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इस चीज से जुड़ा है आपकी मौत का राज! जानकर आप भी रह जाएंगे हैरान

सामुद्रिक-शास्‍त्र के अनुसार भी...

भोपाल

Published: June 07, 2019 01:47:59 pm

भोपाल। लंबे समय से इंसान लगातार अपनी मौत के राज को जानने के लिए प्रयासरत रहा है। लेकिन मौत है कि अब तक सुलझ ही नहीं पाई है, जैसे मृत्यु के बाद इंसान कहां जाता है, या इसके बाद क्या होता है।

Death Suspense

यहां तक की हम आज तक मौत का सटीक कारण तक नहीं ढ़ूढ़ सके हैं। लेकिन हाल में हुई एक रिसर्च ने कुछ ऐसे दावे किए हैं जो मौत के पास आने की कुछ हद तक चीजें साफ सी करते दिखते हैं।

दरअसल कुछ समय पहले ही हुए अमेरिका में किए गए एक शोध में दावा किया गया है कि इंसानों की मौत का राज उसकी सूंघने की क्षमता से जुड़ा है।

life

शोध के अनुसार सूंघ पाने की शक्ति में कमी गंभीर सेहत संबंधी समस्या की ओर इशारा करती है। इस शोध में दावा किया गया है कि ऐसे लोग जिनमें कुछ खास चीजों को सूंघने में दिक्कत आती है, उनके अगले 5 सालों के अंदर मरने का खतरा ज्यादा होता है।

यह खतरा उन लोगों के मुकाबले 19 प्रतिशत ज्यादा होता है जो ठीक-ठाक गुलाब, पिपरमिंट और संतरे की खुशबू सूंघ लेते हैं, वहीं जिनकी सूंघने की शक्ति सबसे बेहतर होती है उनमें यह खतरा सबसे कम होता है।

Life Suspense

इसके अलावा आपने कई बार बुजुर्गों से भी सुना होगा वे किसी श्वान की मौत के बारे में पहले से बताने लगते हैं, दरअसल जानकारों का कहना है कि सबसे तेज सूंघने की क्षमता श्वान में होती है, लेकिन जब ये कम होनी शुरू हो जाती है तो माना जाता है कि वो अब ज्यादा दिन तक जीवित नहीं रहेगा।

कुछ इसी प्रकार की स्थिति शायद इंसान के साथ भी होती है, लेकिन उसकी सूंघने की क्षमता काफी अधिक नहीं होने से इस संबंध में ज्यादा पता नहीं चलता है।

वहीं सामुद्रिक-शास्‍त्र के अनुसार भी नासिका शरीर का एक ऐसा यन्त्र है, जिसमें गजब की सूंघने की क्षमता होती है। हम नासिका के द्वारा के खुशुबू व बदबू का पता कर लेते हैं।

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जानकारों के अनुसार रेखायें सिर्फ हाथों में ही नहीं बल्कि मस्तक पर भी होती हैं, लेकिन सूंघने की क्षमता केवल नाक के पास होती है। जो हमारे व्यक्तित्व से लेकर भविष्य तक के बारे में काफी कुछ बताती है, तभी तो कई भारतीय शास्त्रों में नासिका को लेकर कई बातें कहीं गई हैं।


ये है शोध में...
भले ही यह सूंघने की क्षमता वाली बात आपको थोड़ी सी अटपटी जरूर लग रही हो, लेकिन शोधकर्ताओं ने अपनी एक रिसर्च में पता लगाया है कि जिन बुजुर्ग लोगों के सूंघने की क्षमता 50 फीसदी से ज्यादा खराब है, वे 10 साल से ज्यादा जीवित नहीं रहेंगे, यानी 10 साल के अंदर ही उनकी मौत हो सकती है।

शोध में सामने आए तथ्यों को मेडिकल से जुड़ी पत्रिका एनल्स आफ इंटरनल मेडिसिन में प्रकाशित किया गया है। जिसके अनुसार शोध के दौरान पाया गया कि जिन बुजुर्ग लोगों की सूंघने की क्षमता 46 प्रतीशत तक खराब थी, उनके 10 साल तक जीवित रहने की संभावना बताई गई।

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Amit shah ka bhagya

वहीं, जिनके सूंघने की क्षमता 30 फीसदी तक ही खराब थी, उनके जीवित रहने की संभावना 13 साल तक बताई गई।

वहीं इस शोध से जुड़े प्रोफेसर होन्गलेई चेन का कहना है कि बुजुर्ग लोगों में सूंघने की क्षमता में कमी आना बहुत ही सामान्य है, और इसका संबंध मौत से है। इस शोध में सबसे पहले उन संभावित कारणों पर ध्यान देना था, जिनसे मौत की अत्यधिक आशंका जताई गई।

प्रोफेसर चेन और उनकी टीम ने अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग के आंकड़ों का इस्तेमाल शोध में किया। शोध के दौरान उन्होंने लगभग 2300 लोगों के स्वास्थ्य आंकड़ों की समीक्षा की, जिनकी उम्र 71 वर्ष से 82 वर्ष के बीच थी। इसमें महिला और पुरुष दोनों शामिल थे।

शोधकर्ताओं ने उन लोगों को सूंघने की क्षमता के आधार पर अच्छे, सामान्य और खराब की तीन श्रेणियों में रखा था। उन लोगों को 12 तरह के गंध सूंघने को दिए गए थे।

प्रोफेसर चेन के अनुसार यदि किसी को सूंघने में दिक्कत आ रही है तो उसे किसी डॉक्टर से परामर्श लेनी चाहिए। इस शोध से पता चलता है कि अगर किसी बुजुर्ग की सूंघने क्षमता प्रभावित होती है तो उसे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।


ये भी होती हैं समस्याएं...

: माइग्रेन : अगर आपको अक्सर ऐसी चीजों की गंध महसूस होती है जो आपके आस-पास हो ही नहीं तो यह माइग्रेन का पूर्व संकेत होता है। एक रिसर्च में इस बात का खुलासा किया गया है। शोध में कहा गया है कि काल्पनिक गंध माइग्रेन होने के लक्षणों में से एक होता है।

: अल्जाइमर : हावर्ड मेडिकल स्कूल के एक शोध में इस बात का दावा किया गया है कि सूंघने में दिक्कत अल्जाइमर का शुरुआती संकेत हो सकता है। शोध में कहा गया है कि जिन लोगों में एमिलॉइड प्लाक्स की उच्च मात्रा पाई जाती है ऐसे लोगों की सूंघने की शक्ति काफी कमजोर होती है। एमिलॉइड प्लाक्स एक तरह का प्रोटीन है जो अल्जाइमर के रोगियों के दिमाग में पाया जाता है।

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