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मां के सिलाई कढ़ाई के शौक को आगे बढ़ाया, आज छह लाख सालाना टर्न ओवर, कई लोगों को रोजगार दिया

- जयपुर, अहमदाबाद, मुम्बई, दिल्ली जाकर खुद सलेक्ट करती हैं साड़ी, सूट, यहां ऑनलाइन ग्रुप में जुड़कर करती हैं काम, छह महिलाओं को दिया है रोजगार, बुटीक का नाम रखा, मेरी मां बुटीक - कैंसर पीडि़त होने के बाद भी मां ने काफी मदद की, अब इंदौर में रहकर फोन पर लेती रहती हैं जानकारी, मोनिका को अपनी मां से है काफी लगाव

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मां के सिलाई कढ़ाई के शौक को आगे बढ़ाया, आज छह लाख सालाना टर्न ओवर, कई लोगों को रोजगार दिया

कैंसर पीडि़त होने के बाद भी मां ने काफी मदद की, अब इंदौर में रहकर फोन पर लेती रहती हैं जानकारी, मोनिका को अपनी मां से है काफी लगाव

प्रवेंद्र तोमर...

भोपाल. मैं मोनिका वर्मा, शाहपुरा ए सेक्टर में निवासरत हूं। पहले में पति के साथ इंटीरियर डिजाइन का काम भी देखती थी। मेरी मां को कैंसर है, उनको बहुत प्यार करती हूं। उनको सिलाई कढ़ाई का काफी शौक है, मैंने इंटीरियर डिजाइन का काम छोड़कर सिलाई, कढाई और साड़ी की अलग-अलग वैरायटी का काम शुरू किया। घर से ही मां के साथ पांच हजार रुपए में मैंने काम शुरू किया। ये इतनी तेजी से बढ़ा कि पहले वर्ष ही 50 हजार रुपए का सालाना टर्नओवर शुरू हो गया। पहले ऑर्डर पर साड़ी, सूट मंगाती थी, बाद में ऑर्डर बढ़े तो मुझे खुद जाकर साडिय़ां सलेक्ट करनी पड़ीं। मैं जयपुर जाती और पूरा स्टॉक सलेक्ट करती। इसके बाद डिमांड और बढ़ी, मैंने व्हाट्सएप ग्रुप बनाया जिसमें दो सौ से ज्यादा लोग जुड़े हैं। सोशल मीडिया पर वेबसाइट से जुड़ी, इसके बाद अहमदाबाद, मुम्बई, दिल्ली तक से लोग जयपुर की साडिय़ों, सूट के लिए सम्पर्क करने लगे। पांच साल में ही काम काफी अच्छा चल निकला, आज मैं घर से ही पूरा करती हूं, इसी में साल का टर्नओवार पांच से छह लाख रुपए पहुंच जाता है। बुटीक का नाम भी, मेरी मां बुटीक रखा है, जो घर से ही चलता है।

आस-पास की महिलाओं को देती हूं काम
ऑर्डर बढऩे के बाद काम बढ़ा तो आस-पास बस्तियों में रहने वाली जरूरतमंद महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। उनको परेशानी न हो इसलिए उनको घर पर ही जाकर स्ट्रिचिंग वर्क देकर आती हूं। कढ़ाई व अन्य जो भी काम होते हैं वो करके तैयार रखती हैं, मैं जाकर ले आती हूं। इस बार शादी सीजन सही दिख रहा है। काफी ऑर्डर मिल रहे हैं, काम भी अच्छा होने की उम्मीद है।

कोरोना का ज्यादा असर नहीं पड़ा

मोनिका ने बताया कि कोरोना शुरू होने के बाद कुछ समय तक तो काम पर असर पड़ा, लेकिन बाद में स्थिति ठीक होती चली गई। ऑनलाइन और ऑर्डर पर बिक्री के चलते लोग ऑर्डर देते रहे। लॉकडाउन खुलने के बाद जयपुर से भी ऑर्डर पर माल आता रहा। सोसायटी और ग्रुप में लोग ऑनलाइन खरीददारी करते रहे। शादी के सीजन में कम लोगों को अनुमति में विवाह होते रहे, दुकानों पर लोग जाने से बचते थे। दुकानें खुलती भी कम थीं। इस कारण ऑनलाइन ऑर्डर काफी मिले हैं। कोरोना में काम पर ज्यादा असर नहीं पड़ा। ये कहें कि ऑनलाइन और व्हाट्सएप ग्रुप की मदद से काम चलता रहा।

मां को समर्पित है पूरा काम, पति करते हैं मदद
मेरे पति संजय वर्मा मेडिकल लाइन से जुड़े हैं, उनका इंटीरियर डिजाइन का काम भी है। पहले मैं उनके साथ हाथ बंटाती थी, फिर लगा बच्चे बड़े हो रहे हैं। मुझे भी कुछ अलग कुछ काम करना चाहिए। मैंने मां की पसंद को ही आगे बढ़ाया और सिलाई कढ़ाई, स्ट्रिचिंग, साड़ी के काम को शुरू किया। इसे सोशल मीडिया से जोडऩे पर काफी तेजी से काम बढा है। शादी का सीजन शुरू होते ही काफी ऑर्डर आते हैं। सोसायटी, कॉलोनियों से भी महिलाएं सम्पर्क करती हैं।

इनकम मीटर---
वर्ष-2016--- मां के साथ मिलकर 5000 हजार से शुरूआत की

वर्ष-2017--- एक साल 50 हजार

वर्ष- 2018---दूसरे वर्ष में 1.50 लाख
वर्ष- 2019---तीसरे वर्ष 3.00 लाख

वर्ष- 2020---चौथे वर्ष 4.00 लाख
वर्ष- 2021--- पांच वर्ष 5 से 6 लाख

मैं कैसे कर सकती हूं होम बेस्ड वर्क

मोनिका ने अपने कार्यानुभव से बनाया है महिलाओं के लिए सेल्फ टेस्ट। होम बिजनेस से पहले 100 की मार्र्किंग पर कर लें खुद का आकलन -
जज्बा-- अगर आपको कुछ करने का जज्बा है तो मोनिका की तरह आप कोई भी काम कर सकती हैं। जिसमें शिक्षा कभी बाधा नहीं बनती- 20

सीख-- आपके हाथ में जो हुनर है उस काम को पहले करना शुरू करें, सफलता जरूर मिलती है - 15
शुरुआत-- बहुत कम निवेश में अपने घर से ही इस काम की शुरुआत की जा सकती है--20

गुणवत्ता-- काम में गुणवत्ता जरुरी है, क्वालिटी होगी तो काम अपने आप ऑर्डर मिलते रहेंगे-- 20
मार्केटिंग-- परिचितों का दायरा क्या बिजनेस चलाने में मददगार होगा। साथ ही, सोशल मीडिया का भी सहारा ले सकते हैं-- 20