याम मौर्य, किसान बैतूल
पट्टे की जमीन के हस्तांतरण को लेकर अनेक जगह विवाद हैं। इसमें दस्तावेज देखकर बता सकूंगा।
- उमाशंकर गुप्ता, मंत्री, राजस्व विभाग
Published on:
15 May 2018 03:14 pm
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