
महिलाओं के लिए अच्छी खबर
भोपाल. मध्यप्रदेश में महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। प्रदेश में सवा 2 हजार राशन दुकानों का संचालन अब महिला स्व सहायता समूहों को सौंपा जा रहा है। इसके लिए सहकारिता विभाग ने खाद्य, नागरिक आपूर्ति विभाग को प्रस्ताव दिया है। इससे जहां राशन वितरण के काम में गड़बड़ियों पर अंकुश लगेगा वहीं स्व-सहायता समूहों की महिलाओं को नया रोजगार भी मिलेगा। गौरतलब है कि सरकारी उचित मूल्य की इन राशन दुकान के संचालन के लिए सवा आठ हजार रुपये मिलते हैं।
दरअसल सहकारिता विभाग उन सवा दो हजार दुकानों को छोड़ने पर सहमत हो गया है, जिनमें सेल्समैन नहीं हैं। अब खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग इन दुकानों का संचालन महिला स्व सहायता समूहों से करवाएगा।
सहकारिता विभाग के अधिकारियों के अनुसार राशन दुकान के संचालन के लिए प्रदेश का खाद्य व नागरिक आपूर्ति विभाग कुल सवा आठ हजार रुपये प्रतिमाह देता है। इसमें छह हजार रुपये सेल्समैन का मानदेय रहता है और शेष सवा दो हजार रुपये दुकान के संचालन के लिए मिलते हैं।
प्रदेश में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत 23 हजार उचित मूल्य की राशन दुकानें चलाई जा रहीं हैं. यहां से कुल एक करोड़ 11 लाख परिवारों को प्रतिमाह एक रुपये की दर से गेहूं, चावल और नमक का वितरण किया जाता है। इनमें से 16 हजार 331 राशन दुकानें प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियां संचालित करती हैं। इनमें सवा 2हजार दुकानों में सेल्समैन नहीं हैं जिसकी कारण दूसरी दुकानों के सेल्समैनों से खाद्यान्न वितरण कराया जा रहा है। समय पर सेल्समैन के न आने से उपभोक्ताओं को परेशानी हो रही है। सहकारिता विभाग ने ऐसी कुल दो हजार 100 दुकानें चिन्हित कर ली हैं। इन्हें महिला स्व-सहायता समूहों को सौंपा जाएगा.
उचित मूल्य की इन दुकानों को सिर्फ खाद्यान्न् वितरण तक सीमित नहीं रखा जाएगा। बल्कि इन्हें बहुद्देश्यीय दुकानों में परिवर्तित किया जा रहा है। इसमें उपभोक्ता उपयोग की अन्य वस्तुएं और रोजमर्रा के उपयोग की चीजें भी रखी जाएंगी। इससे समिति और स्व सहायता समूह की आमदनी बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को भी एक स्थान पर वस्तुएं मिल जाएंगी।
Published on:
17 Apr 2022 08:58 pm
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