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बच्चों को सिखाया जल संरक्षण, गर्मी में जल सेवा का संकल्प

वाष्र्णेय समाज की महिला विंग ने की पहल

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बच्चों को सिखाया जल संरक्षण, गर्मी में जल सेवा का संकल्प

भोपाल। जल संरक्षण और पानी के मूल्य के बारे में बच्चों को बताया जा रहा है। इस दिशा में महिलाओं ने पहल की है। वाष्र्णेय समाज की महिला विंग गर्मियों में जल सेवा कर रही है। उनका खास काम जल सेवा के साथ नई पीढ़ी के बच्चों को जल संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। समिति की अपूर्वा गोटेवाल बताती हैं कि यदि बच्चों को जल संरक्षण के प्रति ठीक से समझाया जाए तो तस्वीर बदल सकती है। बच्चे बड़ों से अधिक गंभीरता से काम करते हैं।

इस बार की गर्मी में यात्रियों, राहगीरों व गरीब बस्तियों के लोगों के लिए जल सेवा करने का संकल्प समिति की ममता वाष्र्णेय, अपूर्वा, अंजलि, शशि, वंदना, ममता गुप्ता, एसपी गुप्ता, अशोक, राजीव गुप्ता आदि लोगों ने लिया है। इसी क्रम में उन्होंने 22 मई 2018 को वाष्र्णेय समाज के द्वारा आईएसबीटी पर जल सेवा प्रोग्राम रखा गया, जिसके तहत महिलाओं ने राहगीरों को जल पिलाया। पक्षियों के लिए सकोरे और गायों के लिए पानी की व्यवस्था भी महिला समिति कर रही है।

इसके सिवा गरीब बस्तियों में मटके/सुराही बांटे जा रहे हैं, जिससे गरीब लोग भी ठंडा पानी पी सकें। बच्चों को बताया जा रहा है कि कम पानी से कैसे नहाएं। कम पानी का प्रयोग करते हुए कैसे स्वच्छ रहें, कहीं खुला नल देखें तो तुरंत बंद कर दें। 21 जून को भी महिला समिति बच्चों के लिए किताबें, स्टेशनरी, बैग, वाटर बॉटल आदि वितरित की जाएंगी। इसके सिवा जल व पर्यावरण संरक्षण के लिए लगातार आयोजन किए जाने हैं।

बिल जमा करने में हो रही परेशानी

बिजली बिल जमा करना मुसीबत बन गया है। रेतघाट पर एटीपी मशीन के पास गंदगी के ढेर लगे हैं। कुछ उपभोक्ताओं ने बताया कि यहां खड़े रहना मुश्किल हो रहा है। पास ही दीवार के पास गंदगी इतनी है कि बदबू फैल रही है।

तत्काल सहायता में प्रभावी उपाय बन सकती है 'बोट एम्बुलेंस'

मछुआरों के लिए गुजरात में दो नावों के साथ बोट एम्बुलेंस शुरू की गई है। निकट भविष्य में 10 और बोट एम्बुलेंस सेवाएं अपतटीय लोगों के लिए उपलब्ध होंगी। गुजरात में 1600 किलोमीटर लंबी तट रेखा है और राज्य की अधिक बड़ी आबादी मछली पकडऩे और संबंधित गतिविधियों पर निर्भर करती है।

गौरतलब है कि कुछ मामलों में परिवहन का सबसे आसान तरीका जलमार्ग है और आपात स्थिति के मामले में बोट एम्बुलेंस प्रभावी रूप से उन रोगियों का प्रभावी ढंग से और त्वरित रूप से परिवहन कर सकती हैं, जिनके लिए तत्काल चिकित्सा सहायता की आवश्यकता होती है। 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की आबादी का आठ फीसद जनजातीय है और दूरस्थ इलाकों में रहता है, नाव एम्बुलेंस सेवाएं सक्रिय रूप से इन निवासियों को समय पर चिकित्सा सेवाओं तक पहुंचने में सहायता कर सकती हैं।

भारत में 111 राष्ट्रीयकृत जलमार्ग (एनडब्ल्यू) हैं, जिन्हें संभावित अंतर्देशीय जल परिवहन के लिए नामित किया गया है और एनडब्ल्यू 1, 2 और 3 के लिए पहले से ही परिचालित हंै। नेटवर्क लगभग 20,275 किलोमीटर तक कवर करता है और अगर बोट-एम्बुलेंस जैसी सेवाएं उपलब्ध हों तो आबादी का एक बड़ा हिस्सा इसका लाभ उठा सकता है।