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सेरेब्रल पाल्सी से हर 345 में से एक बच्चा पीड़ित, जानिए क्या होती है यह बीमारी

Cerebral palsy in Hindi- एम्स भोपाल में सेरेब्रल पाल्सी जागरूकता सप्ताह...।

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भोपाल

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Manish Geete

Oct 04, 2022

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सेरेब्रल पाल्सी

भोपाल। सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy) बचपन में विकलांगता का एक सामान्य कारण है। सीडीसी के ऑटिज्म एंड डेवलपमेंटल डिसएबिलिटी मॉनिटरिंग (एडीडीएम) नेटवर्क के अनुमानों के अनुसार 345 में से लगभग 1 बच्चे को सीपी के साथ पहचाना गया है। लड़कियों की तुलना में लड़कों में सीपी अधिक आम है। इसी को देखते हुए, सीपी के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए एम्स का पीएमआर विभाग 3 से 8 अक्टूबर तक सेरेब्रल पाल्सी जागरूकता सप्ताह मना रहा है।

एम्स के निदेशक प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा कि इसके विकार का उनके जीवन में विशेष महत्व है। उन्होंने केजीएमयू, लखनऊ में (cp) रोग से ग्रस्त बच्चों के लिए एक विशेष क्लिनिक शुरू किया था। उन्होंने कहा कि अन्य विभागों को पीएमआर विभाग के साथ सहयोग करना चाहिए और इन बच्चों को उनकी अधिकतम कार्यात्मक क्षमता के पुनर्वास के लिए प्रयास करना चाहिए।

क्या होती है सेरेबल पाल्सी (what is cerebral palsy)

सेरेब्रल पाल्सी बच्चों में मस्तिष्क और मांसपेशियों से जुड़ी समस्या है। यह तीन साल से अधिक उम्र के एक हजार बच्चों में से 2-3 बच्चों में हो सकती है। एक सर्वे के मुताबिक भारत में करीब पांच लाख बच्चे और व्यस्त इस बीमारी से जूझ रहे हैं। यह बीमारी मस्तिष्क में चोट लगने के कारण होती है। यह संक्रामक बीमारी नहीं है। न ही इसके लक्षण बढ़ते हैं और बिगड़ते हैं। यह बस सभी बच्चों में अलग अलग हो सकते हैं।

सेरेब्रल पाल्सी के कारण (due to cerebral palsy)

डॉक्टर्स मानते हैं कि सेरेब्रल पाल्सी होने का मुख्य कारण गर्भाशय में बच्चे को ऑक्सीजन की सही मात्रा न मिलने से ऐसा होता है। जबकि नए शोध बताते हैं कि बहुत कम ऐसे मामले आते हैं। जिनमें बच्चे को ऑक्सीजन न मिलने से उन्हें सेरेब्रल पाल्सी की समस्या है।

सेरेब्रल पाल्सी का इलाज (treatment of cerebral palsy)

सेरेब्रल पाल्सी के बच्चे पूरी तरह से ठीक नहीं हो सकते लेकिन इसके इलाज के कई तरीके बच्चे का विकास जरूर करते हैं। मांसपेशियों से संबंधित सर्जरी, टेंडन रिलीज, हिप डिस्लोकेशन अथवा स्कोलियोसिस इत्यादि कई मामलों में बच्चों के लिए सहायक हो सकती हैं। थेरेपी जैसे एक्वा, म्यूजिक, बिहेवियरल, फिजिकल और बॉवेल आदि बच्चों की कमजोरी को कम करने में सहायक होते हैं।