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लघु वनोपज संघ ने क्यों लौटाया तेंदूपत्ता संग्राहकों को मच्छरदानी देने का प्रस्ताव

लघु वनोपज संघ ने क्यों लौटाया तेंदूपत्ता संग्राहकों को मच्छरदानी देने का प्रस्ताव
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- प्रबंध संचालक ने कहा- वन समितियां तय करें क्या करना है
भोपाल. तेंदूपत्ता संग्राहक आदिवासियों को जूते-चप्पल बांटने से उठे विवाद के बाद वन विभाग के कई डीएफओ ने सिफारिश की है कि इन्हें मलेरिया से बचाने के लिए बोनस की राशि से मच्छरदानी दी जाएं। तत्कालीन भाजपा सरकार की नाराजगी और जांच से घिरे लघु वनोपज संघ ने फिलहाल यह प्रस्ताव लौटा दिया है। संघ के प्रबंध संचालक एसके मंडल ने कहा कि संग्राहकों को मच्छरदानी चाहिए अथवा कुछ और सामान की जरूरत है, इसका निर्धारण वन समितियों को करने दें। समितियों के प्रस्ताव आने के बाद ही संग्राहकों को सामान बांटने पर विचार किया जा सकेगा।
प्रदेश के तेंदूपत्ता संग्राहकों को हर साल करीब 300 करोड़ रुपए बोनस दिया जाता है। पिछले साल बोनस की राशि दी गई थी। इससे पहले तत्कालीन भाजपा सरकार ने जूते-चप्पल, साड़ी और पानी की बॉटल बांटी थी, जिस पर भारी विवाद हुआ था। इस बार प्रबंध संचालक ने कहा है कि समितियों के खाते में बोनस की राशि ट्रांसफर की जाएगी। किसी भी सामान की खरीदी यहां से नहीं होगी।

- हर साल 100 करोड़ मिलता है ब्याज
लघु वनोजन संघ के खाते में समितियों के 1300 करोड़ रुपए जमा हैं। इसका हर साल करीब 100 करोड़ रुपए ब्याज मिलता है। इस राशि को भी समितियों को बोनस के साथ बांटा जाता है। गौरतलब है कि तेंदूपत्ता संग्रहण से लाभांश की 70 फीसदी राशि लघु वनोपज संघ संग्राहकों को बांट देता है। जबकि 30 फीसदी राशि संघ अपने पास रख लेता है, इसमें से अध्यक्षीय कोटा, स्थापना व्यय और वनों के विकास पर राशि खर्च की जाती है। संघ ने दो टूक कह दिया कि वन समितियों के खातों में पैसा दिया जाएगा। इसके बाद समितियों को तय करना है कि वे इस पैसे का क्या इस्तेमाल करना चाहती हैं। संघ के इस जवाब से डीएफओ का प्रस्ताव रद्द हो गया।

तेंदूपत्ता संग्राहकों को मच्छरदानी बांटने के प्रस्ताव कई डीएफओ ने संघ के पास भेजा है। इस प्रस्ताव को वापस कर दिया गया है।
- एसके मंडल, प्रबंध संचालक, लघु वनोपज संघ