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पत्नी की ‘किडनी’ से आगे का जीवन जिएगा पति, 2 साल से था परेशान

MP News: मरीज को दो साल पहले किडनी की बीमारी का पता चला था और बीते छह महीने से वह डायलिसिस पर थे।

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फोटो सोर्स: पत्रिका

फोटो सोर्स: पत्रिका

MP News: गांधी मेडिकल कॉलेज में मध्य प्रदेश का पहला एबीओआइ (असंगत ब्लड ग्रुप वाला) किडनी ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक किया गया। खास बात यह रही कि ओ ब्लड ग्रुप वाले मरीज को बी ग्रुप की किडनी लगाई गई। यह उपलब्धि किसी सरकारी अस्पताल ने पहली बार हासिल की है। एक 43 वर्षीय मरीज को यह किडनी उनकी पत्नी (41) ने दान की है।

मरीज को दो साल पहले किडनी की बीमारी का पता चला था और बीते छह महीने से वह डायलिसिस पर थे। जब डॉक्टरों ने ट्रांसप्लांट की सलाह दी, तो केवल पत्नी ही डोनर के रूप में उपलब्ध थीं, लेकिन ब्लड ग्रुप नहीं मिलने के कारण मामला अटक रहा था।

20 से अधिक डॉक्टरों ने किया ऑपरेशन

जीएमसी की ट्रांसप्लांट टीम ने पहली बार एबीओआइ तकनीक से ट्रांसप्लांट की योजना बनाई। पत्नी की किडनी लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से निकाली गई, जिससे उनका रिकवरी टाइम भी कम रहा। इस पूरी प्रक्रिया में डीन डॉ. कविता सिंह और अधीक्षक डॉ. सुनित टंडन का विशेष योगदान रहा। वहीं, ट्रांसप्लांट टीम में शामिल डॉक्टर सौरभ जैन, अमित जैन, समीर व्यास, हिमांशु शर्मा, आर.आर. बर्डे और निश्चेतना विशेषज्ञ डॉ. आरपी कौशल समेत 20 से अधिक डॉक्टरों ने मिलकर इस जटिल ऑपरेशन को अंजाम दिया।

आयुष्मान योजना के तहत इलाज

यह ऑपरेशन आयुष्मान भारत योजना के तहत किया गया, जिससे मरीज को आर्थिक बोझ नहीं झेलना पड़ा। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि योजना से बाहर आने वाले मरीजों को भी यह सुविधा मामूली शुल्क पर दी जाएगी।