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पहले झेला मां-दादी का विरोध फिर, एक जिद से बन गईं ‘ठुमरी की रानी’

पहले झेला मां-दादी का विरोध फिर, एक जिद से बन गईं 'ठुमरी की रानी'

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girija devi

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भोपाल। ठुमरी क्वीन के नाम से मशहूर ठुमरी गायिका गिरिजा देवी का नाम तो सभी को याद होगा। गायिका गिरिजा देवी दुनिया का जाना-माना चेहरा थीं। उन्होंने ठुमरी गायकी को आम नागरिकों और श्रोताओं के लिए मुहैया कराया। उनके जीवन से जुड़े कई ऐसे रोचक किस्से हैं जिन्हें लोग नहीं जानते हैं। उनके चाहने वाले उन्हें प्यार से अप्पा जी कहकर बुलाया करते थे। उनके पिता हारमोनियम बजाते थे और संगीत सिखाते थे। गिरिजा ने 5 साल की उम्र में सारंगी वादक सरजू प्रसाद मिश्रा से ख्याल और टप्पा गाना सीखा था। उन्होंने 9 साल की उम्र में फिल्म 'याद रहे' में काम किया था।

पिता से ली तालीम

गिरिजा देवी का जन्म साल 1929 को वाराणसी में हुआ था। बताया जाता है कि जब वे छोटी थी तब ही उनके पिता रामदेओ ने उन्हें एक दफा अपनी गुड़िया के लिए शादी का गाना गाते हुए सुना था, जिसके बाद अपनी बिटिया की प्रतिभा को पहचाना था। शुरुआती दिनों के करियर में उन्होंने अपने पिता से ही संगीत की तालीम ली।

पहुंचाना नहीं था आसान

साल 1949 में गिरिजा ने पूरी तरह से कदम बढ़ाए और दुनिया में ऑल इंडिया रेडिया, इलाहाबाद से पब्लिक डेब्यू किया। लोगों के सामने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करना उनके लिए आसान नहीं था। उन्हें घर में अपनी ही मां और दादी की कई बातों को सुनना पड़ा। वे नहीं चाहती थी कि गिरिजा किसी और के सामने घर के बाहर परफॉर्म करे। सब कुछ सहने के बाद गिरिजा ने फैसला लिया कि वह दूसरों के लिए परफॉर्म नहीं करेंगी. लेकिन उन्होंने साल 1951 में बिहार में पहला पब्लिक कॉन्सर्ट किया। वे 1980 में आईटीसी संगीत रिसर्च अकाडमी कोलकाता की और 1990 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की फैकल्टी मेंबर बनी थीं।

मिल चुके हैं ये सम्मान

गिरिजा कई बड़े पुरस्कार सम्मान से पुरस्कृत की गई थीं। उन्हें 1972 में गिरिजा देवी को पद्म श्री अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था। 1989 में उन्हें पद्म भूषण और 2016 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था. इसके अलावा संगीत नाटक अकादमी अवार्ड, अकादमी फेलोशिप, यश भारती समेत कई पुरस्कारों से उन्हें सम्मानित किया जा चुका था।

भोपाल में ट्रिब्यूट देंगे कलाकार

राजधानी के लोगों को बड़े दिनों बाद क्लासिकल, सूफी और बॉलीवुड के तीन कलाकारों का मिलन होगा। यह कलाकार एक साथ एक मंच से द लीजेंड्स कार्यक्रम में ठुमरी क्वीन गिरिजा देवी को म्यूजिकल ट्रिब्यूट देंगे। यह आयोजन रवीन्द्र भवन स्थित मुक्ताकाश मंच पर होगा। साईंबाबा स्टूडियो के आर्टिस्ट 440 और सारेगामा म्यूजिक एकेडमी की ओर से बीएसएनएल प्रेजेंट 'द लीजेंड्स' के तहत ठुमरी क्वीन के नाम से मशहूर पद्म विभूषण से सम्मानित बनारस घराने की शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी को म्यूजिकल ट्रिब्यूट दी जाएगी।

3 मार्च को रवीन्द्र भवन के मुक्ताकाश मंच पर बॉलीवुड सिंगर जावेद अली, प्रसिद्ध सेमी क्लासिकल सिंगर राशिद खान और गिरिजा देवी की शिष्या और बनारस घराने की क्लासिकल सिंगर सुनंदा शर्मा परफॉर्म करेंगी। कार्यक्रम शाम 6.30 बजे शुरू होगा, प्रवेश नि:शुल्क और पहले आएं पहले पाएं के आधार पर है। 'पत्रिका' इस कार्यक्रम का को-प्रेजेंटर है।

तारीख- 3 मार्च
समय : शाम 6.30 बजे
स्थान- रवीन्द्र भवन
प्रवेश - नि:शुल्क (पहले आएं पहले पाएं)
कलाकार- जावेद अली, राशिद खान और सुनंदा शर्मा