
amit shah
महेश शर्मा की रिपोर्ट...
(भुवनेश्वर): पूर्व और दक्षिण तटवर्ती राज्यों की 160 सीटों पर भाजपा की नजर है। शुरुआत ओडिशा करने की तैयारी है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह एक जुलाई को भुवनेश्वर आएंगे। वह लोकसभा और विधानसभा क्षेत्र के संभावित प्रत्याशियों के नामों पर कोर ग्रुप से चर्चा करेंगे। इसके अलावा बूथ कमेटियों के गठन की समीक्षा के साथ ही वह बीजद सरकार पर आक्रामक होंगे। हालांकि उनकी जनसभा की कोई योजना नहीं है, पर मीडिया से रूबरू होंगे।
शाह का बीते चार साल में ओडिशा का आठवां दौरा होगा। इसके बाद जुलाई के अंतिम या फिर अगस्त के प्रथम सप्ताह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ओडिशा दौरा संभावित है। पार्टी के प्रवक्ता पीतांबर आचार्य कहते हैं कि शाह का दौरा कन्फर्म है, पर प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर वह फिलहाल कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं। पर सुना यही जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाह के दौरे के महीने भर के भीतर आ सकते हैं।
2019 में उत्तर भारत के संभावित नुकसान के मद्देनजर इसीलिए पार्टी के धुरंधरों ने पूर्वी और दक्षिण तटवर्ती राज्यों की ओर रुख किया है। इसे कोरोमंडल भी कहा जाता है। शाह ने भुवनेश्वर को गेट वे बनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व अमित शाह की जुगल जोड़ी का बार-बार ओ़डिशा आना और चुनावी रणनीतिक मंथन करना भीतर ही भीतर उन्हें असुरक्षित होने का संकेत देता है। यदि मोदी आते हैं तो उनका भी आठवां ही दौरा होगा।
शाह को पुरी से चुनाव लड़वाने को लेकर लगाए जा रहे कयास
राज्य की 147 विधानसभा तथा 21 लोकसभा सीटों पर भाजपा के संभावित प्रत्याशियों का पैनल भी अमित शाह देखेंगे। सूत्र तो यहां तक संभावना व्यक्त कर रहे हैं कि शाह को पुरी से लोकसभा चुनाव लड़ाया जा सकता है। राज्य इकाई ने यह आग्रह हालांकि की मोदी से किया था पर साथ ही यह भी कहा था कि यदि वह न लड़ना चाहें तो शाह को पुरी से लड़ने के लिए कह दें। मोदी और शाह दोनों ही इस प्रस्ताव पर मुस्करा दिए थे। भाजपा की राज्य इकाई इसे हां के रूप में देख रही है।
ओडिशा में लोकसभा की 21 सीटों में से एक सुंदरगढ़ भाजपा के पास है जहां से केंद्रीय मंत्री जुएल ओरम ने मामूली अंतर से बीजू जनता दल के दिलीप तिर्की को पराजित किया था। राज्य की विधान सभा की कुल 147 सीटों में से भाजपा 10 ही जीत पायी थी। बीजद के साथ गठबंधन टूटने के बाद ओडिशा में भाजपा कमजोर होती गयी।
हालांकि जिला परिषद चुनाव में उसका ग्राफ बढ़ा था पर पार्टी की खुशी तब काफूर हो गयी थी जब वह बिजैपुर विधानसभा क्षेत्र का उपचुनाव बुरी तरह हार गयी थी। शाह ओडिशा से ही भाजपा के सक्रिय सदस्य भी हैं, ऐसे में यदि कार्यकर्ताओं का आग्रह ठुकराने के बजाय पुरी से चुनाव लड़ जाएं तो चौंकाने वाली बात न होगी। ओडिशा में मिशन 120+ शाह के दिमाग की उपज है। शायद इसीलिए ओडिशा में चुनाव में सफलता हासिल करने की परीक्षा उन्हें देनी पड़ रही है। लगाम भी उन्होंने खुद ही संभाल रखी है।
शाह के आने से ओडिशा पर नहीं पडेगा प्रभाव बीजद
बीजू जनता दल की प्रवक्ता सुलोचना दास कहती हैं कि शाह और मोदी का ओडिशा पर कोई प्रभाव नहीं है। बीजद सरकार पूरी तरह से ओडिशा की जनता के लिए समर्पित है। जिला परिषद के चुनाव में थोड़ी सफलता हासिल करने वाली भाजपा के हाथों तोते उस समय उड़ गए थे जब बिजैपुर चुनाव बुरी तरह हार गयी थी।
अमित शाह का ओ़डिशा दौरा
-जुलाई 6, 2015, भुवनेश्वर में जनसभा
-नवंबर 25, 2016, भुवनेश्वर में जनसभा
-जनवरी 20, 2017, पुरी में बिमला मंदिर का उद्घाटन
-अप्रैल 14 व 15 2017, भुवनेश्वर कार्यकारिणी बैठक
-जुलाई 4 व 6 2017, 175 किमी.सड़क यात्रा, गंजाम सभा
-सितंबर 6 व 8 2017, फ्रंटल आर्गनाइजेशन्स संग बैठक
-अप्रैल 4 व 5 2018, कालाहांडी व बलंगीर में सभाएं
-जुलाई 1 2018 को भुवनेश्वर आएंगे, रणनीतिक बैठकें।
Published on:
20 Jun 2018 07:58 pm

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