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World Heart Day 2022: अलसुबह रहते हैं हार्ट अटैक के ज्यादा चांस, ठंड में ऐसे रखें अपने दिल का ख्याल

अनियमित जीवन शैली ने हार्ट में ब्लॉकेज की समस्या का खतरा बढ़ाया है। शहर की हार्ट स्पेशलिस्ट माधुरी नागौरी आपको बता रही हैं इस समस्या से निजात पाने के लिए सात जरूरी काम

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भोपाल। अब तक आम धारणा थी कि हार्ट अटैक बुढ़ापे का रोग है। लेकिन पिछले कुछ सालों में हार्ट अटैक का रूप बदला है और यह युवाओं को भी अपनी चपेट में लेने लगा है। अनियमित जीवन शैली और खान-पान के साथ ही कुछ बुरी आदतें दिल का दर्द बढ़ा रही हैं। ठंड के दिनों में दिल के इस दर्द का खतरा काफी बढ़ जाता है।

दरअसल ठंड बढऩे के साथ ही दिल को अटैक का खतरा हो रहा है। डायबिटीज, उच्च रक्तचाप और मोटापे से पीडि़त लोगों को सबसे अधिक ख्याल रखने की जरूरत है। इनमें सबसे अधिक उन लोगों को ध्यान रखने की जरूरत है जो कोरोना से ठीक हुए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि ठंड बढऩे के साथ ही धमनियां सिकुड़ जाती है। इससे दिल में रक्त प्रवाह प्रभावित होता है। इसी वजह से दिल की परेशानी शुरू हो जाती है।

हार्ट स्पेशियलिस्ट माधुरी नागौरी कहती हैं कि हार्ट अटैक में उम्र का कोई रोल नहीं है। यह सही है कि ज्यादातर केसों में 50-60 साल पार कर चुके लोगों को हार्ट अटैक आता है, लेकिन यह किसी भी उम्र के लोगों को हो सकता है। पहले मेडिकल सुविधाएं ज्यादा नहीं थीं। इसलिए कह देते थे कि थोड़ा सा कमर, छाती या बाजू में दर्द हुआ और मौत हो गई। अब हम ईसीजी, इको, टीएमटी, होल्टर, एंजियोग्राफी, एंजियोप्लास्टी, पेसमेकर जैसी आधुनिक मेडिकल सुविधाओं से बीमारी को तुरंत पकड़ लेते हैं और मरीज को समय पर इलाज मिल जाता है।

हार्ट में ब्लॉकेज होने के कई कारण हैं
वे कहती हैं कि हार्ट की नसें ब्लॉक होने के कई कारण हैं। इनमें पहला बड़ा कारण वंशानुगत माना जाता है। इसलिए जिन लोगों को पीढ़ीगत यह समस्या हो, उन्हें सबसे ज्यादा जोखिम रहता है। दूसरा बड़ा कारण बीड़ी, सिगरेट व हुक्का करना इसका बड़ा कारण है। इनका धुआं नसों के अंदर जमता रहता है, जिससे खून बहने के लिए जगह कम होती जाती है और नसें ब्लॉक हो जाती हैं। शारीरिक व्यायाम न करने और सही डाइट लेने के कारण भी हार्ट अटैक के केस बढ़ रहे हैं।

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सर्दियों में ऐसे रखें दिल का ख्याल
स्पेशियलिस्ट प्रो. डॉ. राजीव गुप्ता कहते हैं कि ठंड में नसें सिकुड़ जाती हैं। व्यायाम न करने से नसों में ऐंठन व सिकुडऩ ज्यादा बढ़ती है। इसलिए हर रोज सुबह के समय कम से कम आधा घंटा वर्कआउट जरूर करें। सर्दियों में ठंडी चीजें खाने से बचना है। सलाद व फलों का ज्यादा सेवन करना है। दाल व दही का सेवन ज्यादा करना है। अंडा भी खा सकते हैं। पानी या दूध को गर्म करके पीना है।

अलसुबह नसें सिकुडऩे से अटैक के ज्यादा चांस

वे बताते हैं किहार्ट अटैक आने से पहले शरीर किस तरह प्रतिक्रिया देता है, इस बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी नहीं है। हार्ट अटैक में अचानक छाती में दर्द होगा। यह दर्द कलेजे से लेकर गले तक छाती में दोनों तरफ कहीं भी हो सकता है। बाजुओं में भी दर्द हो सकता है। यह दर्द कमर में नहीं होगा। जब नसें ब्लॉक होना शुरू होती हैं तो उसके शुरुआती लक्षणों में तेज चलने-फिरने में व सीढ़ी चढऩे में सांस फूलने की समस्या होती है। चलते-चलते बैठना पड़ता है। हाथों में भी दर्द हो सकता है। ठंड के दिनों में अलसुबह नसें सिकुडऩे से अटैक के चांस ज्यादा होते हैं। हाई कोलेस्ट्रोल से भी अटैक आ सकता है। मोटापा भी हार्ट अटैक होने का कारण है। मोटे लोगों की नसें जल्दी ब्लॉक होती हैं।

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हार्ट अटैक व नसों ब्लाक होने से ऐसे बचें
हार्ट अटैक होने व नसें ब्लॉक होने से बचने के लिए लोगों को अपने खानपान व व्यवहार में बदलाव करना होगा। मोटे व्यक्तियों को वजन कम करने का प्रयास करना चाहिए। रोज आधा से एक घंटा तक पैदल चलना व व्यायाम करना चाहिए। बीड़ी, सिगरेट सहित सभी तरह के धूम्रपान पूरी तरह छोड़ देने है। फास्ट फूड या डिब्बा बंद खाद्य पदार्थ छोड़कर घर का बना खाना खाएं। फल व सब्जियां ज्यादा लेनी हैं। हाई कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें जैसे बर्गर, समोसा, कचोरी को कम खाना है। शुगर है तो उसे कंट्रोल करना होगा। जिसकी फैमिली में हार्ट अटैक की हिस्ट्री है तो उसको शुरू से इन सभी चीजों पर ध्यान देना होगा। बीपी है तो उसकी दवाएं लगातार लेनी होंगी। कई स्टडी में बताया गया है कि घी का सेवन भी कम करना चाहिए।

20 साल में ऐसे बदली यूथ की लाइफ स्टाइल

डॉ. माधुरी बताती हैं कि युवाओं की लाइफ स्टाइल पिछले 20 साल में लगभग पूरी तरह से बदल चुकी है। वे बताती हैं कि वर्ष 2002 में शहरों में एक भी पिज्जा व बर्गर की दुकान नहीं होती थी। रेस्टोरेंट तक गिनती के होते थे। यूथ को ज्यादातर पैदल चलते घूमते देखा जा सकता था। किसी के पास फोन नहीं होता था। होटल के बजाय यूथ मैस में खाना खाना पसंद करते थे। खेलकूद भी हो जाता था। इससे पूरा व्यायाम हो जाता था। अब ये सभी काम बंद हो गए हैं। अब सबके कमरों में टीवी, लैपटॉप है। खाने के लिए ऑर्डर पर पिज्जा आ जाता है। ज्यादातर यूथ बाइक यूज कर रहा है। कुछ कार से कॉलेज या ऑफिस जाते हैं। आराम की जिंदगी हो गई है। इसी कारण कई तरह की बीमारियां बढ़ रही हैं। अब कोई पांच मिनट के लिए भी पैदल नहीं चलना चाहता। थोड़ी सी दूर जाना हो तो भी बाइक या कार का यूज किया जा रहा है।

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हार्ट अटैक में सावधानी ही सबसे बड़ा इलाज

हार्ट अटैक से बचने के लिए सावधानी ही सबसे बड़ा इलाज है। समय पर चेकअप कराते रहें। 30 साल के बाद साल-दो साल में एक बार ईसीजी, हीमोग्लोबिन, किडनी फंक्शन टेस्ट, शुगर, कोलेस्ट्राल का टेस्ट जरूर करवाना चाहिए। जिनकी फैमिली हिस्ट्री स्ट्रांग है, उन्हें तो यह टेस्ट जरूर करवाने ही चाहिए। शुगर पीडि़त को हर साल टेस्ट करवाने चाहिए। छाती में दर्द होने पर डॉक्टर के पास जरूर जाना चाहिए। शुगर पीडि़त को कई बार दर्द नहीं होता, उनका सांस फूलेगा और घबराहट बढ़ेगी। महिलाओं में जी मिचलाने की समस्या या उलटी आ सकती है।

करें ये 7 काम