
jhinga pond
भोपाल। इस घाट से मिट्टी निकालना तो दूर घास-पेड़ों तक को हटाया नहीं गया है। जबकि जुलाई में इतनी बारिश हुई है कि बड़े तालाब में 8 फीट पानी बढ़ चुका है। ईदगाह हिल्स, कोहेफिजा से आने वाली शीरिन नदीं का पानी यहीं से होकर बड़े तालाब में जाता है।
प्रशासन ने बड़े तालाब को दूषित होने से बचाने व धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए, धार्मिक आयोजन के लिए भदभदा पर प्रेमपुरा घाट, बैरागढ़ में विसर्जन घाट, वीआईपी रोड पर शीरिन घाट का विकास किया था। करबला से लगे इसे घाट पर सीढिय़ों से लेकर बाउंड्री का विकास और पानी भराने वाले इस हिस्सों से मिट्टी दो साल पहले निकाली गई थी। बताया गया कि इस घाट का पूरा विकास के लिए करीब ३० लाख की योजना बनी थी, दस लाख रुपए खर्च भी किए थे,लेकिन उसक ा मेंटेनेंस व सफाई निरंतर नहीं होने से घाट में मिट्टी इतनी ज्यादा हो चुकी है कि उसमें बड़ी-बड़ी घास के साथ पेड़ उग चुके है। जबकि शीरिन नदी तो अब नाला बन चुकी है, उससे साल भर पानी तालाब में आता है। अगर इस घाट को व्यवस्थित कर लिया जाता तो इस घाट में साल भर ही पानी रहता।
इस घाट को धार्मिक आयोजन में विसर्जन घाट के साथ नौकायान के लिए भी तैयार किया गया था। हाल यह है कि यह पानी भराना तो दूर लोग मवेशियों के लिए ट्रालियां भर-भर के घाट काट कर ले जाते है। धार्मिक आयोजन के लिए हाल ही में हुई कलेक्ट्रेड में शांति समिति की बैठक में भी धार्मिक आयोजन के लिए घाट के उपयोग के बात निकली। आयोजन के जिम्मेदारों ने कहां कि पहले घाट तो इस लायक बनाए की उसका उपयोग हो सके।
इनका कहना
-बड़े तालाब को दूषित होने से बचाने के लिए शहर के जिम्मेदार नागरिक भी सहयोग करने को तैयार है,लेकिन धार्मिक आयोजन के लिए अलग से बनाए घाटों का ठीक से प्रशासन विकास करें तो कोई निराकरण हो सके।
-औसाफ शाहमीरी खुर्रम, अध्यक्ष मुस्लिम त्योहार समिति
-घाट के विकास में १० लाख रुपए खर्च भी किए गए है। घाट की सफाई और पानी को यहां रोके रहने की व्यवस्था भी होना है। यहां की सफाई और विकास को लेकर दोबारा काम करने के लिए कहां जा चुका है। अभी आधी बारिश ही हुई है। तालाब के भराने के साथ यहां भी पानी भराएं, साथ ही गाद अलग कर ली जाएगी।
-मनोज राठौर, अध्यक्ष, जोन-२
Published on:
18 Aug 2018 10:19 am
