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अयोध्या से पहले ओडिशा में दीप जलाकर मनेगा जश्‍न

अयोध्या से पहले ओडिशा में दीप जलाकर जश्‍न मनाया जाएगा। पुरी हेरिटेज कॉरिडोर परियोजना के उद्घाटन की भव्य तैयारी की गई है। राज्य सरकार ने 12वीं सदी के विश्व प्रसिद्ध मंदिर का पूरी तरह से कायापलट कर दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की महत्वाकांक्षी परियोजना अब विशाल, बहुरंगी पेड़ के रूप में विकसित हो गई है। जिसे श्रीमंदिर हेरिटेज कॉरिडोर प्रोजेक्ट कहा जाता है। मुख्यमंत्री स्वयं इसे प्रभु की इच्छा मानते हैं।

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अयोध्या से पहले ओडिशा में दीप जलाकर मनेगा जश्‍न

अयोध्या से पहले ओडिशा में दीप जलाकर मनेगा जश्‍न

पुरी हेरिटेज कॉरिडोर परियोजना के उद्घाटन की भव्य तैयारी
सभी ओडिया लोगों के लिए उत्सव का दिनः सीएम नवीन पटनायक
अयोध्या से पहले ओडिशा में दीप जलाकर जश्‍न मनाया जाएगा। पुरी हेरिटेज कॉरिडोर परियोजना के उद्घाटन की भव्य तैयारी की गई है। राज्य सरकार ने 12वीं सदी के विश्व प्रसिद्ध मंदिर का पूरी तरह से कायापलट कर दिया है। राज्य के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक की महत्वाकांक्षी परियोजना अब विशाल, बहुरंगी पेड़ के रूप में विकसित हो गई है। जिसे श्रीमंदिर हेरिटेज कॉरिडोर प्रोजेक्ट कहा जाता है। मुख्यमंत्री स्वयं इसे प्रभु की इच्छा मानते हैं। मुख्यमंत्री के करीबी सलाहकार वीके पांडियन ने इस परियोजना को पूरा करने में अद्भुत प्रतिबद्धता, ईमानदारी और समर्पण का परिचय दिया। मुख्यमंत्री ने राज्य के लोगों से आग्रह किया कि वे अपने घरों में मिट्टी के दीपक जलाकर और शंख बजाकर पुरी में जगन्नाथ मंदिर हेरिटेज कॉरिडोर परियोजना के उद्घाटन का जश्‍न मनाएं। दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं ने इसे सत्तारूढ़ पार्टी का कार्यक्रम बनाने के लिए सरकार की आलोचना की है। कांग्रेस नेता बिजय पटनायक ने खाद्य ब्लॉगर कामिया जानी का मुद्दा उठाया।
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- दावा, विकास का ऐसा कार्य पिछले 700 वर्षों के दौरान कभी नहीं किया गया
पटनायक ने वीडियो संदेश में कहा कि गजपति महाराजा दिब्यसिंघा देब के शब्दों में श्री मंदिर (जगन्नाथ मंदिर) के लिए विकास का ऐसा कार्य पिछले 700 वर्षों के दौरान कभी नहीं किया गया है। यह सभी ओडिया लोगों के लिए उत्सव का दिन है, इसलिए मेरा अनुरोध है कि हमें इस दिन और अवसर को भगवान को समर्पित करके इसे मनाना चाहिए। हर किसी को घंटा बजाकर, पूजा करके, भक्ति गीत पढ़कर और मंत्र जप करके अपने तरीके से भक्ति व्यक्त करनी चाहिए। लोगों को इस अवसर को अपने घरों में समर्पण और खुशी के साथ मनाना चाहिए। सीएम ने देश और दुनियाभर में भगवान जगन्नाथ के भक्तों से अपने स्थानों पर भक्ति और खुशी के साथ श्रीमंदिर परिक्रमा प्रकल्प के भव्य उद्घाटन का जश्‍न मनाने का आग्रह किया। पटनायक ने परियोजना के लिए जमीन से बेदखल किए गए सभी लोगों, सेवायतों, कारीगरों और कॉरिडोर परियोजना में लगे श्रमिकों को भी धन्यवाद दिया।
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देशभर के 90 मंदिरों और संस्थानों के प्रतिनिधि आमंत्रित
ओडिशा के पुरी के भगवान जगन्नाथ मंदिर में श्री मंदिर परिक्रमा का उद्घाटन 17 जनवरी को होने वाला है। इसे जगन्नाथ हेरिटेज कॉरिडोर के रूप में भी जाना जाता है। यह परियोजना ओडिशा ब्रिज एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (ओबीसीसी) द्वारा पूरी की गई।
उद्घाटन समारोह में शामिल होने के लिए देशभर के 90 मंदिरों और संस्थानों के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया है। उद्घाटन के बाद यह कॉरिडोर आम जनता के लिए खुला रहेगा। यह कॉरिडोर 3,700 करोड़ रुपए की लागत से बना है। इसमें श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन भवन, श्री मंदिर स्वागत केंद्र, जगन्नाथ सांस्कृतिक केंद्र, समुद्र तट विकास, पुरी झील, नदी पुनरुद्धार योजना जैसी उप-योजनाएं शामिल हैं।
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3,700 करोड़ की परियोजना में ये सुविधाएं शामिल
3,700 करोड़ की परियोजना में पार्किंग स्थान, श्री सेतु (एक पुल), तीर्थस्थल केंद्र, तीर्थयात्रियों की आवाजाही के लिए एक नई सड़क, शौचालय, क्लॉक रूम,विद्युत कार्य और बहुत कुछ जैसी विभिन्न सुविधाएं शामिल हैं। बफर जोन और पैदल यात्री क्षेत्र का भी निर्माण किया गया है। श्री मंदिर परिक्रमा परियोजना (एसएमपीपी) में मंदिर के चारों ओर परिक्रमा (घड़ी की दिशा में परिक्रमा) के लिए सात मीटर का हरा बफर जोन और 10 मीटर का पैदल यात्री आंतरिक परिक्रमा क्षेत्र शामिल है। इस परियोजना का लक्ष्य 12वीं शताब्दी के जगन्नाथ मंदिर के चारों ओर आयताकार गलियारे, सामान स्क्रीनिंग, क्लॉक रूम, पीने के पानी की सुविधाओं आदि के साथ एक आधुनिक तीर्थ केंद्र में बदलना है।
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4 साल पहले सीएम ने लिया था संकल्प
पुरी शहर में तीन मई 2019 को चक्रवाती तूफान ने जमकर तबाही मचाई थी। च्रकवाती तूफान की चपेट में आने से इस शहर को काफी नुकसान हुआ था। इसमें कई घर उजड़ गए थे। हजारों लोगों के साथ-साथ अन्य पशु-पक्षियों की भी मौत हुई थी। ऐसे संकट के समय में मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने पुरी के लोगों की हरसंभव मदद की और उनकी उम्मीद बनकर खड़े हुए। अपने पुरी दौरे पर जाते समय मुख्यमंत्री गहन चिंतन में थे। तभी उन्होंने भगवान की तस्वीर वाला एक होर्डिंग देखा, तो हाथ जोड़कर प्रार्थना की। इसके बाद वह श्री मंदिर पहुंचे तो उन्हें मंदिर के परिवेश की दयनीय स्थिति देखकर दुख हुआ। मंदिर के चारों ओर संकरे रास्ते थे। रास्तों के दोनों ओर कूड़े के ढेर से आने वाली दुर्गंध असहनीय थी। इसी समय उन्होंने इस 12वीं सदी के विश्व प्रसिद्ध मंदिर का पूरी तरह से कायापलट करने का संकल्प लिया।