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पुष्य नक्षत्र आज: इन बातों का रखें खास ख्याल कभी नहीं रुठेंगी मां लक्ष्मी!

पुष्य नक्षत्र सभी नक्षत्रों का राजा...

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pushya nakshatra 2018

पुष्य नक्षत्र आज: इन बातों का रखें खास ख्याल कभी नहीं रुठेंगी मां लक्ष्मी!

भोपाल। वैसे तो हर किसी शुभ कार्य के लिए अलग-अलग मुहूर्त होते हैं, लेकिन कुछ मुहूर्त हर कार्य के लिए विशेष होते हैं।

इन्हीं में एक है, पुष्य नक्षत्र जिसे खरीदारी से लेकर अन्य शुभ कार्यों तक महामुहूर्त का स्थान प्राप्त है। इन्हीं में से एक होता है पुष्‍य नक्षत्र, मान्यता है कि इस नक्षत्र के दिन किए गए कार्यों का उत्तम फल प्राप्त होता है।

पंडित सुनील शर्मा के अनुसार पुष्य नक्षत्र बहुत ही शुभ नक्षत्र माना जाता है। इस नक्षत्र में किया काम पूरी तरह से फलदायी होता है। इस बार 31 अक्टूबर, बुधवार यानी आज पुष्य नक्षत्र है। इस दिन खरीदारी, भूमि पूजन, लेन-देन करना शुभ माना जाता है।

पुष्य नक्षत्र का समय:
पुष्य नक्षत्र 30 अक्टूबर रात 3 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर 31 अक्टूबर की रात 2 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।

यह 28 नक्षत्रों में 8वां नक्षत्र है और 12 राशियों में एकमात्र कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है। पुष्य नक्षत्र के सभी चरणों के दौरान चंद्रमा अन्य किसी राशि का स्वामी नहीं है, इसलिए पुष्य नक्षत्र को सुख-शांति व धन-संपत्ति के लिए अत्यंत पवित्र माना गया है।

गोल्ड यानि सोने का है अधिक महत्व...
सोने की खरीदारी का पुष्य नक्षत्र में अधिक महत्व है। लोग इस दिन सोने इसलिए खरीदते हैं, क्योंकि इसे शुद्ध, पवित्र और अक्षय धातु के रूप में माना जाता है। पुष्य नक्षत्र पर शुभ ग्रहों का प्रभाव होने पर यह सेहत संबंधी कई समस्याओं को समाप्त करने में सक्षम होता है।

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ऐसे समझें आज का दिन...
पंडित शर्मा के मुताबिक पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति और स्वामी शनि हैं। सभी नक्षत्रों में इसे सर्वाधिक शुभ नक्षत्र की संज्ञा दी गई है। इसमें किया गया कोई भी कार्य पुण्यदायी और तुरंत फल देने वाला होता है।

सप्ताह के वार के साथ पुष्य नक्षत्र का संयोग होने से गुरु पुष्य, रवि पुष्य, शनि पुष्य, बुध पुष्य जैसे महायोगों का निर्माण होता है, जिनमें खरीदी करने का विशेष महत्व माना गया है।

दीपावली से पहले पुष्य नक्षत्र का महत्व...
वहीं दीपावली से पहले पुष्य नक्षत्र का आना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसमें बाजारों में जमकर खरीदी की जाती है। साथ ही इस दिन धन की पूजा करने का भी विधान है।

दीपावली से पहले इस बार पुष्य नक्षत्र 31 अक्टूबर, बुधवार को आ रहा है। चूंकि पुष्य नक्षत्र के देवता बृहस्पति हैं और इस बार यह भगवान श्रीगणेश के दिन बुधवार को आ रहा है, इसलिए यह विशेष शुभकारक योग का निर्माण कर रहा है।

पुष्य नक्षत्र 30 अक्टूबर की रात्रि में 3 बजकर 50 मिनट से प्रारंभ होकर 31 अक्टूबर को रात्रि 2 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस प्रकार पुष्य नक्षत्र का संपूर्ण योग बुधवार 31 अक्टूबर के दिन रहेगा। ऐसे में माना जाता है कि इस दिन घर में नई वस्तुएं लाने के लिए अत्यंत शुभ दिन होगा।

इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, कपड़े, जेवर, भूमि, भवन, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक वस्तुएं आदि खरीदने के लिए शुभ योग है।

नक्षत्रों का राजा है पुष्य...
ज्योतिष शास्त्र में 27 नक्षत्रों के चक्र में पुष्य आंठवा नक्षत्र होता है। इसे नक्षत्रों का राजा कहा गया है। इस बार पुष्य नक्षत्र 31 अक्टूबर यानी आज है। यह 30 अक्टूबर रात 3:50 बजे से शुरू होकर 31 अक्टूबर को रात 2 बजकर 34 मिनट तक रहेगा। इस दिन आप मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए अनेक उपाय कर सकते हैं:

यह करें इस दिन
पुष्य नक्षत्र मां लक्ष्मी का अत्यंत प्रिय नक्षत्र है। इसमें मां लक्ष्मी की प्रसन्नता के लिए अनेक उपाय किए जाते हैं।
: 31 अक्टूबर को प्रात: 6.30 से 9.21 बजे के बीच महालक्ष्मी मंदिर में जाकर देवी को 108 गुलाब के पुष्प अर्पित करें।
इससे घर में स्थायी लक्ष्मी का वास होगा।
: पुष्य नक्षत्र में दूध और चावल की खीर बनाकर चांदी के पात्र में लक्ष्मी को भोग लगाने से अष्टलक्ष्मी की प्राप्ति होती है।

: पुष्य नक्षत्र में श्रीसूक्त के 108 पाठ करने से जीवन के आर्थिक संकटों का नाश होता है और सुख-सौभाग्य प्राप्त होता है।
: वैवाहिक जीवन में सामंजस्य और खुशहाली के लिए पुष्य नक्षत्र में शिव परिवार का विधि-विधान से पूजन करें।
: विवाह में बाधा आ रही है तो पुष्य नक्षत्र में बृहस्पति देव के निमित्त कन्याओं को बेसन के लड्डू बांटें।
: भगवान श्रीगणेश को 1008 दुर्वांकुर अर्पित करने से सुख-सौभाग्य, वैभव और ज्ञान की प्राप्ति होती है।
: विद्या बुद्धि की प्राप्ति के लिए पुष्य नक्षत्र के दिन चांदी के पात्र से दूध का सेवन करें।