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भोपाल। अगर आपको सांप काट ले और इलाज के लिए हमीदिया अस्पताल जा रहे हैं तो इसने वाले सांप को भी साथ ले जाना होगा। अगर सांप नहीं है तो उसका फोटो या सही हुलिया डॉक्टरों को बताना होगा, तब सही इलाज हो पाएगा। बात चौंकाने वाली लेकिन सही है।
दरअसल, हमीदिया अस्पताल में कई सालों से टॉक्सिकोलॉजी लैब नहीं है। डॉक्टर सांप को देखकर या मरीजों को आ रहे लक्षणों के आधार पर ही इलाज करते हैं। आम दिनों में जहां सप्ताह में सर्पदंश का एक मामला अस्पताल आता है, वहीं वारिश में ओपीडी में हर रोज दो से अधिक मामले पहुंच रहे हैं।
सांप लाने से हड़कंप मच जाता था
अस्पताल के चिकित्सकों का कहना है कि पहले वार्ड में सांप के कई फोटो लगे होते थे। कई बार मरीज सांप को पकड़ कर ले आते थे। इस सांप को फोटो से मिला कर पहचानते थे और दवा देते थे। लेकिन सांप को लाने से कई बार हड़कंप की स्थिति बन जाती थी, ऐसे में अब सांप लाने को मना कर दिया। मरीज या तो उसका फोटो लाते हैं या फिर लक्षण के आधार पर इलाज करते हैं।
हर जहर के लिए अलग दवा
दरअसल सांप का जहर हीमोटॉक्सिक और न्यूरोटॉक्सिक होते हैं। शरीर में जाने के बाद दोनों जहर के लक्षण अलग होते हैं। सांप काटने की दवा एंटी वेनम सीरम का निर्माण भी सांप के जहर से ही होता है। दोनों जहर के लिए अलग अलग दवा होती है। ऐसे में गलत दवा से मरीज की जान जा सकती है। लैब में जांच से जहर का पता चल जाता है जिससे इलाज करना आसान हो जाता है।
10 लाख से 2009 में हुई थी तैयार
टॉक्सिकोलोजी लैब का निर्माण 2009 में किया गया था। इसके लिए 10 लाख रुपए के पॉलीमर चेन रिएक्शन (पीसीआर) व अन्य उपकरण खरीदे गए थे, लेकिन एक्सपर्ट के रिटायर होने के बाद यह लैब लम्बे समय से बंद पड़ी है। जिसका उपयोग नहीं हो रहा है।
डॉ. लोकेन्द्र दवे, अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल का कहना है कि अब सांप लेकर तो नहीं आते लेकिन लक्षणों के आधार पर इलाज किया जाता है। वैसे लैब होने से सिर्फ सर्पदंश में ही नहीं अन्य मामलों में भी जांच आसान हो होती।
Published on:
20 Aug 2021 07:01 pm
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