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बेहद महंगे हैं खास खुशबू वाले ये इत्र, 15 दिनों तक बनी रहती है इनकी महक

15 हजार रुपये तक के इत्र

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15 हजार रुपये तक के इत्र

भोपाल. इन दिनों माह-ए-रमजान चल रहा है जिसके कारण शहर में इत्र की बिक्री काफी बढ़ गई है। खासतौर पर इब्राहिमपुरा और जुमेराती क्षेत्र के इत्र व्यवसायियों को तो जरा भी फुर्सत नहीं मिल रही है। इत्र की महक से सजी इन दुकानों में 50 रुपए से लेकर 250 रुपए तक कि इत्र ज्यादा बिकती हैं। रमजान के लिए यहां इत्र की खरीदारी शब-ए-बरात से शुरू हो जाती है जोकि ईद तक चलती है। माहभर में करीब 10 करोड़ का कारोबार हो जाता है। यहां महंगेे इत्र के शौकीन भी खूब आते हैं और हजारों रुपए की इत्र खरीद लेते हैं।

इस बार रमजान में इत्र की मांग काफी बढ़ गई है। दुकानों पर लोगों की ऐसी भीड़ हो रही है कि खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती। व्यापारी बताते हैं कि दो साल से कोरोना के कारण व्यवसाय ठंडा पड़ा हुआ था लेकिन इस साल परिस्थितियां सामान्य होने के कारण इत्र खूब बिक रही है। शहर में लगभग 200 इत्र की दुकानें हैं, जहां इत्र की हर प्रकार की वेरायटी उपलब्ध है।

मुस्लिमों में इत्र लगाना सुन्नत माना गया है, इसलिए रमजान में इत्र की डिमांड काफी बढ़ जाती है। कई लोग ईद के दिन इत्र तोहफे में देते हैं। इब्राहिमपुरा, जुमेराती और काजीपुरा क्षेत्र के इत्र व्यवसायी बताते हैं कि राजधानी में इत्र के कई शौकीन लोग हैं जोकि महंगे इत्र भी खूब खरीदते हैं। खास किस्मों की इत्र के लिए ये लोग 15 हजार रुपये तक खर्च कर देते हैं।

कुछ अच्छी और महंगी किस्मों की इत्र की खुशबू बहुत खास रहती है. इनकी महक 15 दिन तक बरकरार रहती है. डियो में अल्कोहल मिला रहता है जिसके कारण मुस्लिम रमजान के दौरान इसका इस्तेमाल नहीं करते। रोजेदार इस दौरान इत्र का इस्तेमाल करते हैं। जानकार बताते हैं कि सेफरोन, मुश्क, प्योर ऊद से आदि से निर्मित इत्र 15 दिन तक महकती रहती है।

गुलाब, बेला, मोगरा, जासमीन, हिना, कच्ची कली, रातरानी, मोतिया, फुशुआ जैसी इत्रों की शीशी 100 से दस हजार रुपये तक है। किस्मों के हिसाब से ही इत्र की कीमत भी रहती है।

इन इत्रों की सबसे ज्यादा डिमांड
मोगरा, फिरदौस, खस, चंदन, चमेली, केवड़ा, गुलाब, कस्तूरी, मेहंदी, कदम, केसर, जन्नतुल, शमामा, शमाम-तूल-अंबर, हिना, रातरानी, मोतिया, फुशुआ, बेला,मुश्क-अंबर।