
इन बच्चों ने उठाया ऐसा कदम कि मिल गई 29 लोगों को नई जिंदगी
भोपाल@सत्येंद्र सिंह भदौरिया की रिपोर्ट...
यह कहानी उन दो छात्रों की है, जो अपनी जेब खर्च की राशि को जमा करते रहे। छात्रा को लॉ की क्लास में एक एेसा वाक्या सुनने को मिला, कि वह पिछले दो साल से कैदियों की रिहाई कराने में जुट गई। इधर एक महिला एडिशनल एसपी का बेटा जो कक्षा दसवीं का छात्र है। छात्र गणित में मानद डॉक्टरशिप की उपाधि हासिल कर चुका है। इन दोनों छात्रों के साथ शहर के दो सिटीजन एेसे भी हैं, जिन्होंने आर्थिक तंगी के कारण अतिरिक्त सजा भोगने को मजबूर कैदियों को रिहा कराने का बीड़ा उठाया है। इन चारों की मदद से मप्र की इंदौर, जबलपुर, और भोपाल जेल से करीब 29 एेसे कैदी स्वतंत्रता दिवस पर रिहा हो रहे हैं।
कॉलेज में लेक्चरर के दौरान सुना
यह बात आज से दो साल पुरानी है, जब मैं एलएलबी सेंकेंड ईयर की छात्र थी। उस समय कॉलेज में एक लेक्चर चल रहा था। प्रोफेसर ने कहा कि जेल में कई कैदी एेसे निर्धन होते हैं। जो सजा तो पूरी काट लेते हैं, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वह स्वतंत्रता दिवस पर रिहा नहीं हो पाते। इस लेक्चर से मैं प्रेरिणा लेने के बाद मैंने अपने जेब खर्च को जोडऩा शुरू किया। उन पैसों से मैं जेल में बंद गरीब बंदियों की मदद करने लगी। मैं पिछले दो साल में 10 बंदियों को रिहा कराने के लिए 20 हजार 900 रुपए की अपनी पॉकेट मनी जमा कराई है। यह कहना है जबलपुर निवासी आयुषी सक्सेना का। आयुषी फिलहाल अहमदाबाद निरमा यूनिवर्सिटी से एलएलबी फोर्थ इयर की छात्रा हैं।
दो साल से कर रहा था इंतजार
वर्ष 2017 में बाल दिवस के अवसर पर आयुष किशोर को विशेष प्रतिभावान बच्चों के साथ राष्ट्रपति भवन दिल्ली में आमंत्रित किया गया था। राष्ट्रपति से लेकर राज्यपाल तक के पुरस्कार हालिस कर चुके आयुष के मन में यह ख्याल, तब आया था। जब नवम्बर 2016 में राजधानी सेंट्रल जेल से सिमी के आठ आतंकी एक हवलदार की हत्या कर जेल ब्रेक कर फरार हो गए थे। हवलदार की बेटी की शादी थी, घर में चर्चा होने लगी कि अब बेटी की शादी कौन करेगा।
इस बीच आयुष के मन में ख्याल आया और एडिशनल एसपी (एआइजी योजना शाखा) मां विनीता मालवीय को मन की बात बताई। इस बीच सीएम ने हवलदार की बेटी की शादी करने का एलान कर दिया। फिर आयुष ने मां के साथ एेसे बंदियों की मदद करने की सोची, जो आर्थिक तंगी के बीच सजा भुगत रहे थे। आयुष ने अपनी जेब खर्च की करीब 27 हजार 850 रुपए की राशि को एेसे 14 कैदियों पर खर्च किया, जो सजा तो पूरी काट चुके थे। लेकिन जुर्माना राशि अदा नहीं करने के चलते उन्हें जेल में और रहना पड़ता।
पांच साल से कर रहे गरीबों की मदद
राजधानी भोपाल में रहने वाले लांयस क्लब साउथ के सदस्य एमके जैन पिछले पांच सालों से एेसे कैदियों की मदद करने में जुट हुए हैं। वह कभी सरकारी स्कूल, तो कभी अनाथआलय में मदद करने पहुंच जाते हैं। एमके जैन ने अपनी संस्था के जरिए सिर्फ गरीबों की मदद करने का बीढ़ा उठाया है। एेसे ही भोपाल के एक अधिवक्ता है, उजेद तेज। जिन्होंने इस बार एेसे दो कैदियों की 11 हजार 500 रुपए की जुर्माना राशि अदा की है, जो आर्थिक तंगी से परेशान थे।
इस बार स्वतंत्रता दिवस पर एक छात्राा और एक छात्र के साथ अधिवक्ता और एक सीनियर सिटीजन की मदद से इंदौर, भोपाल और जबलपुर से करीब 29 एेसे कैदी रिहा हो रहे हैं, जो सजा तो पूरी कर चुके थे। लेकिन जुर्माने के लिए रुपए नहीं थे।
जीआर मीणा, एडीजी मप्र जेल
Published on:
13 Aug 2018 10:20 am
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