
Chambal Expressway
भोपाल. चंबल एक्सप्रेस-वे देश के बड़े एक्सप्रेस में शुमार है. यह तीन राज्यों को जोड़ेगा. इस एक्सप्रेस वे को सरकार जल्द पूरा कराना चाहती है और इसके लिए प्रयास भी प्रारंभ कर दिए गए हैं हालांकि चंबल एक्सप्रेस-वे यानी अटल प्रोग्रेस-वे का समयावधि में लक्ष्य पूरा होना आसान नजर नहीं आ रहा. मध्यप्रदेश में इस साल दिसंबर तक निजी जमीन का अधिग्रहण पूरा करना है, लेकिन अभी तक बीस फीसदी अधिग्रहण भी नहीं हो सका है।
अब ढाई महीने में अधिग्रहण करना चुनौती है। ग्वालियर-चंबल अंचल में एक्सप्रेस-वे का खास महत्व होगा। इस कारण केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया भी प्रोजेक्ट में विशेष रुचि ले रहे हैं। इसके तहत दिसंबर तक 1300 हेक्टेयर निजी जमीन के अधिग्रहण का लक्ष्य रखा गया है। परेशानी यह कि इसके बदले में दोगुनी सरकारी जमीन दी जानी है, लेकिन निजी जमीन मालिकों को दूसरी जगह जमीन भी पसंद नहीं आ रही है।
पहले कोरोना काल के कारण अटल प्रोग्रेस-वे के कामों में देरी हुई। इसके अलावा बार-बार अटल प्रोग्रेस-वे को भारतमाला प्रोजेक्ट में शामिल होने और न होने की स्थिति भी पिछले तीन साल में बनी। इसलिए यह प्रोजेक्ट अटका। इसके बाद 28 विधानसभा सीटों के उपचुनाव आ गए। वहीं ग्वालियर-चंबल में बाढ़ ने इंफ्रास्ट्रक्चर को बर्बाद किया। अब फिर उपचुनाव आ गए हैं। इस कारण सरकार का फोकस बार-बार असामयिक मुद्दों पर टर्न होता गया।
इसलिए दिसंबर तक पूरा निजी जमीन अधिग्रहण आसान नहीं रहा। सरकार का मकसद 2023 के लिए बेस-प्लेटफॉर्म बनाना है. 2023 के पहले चंबल एक्सप्रेस वे का बेस-प्लेटफॉर्म तैयार करने का लक्ष्य है। दरअसल विधानसभा चुनाव के पहले सरकार इसे बनाकर चुनावी लाभ लेना चाहती है। ग्वालियर-चंबल अंचल में एक्सप्रेस वे का काफी असर होगा। औद्योगिक विकास, नगरीय, ग्रामीण विकास और रोजगार में बढ़ोतरी होगी।
३१३ किलोमीटर एक्सप्रेस-वे मध्यप्रदेश में बनना है यह मार्ग
राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश को जोड़ेगा
३०९३ हेक्टेयर भूमि अधिग्रहित की जानी है कुल।
इसमें से १३०० हेक्टेयर निजी जमीन दिसंबर तक अधिग्रहित करना है
मध्यप्रदेश में यह मार्ग श्योपुर, मुरैना, भिंड जिले से होकर गुजरेगा
Published on:
16 Oct 2021 10:17 am
