
desi cuisine
भोपाल। जंगल में ग्रामीण पर्यटन का आनंद लेने आने वाले पर्यटक अब यहां अलग-अलग देसी डिसेज का स्वाज भी चख सकेंगे। ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ईको टूरिज्म बोर्ड अब ग्रामीणों को हॉस्पिटैलिटी और रसोई के गुर सीखा रहा है। बोर्ड ने इसके लिए इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटैलिटी ट्रैवल एंड टूरिज्म स्टडीज से करार किया है। पहले फेस में 5 गांवों के 21 ग्रामीणों को यहां 6 दिन की ट्रेनिंग दी गई।
बोर्ड की सीईओ समिता राजौरा ने बताया कि अब ये गांव में आने वाले देसी-विदेशी पर्यटकों के लिए खाना बनाएंगे। इससे ग्रामीणों को रोजगार भी मिलेगा। बोर्ड ने खिवनी अभयारण्य, कुकरु, सापना, कठौतिया, समरधा के ग्रामीणों को 6 दिन का खानसामा ट्रेनिंग दिलाई। उन्हें कठौतिया में ईको-टूरिज्म के अनुभव और कैंपिंग और साहसिक गतिविधियों से रू-ब-रू कराने ले जाया गया।
राजौरा ने बताया, टाइगर रिजर्व में बढ़ते पर्यटन को देखते हुए ग्रामीणों की भागीदारी बढ़ाने की कवायद की जा रही है। पेंच में रुक्खड़ और दूधिया तलाब, बांधवगढ़ में पनपथा, पन्ना में हिनौता और खंडवा में धारीकोटला व भोरियामल में इन्वेस्टर इन पर्यटनों स्थलों पर सुविधाएं विकसित करेंगे। इस पर वे 40 लाख खर्च करेंगे।
गांव आ रहे सैलानी
बोर्ड ने कठौतिया, समरधा साइट विकसित की है। कठौतिया में पर्यटकों से 5 लाख और समरधा में 1 लाख की आय हुई। बोर्ड देवास के खिवनी ईको जंगल कैंप, धार के बाग, ओबेदुल्लागंज के देलावाड़ी, इंदौर के उमरीखेड़ा, सीरोह के अमरगढ़, सलनकपुर, सारू-मारू, टपकेश्वर महादेव, जबलपुर के निदान वाटरफॉल, पन्ना टाइगर रिजर्व के रैने फॉल सहित 16 नई साइट भी तैयार कर रहा है।
Published on:
05 Mar 2023 05:38 pm
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