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नर्मदा के गिरे जल स्तर ने बढ़ाई चिंता, बरगी बांध से हो रही राजधानी की पूर्ती

नर्मदा के जलस्तर में इतनी तेजी से गिरावट साल 2011 में आई थी। लेकिन इस बार जल स्तर गिरने की गति ज्यादा तेज देखी जा रही है

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narmada water level

भोपालः मध्य प्रर्देश के कई जिलों समेत राजधानी में भी भिषण गर्मी का असर देखा जा रहा है। अप्रेल महीने के शुरुआती दिनो से ही दिन के समय यहां तापमान 40 डिग्री के पार होना आम बात है। साथ ही यहां पिछले साल हुई औसत से कम बारिश का असर भी दिखने लगा है। यानि शहर का जल स्त्रोत माने जाने वाले बड़े तालाब और कोलार डेम का जलस्तर गर्मी के शुरुआती दिनों में ही घटने लगा है। साथ ही, शहर में पानी की पूर्ती का एक बड़ा स्त्रोत मानी जाने वाली नर्मदा नदी का जल स्तर भी काफी तेजी से नीचे खिसक रहा है। नर्मदा के जलस्तर में इतनी तेजी से गिरावट साल 2011 में आई थी। लेकिन इस बार जल स्तर गिरने की गति ज्यादा तेज देखी जा रही है। संभवतः पहली बार होशंगाबाद के निगम इंटकवेल का जल स्तर डेढ़ मीटर नीचे जा पहुंचा है। जिसका हल निकालते हुए निगम ने आनन फानन में बरगी बांध से पानी छोड़ा, तब कहीं जाकर जल स्तर में सुधार आया। हालांकि, जब भी इस बांध से पानी मिलना बंद होगा, तभी से सप्लाई प्रभावित होना शुरु हो जाएगी।

15 दिन खिसका दो फुट पानी

नर्मदा के जल स्तर की बात करें तो, ये 15 दिन पहले 936 फिट से खिसकर कर 934 फिट पहुंच चुकी है। अगर पानी का जल स्तर इससे ज्यादा नीचे जाता है, तो इंटकवेल से निगम को पानी लेना मुश्किल हो जाएगा, लेकिन बरगी बांध परियोजना ने 21 अप्रैल से रोजाना चार-चार घंटे पानी छोड़ना शुरू कर दिया है। रोजाना बांध से 9 लाख मिलियन घन मीटर पानी छोड़ा जा रहा है। नर्मदा परियोजना से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि अब पानी छोड़ने का समय चार घंटे से बढ़ाकर 8 घंटे करने की मांग उठ रही है, अगर ऐसा नहीं होता तो, पानी को नदी से शहर में सप्लाई देना मुश्किल हो सकता है। फिलहाल, नर्मदा से रोजाना चार पंपों के जरिए निगम प्रशासन 170 से 180 एमएलडी (मिलियन ऑफ लीटर पर-डे) यानि करीब 40 एमजीडी पानी ले रहा है। इससे ज्यादा पानी लिया भी नहीं जा सकता। तब जाकर शहर की पानी की पूर्ती हो पाती है। अगर जल स्तर में ओर भी कमी आई तो कटौती होना तय है।

शहर के इन इलाको पर पड़ेगा असर

अगर बात की जाए नर्मदा से जल सप्लाई की तो, इससे शहर की होशंगाबाद रोड से लगी कॉलोनियां, भेल का इलाका, अशोका गार्डन, सेमरा, गैस राहत की बस्तियां समेत नरेला विधानसभा में आने वाले एरिया की सप्लाई प्रभावित हो सकती है। हालांकि, जब तक बरगी बांध से नियमित रूप से पानी मिलता रहेगा, तब तक हालात सामान्य रहेंगे, लेकिन जब भी इस बांध के जल स्तर में गिरावट आएगी तो, शहर के एक बड़े हिस्से के सामने पानी की समस्या खड़ी हो जाएगी। आपको बता दें कि, ऊपर दिए गए इलाकों के अलावा शहर में पानी की पूर्ती कोलार और बड़े तालाब से की जाती है।

शहर में पानी पहुंचाने का ये है तरीका

शाहगंज स्थित पहले इंटकवेल से रॉ वाटर खटपुरा प्लांट में पंपिंग के माध्यम से लाया जाता है, जहां ट्रीटमेंट के बाद हिरानी पहुंचाया जाता है। फिर यहां से अहमदपुर प्लांट आता है। ये तीनों स्थानों पर पंपिंग की जाती है। आखिर में बिड़ला मंदिर के पास प्लांट में पानी लाया जाता है जहां से ग्रेवटी के माध्यम से करीब आठ लाख आबादी को पानी सप्लाई होता है। कुल 70 किलोमीटर की दूरी तय करने के बाद नर्मदा जल भोपाल पहुंचता है।

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